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Jhansi News: ट्रेन में बुजुर्ग यात्री की उखड़ती रही सांस... 383 किमी बाद मिला ऑक्सीजन सिलिंडर, फिर बची जान
Sun, 25 Feb 2024 12:27 AM IST
झांसी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Updated Sun, 25 Feb 2024 12:27 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। यात्रियों को सुरक्षित और आरामदायक सफर कराने का दावा करने वाले रेलवे अफसर शुक्रवार रात को संवेदनहीन बने रहे। ट्रेन में सफर कर रहे एक बुजुर्ग यात्री की ऑक्सीजन के अभाव में सांस उखड़ती रही। बुजुर्ग ने जान बचाने के लिए रेलवे अफसरों से सिलिंडर दिलाने की गुहार लगाई, लेकिन अफसरों ने हाथ खड़े कर दिए। इटारसी से झांसी तक 383 किमी तक के सफर में यात्री को सांसों के लिए तड़पता देख जब सह यात्रियों ने हंगामा किया, तो अफसर जागे। ट्रेन के झांसी पहुंचने पर यात्री को ऑक्सीजन सिलिंडर मुहैया कराया गया।
चित्रकूट के मोहल्ला नया बाजार निवासी शिव प्रसाद जायसवाल का नागपुर के लता मंगेशकर हॉस्पिटल में पिछले सात महीने से सांस की बीमारी का इलाज चल रहा है। तीन फरवरी को वह चेकअप के लिए अस्पताल गए थे और इलाज के लिए वहीं भर्ती हो गए थे। तभी से यहां उनका इलाज चल रहा था। 22 फरवरी को इस अस्पताल के चिकित्सक अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर चले गए। शिव प्रसाद जायसवाल को चिकित्सकों ने सलाह दी कि वह फिलहाल दिल्ली जाकर अपना इलाज करा लें। इस पर शिव प्रसाद 23 फरवरी को दोपहर 2 बजे नागपुर से तमिलनाडु एक्सप्रेस में दिल्ली जाने के लिए सवार हुए। ट्रेन के एम-1 कोच की सीट नंबर 73 और 75 पर वह अपनी बेटी नेहा के साथ यात्रा कर रहे थे। सांस की बीमारी होने के चलते ऑक्सीजन सिलिंडर भी उनके साथ था। ट्रेन नागपुर से चलकर इटारसी पहुंचने में ढाई घंटा लेट हो गई। ऐसे में बुजुर्ग यात्री के पास मौजूद ऑक्सीजन सिलिंडर में ऑक्सीजन कम होने लगी। इस पर यात्री की बेटी नेहा ने रेलवे के 139 नंबर पर कॉल करके भोपाल में ऑक्सीजन उपलब्ध कराने की गुहार लगाई। ट्रेन भोपाल पहुंची तो रेलवे अफसरों ने सिलिंडर न होने की बात कह दी। इधर, लगातार ऑक्सीजन कम होने से बुजुर्ग की सांस उखड़ती रही।
ट्रेन भोपाल से चली तो उन्होंने झांसी रेल प्रशासन से फोन कर सिलिंडर मुहैया कराने की गुहार लगाई। लेकिन यहां भी सिलिंडर उपलब्ध न होने की बात कही गई। बेटी नेहा ने ऑक्सीजन कम होने पर पिता की घबराहट बढ़ते देखा तो उसने सह यात्रियों से मदद मांगी। इसके बाद यात्री रेलवे स्टाफ पर भड़के। गुस्साए यात्रियों ने ट्रेन के स्टाफ से साफ कह दिया कि यदि झांसी में सिलिंडर नहीं आया तो वह ट्रेन आगे नहीं जाने देंगे। यात्रियों ने ट्रेन में हंगामा भी किया। इसके बाद रेलवे अस्पताल के सीएमएस ने ट्रेन के झांसी पहुंचने पर यात्री को ऑक्सीजन सिलिंडर उपलब्ध कराया।
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झांसी में स्टाफ ने खड़े कर दिए थे हाथ
ऑक्सीजन सिलिंडर के लिए जब यात्री शिव प्रसाद की बेटी नेहा ने झांसी के स्टाफ को फोन किया तो पहले यहां भी सिलिंडर देने से हाथ खड़े कर दिए। नेहा ने बताया कि झांसी में सिलिंडर के लिए रेलवे के जिस कर्मचारी से बात हो रही थी उसने पहले सिलिंडर की व्यवस्था करने की बात कही, लेकिन बाद में फोन स्विच ऑफ कर लिया।
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थोड़ी-थोड़ी ऑक्सीजन लेकर काटा सफर
शिव प्रसाद जायसवाल ने बताया कि उनके पास मौजूद सिलिंडर में लगातार ऑक्सीजन कम हो रही थी। जब भोपाल में सिलिंडर नहीं मिला तो जितनी डॉक्टर ने ऑक्सीजन बताई थी उन्होंने उससे भी आधी ऑक्सीजन ली। ताकि झांसी तक कैसे भी वह जीवित रह पाएं।
-- -- -- -- -- वर्जन
जिस तरह का सिलिंडर यात्री के पास था वह सिलिंडर रेलवे पर उपलब्ध नहीं था। बाद में वैसे ही सिलिंडर की व्यवस्था करके यात्री को उपलब्ध करा दिया गया था।
- डॉ. राकेश निगम, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, रेलवे अस्पताल।
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झांसी। यात्रियों को सुरक्षित और आरामदायक सफर कराने का दावा करने वाले रेलवे अफसर शुक्रवार रात को संवेदनहीन बने रहे। ट्रेन में सफर कर रहे एक बुजुर्ग यात्री की ऑक्सीजन के अभाव में सांस उखड़ती रही। बुजुर्ग ने जान बचाने के लिए रेलवे अफसरों से सिलिंडर दिलाने की गुहार लगाई, लेकिन अफसरों ने हाथ खड़े कर दिए। इटारसी से झांसी तक 383 किमी तक के सफर में यात्री को सांसों के लिए तड़पता देख जब सह यात्रियों ने हंगामा किया, तो अफसर जागे। ट्रेन के झांसी पहुंचने पर यात्री को ऑक्सीजन सिलिंडर मुहैया कराया गया।
चित्रकूट के मोहल्ला नया बाजार निवासी शिव प्रसाद जायसवाल का नागपुर के लता मंगेशकर हॉस्पिटल में पिछले सात महीने से सांस की बीमारी का इलाज चल रहा है। तीन फरवरी को वह चेकअप के लिए अस्पताल गए थे और इलाज के लिए वहीं भर्ती हो गए थे। तभी से यहां उनका इलाज चल रहा था। 22 फरवरी को इस अस्पताल के चिकित्सक अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर चले गए। शिव प्रसाद जायसवाल को चिकित्सकों ने सलाह दी कि वह फिलहाल दिल्ली जाकर अपना इलाज करा लें। इस पर शिव प्रसाद 23 फरवरी को दोपहर 2 बजे नागपुर से तमिलनाडु एक्सप्रेस में दिल्ली जाने के लिए सवार हुए। ट्रेन के एम-1 कोच की सीट नंबर 73 और 75 पर वह अपनी बेटी नेहा के साथ यात्रा कर रहे थे। सांस की बीमारी होने के चलते ऑक्सीजन सिलिंडर भी उनके साथ था। ट्रेन नागपुर से चलकर इटारसी पहुंचने में ढाई घंटा लेट हो गई। ऐसे में बुजुर्ग यात्री के पास मौजूद ऑक्सीजन सिलिंडर में ऑक्सीजन कम होने लगी। इस पर यात्री की बेटी नेहा ने रेलवे के 139 नंबर पर कॉल करके भोपाल में ऑक्सीजन उपलब्ध कराने की गुहार लगाई। ट्रेन भोपाल पहुंची तो रेलवे अफसरों ने सिलिंडर न होने की बात कह दी। इधर, लगातार ऑक्सीजन कम होने से बुजुर्ग की सांस उखड़ती रही।
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ट्रेन भोपाल से चली तो उन्होंने झांसी रेल प्रशासन से फोन कर सिलिंडर मुहैया कराने की गुहार लगाई। लेकिन यहां भी सिलिंडर उपलब्ध न होने की बात कही गई। बेटी नेहा ने ऑक्सीजन कम होने पर पिता की घबराहट बढ़ते देखा तो उसने सह यात्रियों से मदद मांगी। इसके बाद यात्री रेलवे स्टाफ पर भड़के। गुस्साए यात्रियों ने ट्रेन के स्टाफ से साफ कह दिया कि यदि झांसी में सिलिंडर नहीं आया तो वह ट्रेन आगे नहीं जाने देंगे। यात्रियों ने ट्रेन में हंगामा भी किया। इसके बाद रेलवे अस्पताल के सीएमएस ने ट्रेन के झांसी पहुंचने पर यात्री को ऑक्सीजन सिलिंडर उपलब्ध कराया।
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झांसी में स्टाफ ने खड़े कर दिए थे हाथ
ऑक्सीजन सिलिंडर के लिए जब यात्री शिव प्रसाद की बेटी नेहा ने झांसी के स्टाफ को फोन किया तो पहले यहां भी सिलिंडर देने से हाथ खड़े कर दिए। नेहा ने बताया कि झांसी में सिलिंडर के लिए रेलवे के जिस कर्मचारी से बात हो रही थी उसने पहले सिलिंडर की व्यवस्था करने की बात कही, लेकिन बाद में फोन स्विच ऑफ कर लिया।
थोड़ी-थोड़ी ऑक्सीजन लेकर काटा सफर
शिव प्रसाद जायसवाल ने बताया कि उनके पास मौजूद सिलिंडर में लगातार ऑक्सीजन कम हो रही थी। जब भोपाल में सिलिंडर नहीं मिला तो जितनी डॉक्टर ने ऑक्सीजन बताई थी उन्होंने उससे भी आधी ऑक्सीजन ली। ताकि झांसी तक कैसे भी वह जीवित रह पाएं।
जिस तरह का सिलिंडर यात्री के पास था वह सिलिंडर रेलवे पर उपलब्ध नहीं था। बाद में वैसे ही सिलिंडर की व्यवस्था करके यात्री को उपलब्ध करा दिया गया था।
- डॉ. राकेश निगम, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, रेलवे अस्पताल।