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एक बैड टच ने तबाह कर दी तमाम बेटियों की जिंदगी

Mon, 09 Nov 2020 01:15 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 09 Nov 2020 01:15 AM IST
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ek bed tach ne tavah kr di tamam betiyo ki jindgi
एक बैड डच या फब्ती बरसों तक लड़कियों का पीछा करती है। - फोटो : ???? ????
एक बैड टच ने तबाह कर दी तमाम बेटियों की जिंदगी
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पुनीत शर्मा
झांसी। बेशर्म मनचले समाज में हों या सीखचों के पीछे, उनकी जिंदगी जहां की तहां ही रहती है, पर छेड़छाड़ का शिकार बेटियां...। उनकी अंतहीन तकलीफें जाननी हैं तो मनोचिकित्सकों से पूछिए। ऐसी बेटियों की नींद, भूख, प्यास, हंसी, खुशी, पढ़ाई खेल और कभी कभी तो पूरी जिंदगी तबाह हो रही है। एक बैड टच या फब्ती बरसों तक पीछा करती है। तमाम लड़कियां डिप्रेशन का शिकार हो गईं हैं। अकेले घर से बाहर नहीं जा पातीं। स्कूल-कॉलेज को जाने वाले रास्ते इन्हें डराते हैं। अपने ही घर में हमेशा खोई खोई रहती हैं। अब इन हालातों में जरा सोचिए कि उनके घर वालों पर क्या बीत रही होगी। बेटी के चेहरे पर एक मुस्कुराहट देखने को भी यह लोग तरस गए हैं। जब हमने शहर के मनोचिकित्सकों से बात की तो पता चला कि करीब 100 ऐसी लड़कियां हैं जिन्होंने एक साल के भीतर अपना इलाज कराया है।
केस वन:
दुष्कर्म पीड़िता मानसिक रूप से हो गई बीमार, छूट गई पढ़ाई
झांसी। तेरह साल की एक किशोरी के साथ पड़ोस के युवक ने दुष्कर्म किया था। मुकदमा दर्ज हुआ और पुलिस ने दुष्कर्मी को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया। लेकिन इस घटना ने किशोरी का जीवन तबाह कर दिया है। उसके दिलोदिमाग पर इस घटना का ऐसा असर हुआ कि मानसिक संतुलन पूरी तरह से बिगड़ गया है। परिवार वाले बड़े बड़े डाक्टरों को दिखा चुके लेकिन अभी तक वह पूरी तरह से ठीक नहीं हो पाई है। इस समय वह जिला अस्पताल मनोचिकित्सक डॉ. शिकाफा जाफरीन के इलाज में है। मनोचिकित्सक का कहना है कि अभी इलाज चल रहा है। एक साल तक ट्रीटमेंट जारी रहेगा। पहले की तुलना में कुछ सुधार भी हो रहा है। वह बुरी तरह से डिस्टर्ब हो चुकी है। इस कदर डर गई है कि अकेले घर से बाहर नहीं जाती। परिवार वाले भी बेटी के चलते किसी रिश्तेदारी या पारिवारिक कार्यक्रमों में शरीक नहीं हो पा रहे हैं। स्थिति यह हो गई है कि किशोरी को खाना भी उसकी मां खिलाती है।
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केस दो:
छेड़छाड़ का शिकार हुई किशोरी कई दफा कर चुकी खुदकुशी की कोशिश
झांसी। यह घटना अगस्त की है। कक्षा ग्यारह की छात्रा को स्कूल से घर आते एक युवक परेशान करता था। किशोरी इतना डर गई थी कि स्कूल न जाने के बहाने ढूंढती थी। घर वाले पूछते तो कह देती कि उसकी तबियत ठीक नहीं है। लेकिन जब युवक की हरकतें बढ़ती गईं तो उसने अपनी मां को बता दिया। पुलिस में शिकायत हुई और पुलिस ने युवक को गिरफ्तार भी कर लिया। लेकिन उस छेड़छाड़ ने किशोरी को इतना डरा दिया कि वह स्कूल नहीं गई। मनोचिकित्सक के यहां तीन महीने से उसका इलाज चल रहा है। चिकित्सक का कहना है कि दो बार हाथ की नस काट चुकी है किशोरी। वह डिप्रेशन में चली गई है। अभी उसे ठीक होने में तीन महीने का वक्त लगेगा। स्थिति यह है कि किसी भी अनजान को देखकर वह डर जाती है। उसके भीतर जो डर बैठ गया है उसे निकालने के लिए लगातार काउंसलिंग की जा रही है। परिवार वाले भी उसे कभी अकेला नहीं छोड़ते।
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केस तीन:
कन्वर्जन डिसऑर्डर का शिकार हुई महिला खिलाड़ी, पूरा कॅरियर तबाह
झांसी। छेड़छाड़ ने एक महिला खिलाड़ी का कॅरियर ही तबाह कर दिया। एक निजी मनोचिकित्सक का कहना है कि वह कन्वर्जन डिसआर्डर का शिकार हो गई थी। इस कदर डर गई कि बार बार बेहोश हो जाती थी। यहां तक ही सही से सुनाई भी नहीं दे रहा था। हालत इतनी बिगड़ गई कि चार दिन भर्ती करना पड़ा। अगस्त की घटना है कि और अभी तक उसका इलाज चल रहा है। किसी साथी ने ही उससे छेड़छाड़ कर दी थी। वह कई दिनों तक घबराई रही। अगर तत्काल इलाज शुरू नहीं होता तो वह डिप्रेशन का शिकार हो जाती। हालांकि अभी वह पहले से बेहतर स्थिति में है। लेकिन अभी करीब तीन महीने तक उसका इलाज चलेगा। उसकी कई जांच भी कराई गईं थीं लेकिन सभी नॉर्मल आईं। फिलहाल काउंसलिंग की जा रही है। इस घटना के बाद उसने खेल से दूरी बना ली है। एक तरह से उसका खेल का पूरा कॅरियर ही तबाह हो गया है।
केस चार:
इंटरमीडिएट का एग्जाम देने से ही कर दिया था इंकार
झांसी। बुंदेलखंड के एक गांव निवासी किशोरी को इंटर का एग्जाम देना था। मनोचिकित्सक डॉ. अमन किशोर का कहना है कि घटना 2019 की है। किशोरी इंटर की तैयारी कर रही थी। इसी बीच कॉलेज के आसपास एक युवक ने छेड़छाड़ की। इस घटना से वह डर गई। स्कूल जाना ही बंद कर दिया। इंटर के एग्जाम आ गए लेकिन पेपर देने से ही इंकार कर दिया। परिवार के लोग मनोचिकित्सक के पास लेकर पहुंचे। काउंसलिंग के दौरान पता चला कि वह उस घटना से इतना डर गई थी कि जो एग्जाम की तैयारी की थी वह सब भूल गई। परिवार वालों ने भी उसकी मनोदशा को समझते हुए उस साल की परीक्षा छुड़वा दी थी। उस किशोरी का पूरा एक साल ही तबाह हो गया।

केस पांच:
दुकान पर खड़े युवकों ने फब्ती कसी तो युवती ने बाहर निकलना बंद कर दिया
झांसी। छेड़छाड़ का शिकार हुई एक युवती ग्वालियर मेडिकल कालेज में मनोचिकित्सक के इलाज में है। इस युवती पर एक दुकान पर खड़े रहने वाले युवक फब्ती कसते थे। इससे युवती इस कदर डर गई कि घर से बाहर निकलना बंद कर दिया। मनोचिकित्सक ने तत्काल पुलिस की मदद लेने को कहा। पुलिस ने मामला दर्ज किया और दो युवकों को गिरफ्तार भी कर लिया। लेकिन युवती का खौफ आज तक खत्म नहीं हुआ है। जहां भी उसे भीड़ दिखाई देती है वह डरने लगती है। मनोचिकित्सक का कहना है कि काउंसलिंग की जा रही है। परिवार वालों से भी कहा गया है कि वह उसे हिम्मत बंधाएं। जब तक वह पूरी तरह से ठीक न हो जाए कभी उसे अकेला बाहर न जाने दें।
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