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एक आंख निकालकर बचाई ब्लैक फंगस के मरीज की जान
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एक आंख निकालकर बचाई ब्लैक फंगस के मरीज की जान
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस (म्यूकरमाइकोसिस) की शिकार महिला की एक आंख निकालकर जान बचाई गई। संक्रमण खतरनाक स्थिति में पहुंच चुका था। लगातार चार घंटे के ऑपरेशन के बाद फंगस साफ किया गया। इसके अलावा दो नए मरीज भी सामने आए हैं।
मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले के ग्राम पलेरा निवासी साधना मिश्रा (53) एक माह पूर्व कोरोना वायरस के संक्रमण की चपेट में आ गईं थीं। इस महामारी से तो वह मुक्त हो गईं थीं, परंतु ब्लैक फंगस की चपेट में आ गईं। पहले से वह मधुमेह की भी रोगी थीं। शुरुआत में वह बीमारी को समझ नहीं पाईं, जबकि उनकी आंखों की रोशनी लगातार कम होती जा रही थी। बाद में परिजन उन्हें इलाज के लिए ग्वालियर ले गए, जहां ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई। इसके बाद परिजन उन्हें महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। यहां शुक्रवार को उन्होंने ईएनटी विभाग के विभागाध्यक्ष डा. जितेंद्र कुमार यादव की अगुवाई में बारह सदस्यीय टीम ने चार घंटों तक ऑपरेशन किया।
ऑपरेशन में उनकी दाहिनी आंख निकालनी पड़ गई। डा. जितेंद्र कुमार यादव ने बताया कि एक आंख में ब्लैक फंगस इस कदर हावी हो गया था कि आंख निकालने के अलावा अन्य कोई चारा नहीं था। महिला की दूसरी आंख सुरक्षित है। हालांकि, फंगस दूसरी आंख में पहुंच गया था, जिसे साफ कर दिया गया है। इसके पहले ब्लैक फंगस के तीन मरीजों के ऑपरेशन भी किए जा चुके हैं। तीनों की हालत बेहतर है।
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ब्लैक फंगस की चुनौती से निपटने के लिए महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज पूरी तरह से तैयार है। कोरोना संक्रमितों का विशेष ख्याल रखा जा रहा है। खासतौर पर जो संक्रमित मधुमेह के रोगी हैं, उनकी नियमित जांच की जा रही है।
- डॉ. रामबाबू, क्रिटिकल केयर इंचार्ज - महारानी लक्ष्मीबाई मेेडिकल कॉलेज
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झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस (म्यूकरमाइकोसिस) की शिकार महिला की एक आंख निकालकर जान बचाई गई। संक्रमण खतरनाक स्थिति में पहुंच चुका था। लगातार चार घंटे के ऑपरेशन के बाद फंगस साफ किया गया। इसके अलावा दो नए मरीज भी सामने आए हैं।
मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले के ग्राम पलेरा निवासी साधना मिश्रा (53) एक माह पूर्व कोरोना वायरस के संक्रमण की चपेट में आ गईं थीं। इस महामारी से तो वह मुक्त हो गईं थीं, परंतु ब्लैक फंगस की चपेट में आ गईं। पहले से वह मधुमेह की भी रोगी थीं। शुरुआत में वह बीमारी को समझ नहीं पाईं, जबकि उनकी आंखों की रोशनी लगातार कम होती जा रही थी। बाद में परिजन उन्हें इलाज के लिए ग्वालियर ले गए, जहां ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई। इसके बाद परिजन उन्हें महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। यहां शुक्रवार को उन्होंने ईएनटी विभाग के विभागाध्यक्ष डा. जितेंद्र कुमार यादव की अगुवाई में बारह सदस्यीय टीम ने चार घंटों तक ऑपरेशन किया।
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ऑपरेशन में उनकी दाहिनी आंख निकालनी पड़ गई। डा. जितेंद्र कुमार यादव ने बताया कि एक आंख में ब्लैक फंगस इस कदर हावी हो गया था कि आंख निकालने के अलावा अन्य कोई चारा नहीं था। महिला की दूसरी आंख सुरक्षित है। हालांकि, फंगस दूसरी आंख में पहुंच गया था, जिसे साफ कर दिया गया है। इसके पहले ब्लैक फंगस के तीन मरीजों के ऑपरेशन भी किए जा चुके हैं। तीनों की हालत बेहतर है।
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ब्लैक फंगस की चुनौती से निपटने के लिए महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज पूरी तरह से तैयार है। कोरोना संक्रमितों का विशेष ख्याल रखा जा रहा है। खासतौर पर जो संक्रमित मधुमेह के रोगी हैं, उनकी नियमित जांच की जा रही है।
- डॉ. रामबाबू, क्रिटिकल केयर इंचार्ज - महारानी लक्ष्मीबाई मेेडिकल कॉलेज