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पहले स्कूल व्हील चेयर पर आते थे लेकिन अब धीरे-धीरे पैरों को खड़े होने लगे बच्चे

Thu, 03 Mar 2022 01:14 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 03 Mar 2022 01:14 AM IST
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Earlier schools used to come on wheel chair but now gradually the children started standing on their feet.
झांसी। समेकित शिक्षा द्वारा किए जा रहे प्रयास से परिषदीय विद्यालय में अध्ययनरत दिव्यांग विद्यार्थियों में सुधार आने लगा है। शिक्षा विभाग का दिव्यांगों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया है। जिससे कई बच्चों की शारीरिक और मानसिक रूप से दिव्यांग स्थिति में सुधार आने लगा है। जो बच्चे पहले व्हील चेयर पर आते थे वह अब अपने पैरों पर खड़े होने लगे हैं। बच्चों में हो रहे शारीरिक बदलाव से परिवार वाले भी खुश हैं।
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शारीरिक रूप से अक्षम बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए समेकित शिक्षा की शुरूआत वर्ष 2000 में की गई। जिसके तहत प्रतिवर्ष शिक्षकों द्वारा घर-घर भ्रमण कर दिव्यांग बच्चोें को चिन्हित किया जाता है। बच्चे को विद्यालय में प्रवेश कराने के लिए समझाया जाता है।
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शिक्षा विभाग द्वारा इन बच्चों की थेरेपी के लिए विशेष प्रशिक्षक नियुक्त किए हैं, जो कि इन बच्चों को समय समय पर थेरेपी देते रहते हैं। विशेष प्रशिक्षकों के द्वारा दी जा रही थेरेपी से बच्चों की स्थिति में सुधार दिखने लगा है। विशेष प्रशिक्षक इन बच्चों के अभिभावकों की भी काउंसलिंग कर, उनको बच्चों के साथ व्यवहार करना सिखाते हैं।
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केस- 1
प्राथमिक पाठशाला गुदरी कंपोजिट स्कूल में अध्ययनरत् 10 वर्षीय मोहम्मद नजीब का जब विद्यालय में प्रवेश कराया गया था, तब वह स्वयं से चल भी नहीं पाता था। उसके शिक्षक ने बताया कि ये व्हील चेयर से स्कूल आया करता था, लेकिन लगातार दी जा रही थेरेपी से आज नजीब किसी का हाथ पकड़कर चलकर विद्यालय आने लगा है।
केस- 2
प्राथमिक विद्यालय अलीगोल में अध्ययनरत् 11 वर्षीय फैजल और अरबाज कक्षा 3 में पढ़ रहे हैं। दोनों ही विद्यार्थी बौद्धिक रूप से अक्षम हैं। दो वर्ष पहले जब इन बच्चों का प्रवेश विद्यालय में किया गया था, तब इन बच्चों की स्थिति कुछ खास सही नहीं थी, लेकिन आज दो सालों से समय समय पर दी जा रही थेरेपी और सामान्य बच्चों के साथ पढ़ने से उनकी स्थिति कुछ सामान्य होने लगी है। दोनों बच्चों ने थोड़ा-थोड़ा लिखना-पढ़ना भी शुरू कर दिया है।
समेकित शिक्षा का प्रयास
समेकित शिक्षा इस सुझाव के बाद प्रारंभ की गई थी कि शारीरिक और मानसिक रूप से अक्षम बच्चों को शिक्षा दया आधार पर नहीं जबकि सदुपयोग के आधार पर मिलनी चाहिए। एक साधारण सी थ्योरी है कि प्रत्येक व्यक्ति अपने आस-पास के व्यवहार के अनुरूप ही चीजें समझता और सीखता है। इसी प्रकार जब ये मानसिक रूप से अक्षम बच्चे सामान्य वातावरण में सामान्य गतिविधियां, सामान्य व्यवहार देखते तो वे वही सीखते हैं।
इन बच्चों की दी जा रही थेरेपी से इनकी शारीरिक स्थिति में सुधार आने लगा है, एक बच्चा तो एक वक्त तक तिपहिया गाड़ी से स्कूल आया करता था, लेकिन आज फिजियोथेरेपी के कारण यही खुद चलकर स्कूल आ रहा है। - राणा प्रताप सिंह, फिजियोथेरेपिस्ट
मानसिक रूप से अविकसित बच्चों को अब सामान्य बच्चों के साथ पढ़ाने से उनके व्यवहार में भी बदलाव आया है, वे सबके साथ खुद को सामान्य महसूस करते हैं, सामान्य आदतें सीख रहे, यही सबसे अहम बदलाव है। - चंदा त्रिपाठी, विशेष प्रशिक्षक

बच्चों को थेरेपी और स्टडी मैटेरियल समय-समय पर पहुंचाया जाता है, जिससे इनको सीखने में आसानी होती हैं। विशेष प्रशिक्षकों का भी प्रशिक्षण कराया जाता है। बच्चों के लिए जरूरत के हिसाब से सुविधाएं जैसे व्हील चेयर आदि सामग्री भी उपलब्ध कराई जाती है। - रत्नेश त्रिपाठी, जिला समन्वयक, समेकित शिक्षा
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