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डायक्लोफिनेक दवा से गिद्धों की प्रजाति हो रही समाप्त
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झांसी। बर्ड फेस्टिवल के मौके पर वन विभाग द्वारा सिमरधा बांध पर अंतरराष्ट्रीय वेटलैंड दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वन कर्मियों द्वारा स्कूली बच्चों को पक्षियों को दिखाया गया। वहीं, मौजूद छात्रों को पक्षियों की प्रजाति और प्रजनन के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इस मौके पर कई स्कूलों के छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। मुख्य वन संरक्षक पीपी सिंह ने कहा कि डायक्लोफिनेक दवा के कारण गिद्धों की प्रजाति समाप्ति के कगार पर पहुंच गई है।
उन्होंने कहा कि झांसी जिले में देश के कई स्थानों व विदेशों से हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर पक्षी आते हैं। पक्षियों के शरीर में बायोलॉजिकल क्लॉक होता है। जिसकी वजह से वह सुदूर क्षेत्र में बिना कोई रोकटोक व परेशानी के अपने गंतव्य तक पहुंच जाते हैं। वन संरक्षक बीआर अहिरवार ने बताया कि पुराने समय में गांव में वन, बाग और तालाबों का संरक्षण किया जाता था। जिससे पर्यावरण में संतुलन बना रहता था। जिससे पशु पक्षियों के अलावा वन्य जीव-जंतु भी सुरक्षित रहते थे।
कार्यक्रम में प्रभागीय वनाधिकारी ने बताया कि इस वर्ष विश्व वेटलैंड दिवस बनाए जाने का विषय वेटलैंड और वाटर है। वेटलैंड में स्वच्छ जल प्रचुर मात्रा में उपलब्ध कराने के लिए और उनके संरक्षण व संवर्धन के लिए राष्ट्रीय स्तर प्रयास किया जा रहा है। इस दौरान 150 विस्टलिंग डग, 160 कॉमन कूट, 680 कॉमन पोचर्ड सहित लगभग तीन हजार पक्षियों को देखा गया। इस मौके पर प्रभागीय वनाधिकारी वीके मिश्रा, क्षेत्रीय वनाधिकारी परवेज शहजाद, प्रद्युम्न सिंह भदौरिया, महेश कुमार, मनोज श्रीवास, शिवनाथ मौजूद रहे।
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कार्यक्रम में भाषण, निबंध एवं कला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में पहला, दूसरा और तीसरा स्थान प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को मेडल और प्रशस्ति पत्र दिया गया।
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उन्होंने कहा कि झांसी जिले में देश के कई स्थानों व विदेशों से हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर पक्षी आते हैं। पक्षियों के शरीर में बायोलॉजिकल क्लॉक होता है। जिसकी वजह से वह सुदूर क्षेत्र में बिना कोई रोकटोक व परेशानी के अपने गंतव्य तक पहुंच जाते हैं। वन संरक्षक बीआर अहिरवार ने बताया कि पुराने समय में गांव में वन, बाग और तालाबों का संरक्षण किया जाता था। जिससे पर्यावरण में संतुलन बना रहता था। जिससे पशु पक्षियों के अलावा वन्य जीव-जंतु भी सुरक्षित रहते थे।
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कार्यक्रम में प्रभागीय वनाधिकारी ने बताया कि इस वर्ष विश्व वेटलैंड दिवस बनाए जाने का विषय वेटलैंड और वाटर है। वेटलैंड में स्वच्छ जल प्रचुर मात्रा में उपलब्ध कराने के लिए और उनके संरक्षण व संवर्धन के लिए राष्ट्रीय स्तर प्रयास किया जा रहा है। इस दौरान 150 विस्टलिंग डग, 160 कॉमन कूट, 680 कॉमन पोचर्ड सहित लगभग तीन हजार पक्षियों को देखा गया। इस मौके पर प्रभागीय वनाधिकारी वीके मिश्रा, क्षेत्रीय वनाधिकारी परवेज शहजाद, प्रद्युम्न सिंह भदौरिया, महेश कुमार, मनोज श्रीवास, शिवनाथ मौजूद रहे।
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कार्यक्रम में भाषण, निबंध एवं कला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में पहला, दूसरा और तीसरा स्थान प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को मेडल और प्रशस्ति पत्र दिया गया।