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बैंकों का 351 करोड़ अटका, लोन देने से भी खड़े कर रहे हाथ
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झांसी। कोरोना संक्रमण काल में कारोबार और रोजगार बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। इसका असर बैंकों के कारोबार भी पड़ा है। खासतौर पर बैंक अपने दिए गए कर्ज की वसूली नहीं कर पा रहे हैं। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि जिले में बैंकों की 351 करोड़ रुपये की भारी भरकम रकम फंसी हुई है। पिछले छह माह से लगी आ रही रोक की वजह से बैंक इसकी वसूली नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में बैंक परिस्थितियां सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं। रिकवरी न होने की वजह से बैंक अभी लोन देने में हाथ खड़े कर रहे हैं।
कोरोना वायरस के संक्रमण के नियंत्रण के लिए सरकार ने 25 मार्च से लॉकडाउन लागू कर दिया था। इसके साथ ही कारोबार और व्यापार पूरी तरह से ठप पड़ गए थे। 30 जून को लॉकडाउन की प्रक्रिया खत्म हुई और 01 जुलाई से अनलॉक लागू किया गया। बावजूद, अब तक स्थितियां सामान्य नहीं हो पाईं हैं। हालांकि, दीपावली के नजदीक आते ही कारोबार ने उछाल तो मारा है, लेकिन हालात पूरी तरह से सामान्य होने में अभी भी वक्त लगेगा। कोरोना काल में उत्पन्न हुई इन परिस्थितियों का सबसे ज्यादा असर बैंकों पर पड़ा है। आमदनी न होने या कम हो जाने की वजह से लोग बैंकों से लिए गए ऋण की अदायगी नहीं कर पा रहे हैं। इससे जिले में बैंकों की तीन अरब इक्यावन करोड़ रुपये की रकम फंस कर रह गई है। अप्रैल से वसूली न हो पाने की वजह से बैंकों पर बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।
केस - 1
कारोबार बचा नहीं तो कैसे चुकाएं कर्ज
झांसी। वासुदेव मुहल्ला निवासी एक कारोबारी ने अपने कपड़े के कारोबार को विस्तार देने के लिए बैंक से बारह लाख रुपये का दिसंबर माह में कर्ज लिया था। चूंकि, कारोबार अच्छा चल रहा था तो बैंक ने भी हाथों हाथ कर्ज दे दिया था। इस रकम से कारोबारी दुकान का नये सिरे से रंगगोगन किया और अधिक माल भी भरवाया। जनवरी, फरवरी और मार्च की किस्तों की नियमित अदायगी की, लेकिन अप्रैल से मामला गड़बड़ा गया, जो अभी तक नहीं संभल पाया है। अब दीपावली के बाद शादियों का सीजन शुरू होने से ही कारोबारी उम्मीद बांधे हुए है।
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केस - 2
कर्ज चुकाना दूर, खर्च चलाना हुआ मुश्किल
झांसी। प्रेमनगर निवासी एक व्यक्ति ने दो साल पहले आईस क्यूब (बर्फ) का कारोबार शुरू किया था। होटल, रेस्टोरेंट, बार व दुकानों में वो पैकेट बंद आईस क्यूब की सप्लाई करता था। कारोबार अच्छा चल रहा था। ऐसे में एक और मशीन लगाने की योजना बनाई। बैंक से साढ़े चार लाख रुपये का कर्ज लिया। लेकिन, मार्च में लॉकलाउन लग गया और इसके बाद से पूरे गर्मी के सीजन में कारोबार ठप पड़ रहे। ऐसे में बैंक की किस्तों की अदायगी करना तो दूर कारोबारी के लिए घर का खर्च चलाना तक मुश्किल हो गया था।
केस - 3
वेतन हो गया कम, अब कैसे भरें होेम लोन
झांसी। बड़ागांव गेट बाहर निवासी एक व्यक्ति ग्वालियर में एक प्राइवेट कंपनी में कार्यरत हैं। कोरोना काल में उत्पन्न विपरीत परिस्थितियों के चलते कंपनी द्वारा अभी प्रति माह साठ फीसदी वेतन का भुगतान किया जा रहा है। हालांकि, कंपनी ने भरोसा दिया है कि परिस्थितियां सामान्य होने पर बकाया वेतन का भुगतान कर दिया जाएगा। लेकिन, वेतन कम मिलने की वजह से वे मकान बनाने के लिए गए कर्ज की नियमित किस्त अदायगी नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में उन्हें कर्ज पर ब्याज बढ़ने का खतरा सता रहा है।
बैंकों की वसूली लगभग पूरी तरह बंद चल रही है। तमाम लोगों के पास कर्ज चुकाने के लिए अभी पैसा नहीं है। हालांकि, ऐसे भी कई सारे लोग हैं, जो नियमित रूप से अदायगी कर रहे हैं। बैंक परिस्थितियां सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं।
- अरुण कुमार, अग्रणी जिला प्रबंधक
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कोरोना वायरस के संक्रमण के नियंत्रण के लिए सरकार ने 25 मार्च से लॉकडाउन लागू कर दिया था। इसके साथ ही कारोबार और व्यापार पूरी तरह से ठप पड़ गए थे। 30 जून को लॉकडाउन की प्रक्रिया खत्म हुई और 01 जुलाई से अनलॉक लागू किया गया। बावजूद, अब तक स्थितियां सामान्य नहीं हो पाईं हैं। हालांकि, दीपावली के नजदीक आते ही कारोबार ने उछाल तो मारा है, लेकिन हालात पूरी तरह से सामान्य होने में अभी भी वक्त लगेगा। कोरोना काल में उत्पन्न हुई इन परिस्थितियों का सबसे ज्यादा असर बैंकों पर पड़ा है। आमदनी न होने या कम हो जाने की वजह से लोग बैंकों से लिए गए ऋण की अदायगी नहीं कर पा रहे हैं। इससे जिले में बैंकों की तीन अरब इक्यावन करोड़ रुपये की रकम फंस कर रह गई है। अप्रैल से वसूली न हो पाने की वजह से बैंकों पर बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।
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केस - 1
कारोबार बचा नहीं तो कैसे चुकाएं कर्ज
झांसी। वासुदेव मुहल्ला निवासी एक कारोबारी ने अपने कपड़े के कारोबार को विस्तार देने के लिए बैंक से बारह लाख रुपये का दिसंबर माह में कर्ज लिया था। चूंकि, कारोबार अच्छा चल रहा था तो बैंक ने भी हाथों हाथ कर्ज दे दिया था। इस रकम से कारोबारी दुकान का नये सिरे से रंगगोगन किया और अधिक माल भी भरवाया। जनवरी, फरवरी और मार्च की किस्तों की नियमित अदायगी की, लेकिन अप्रैल से मामला गड़बड़ा गया, जो अभी तक नहीं संभल पाया है। अब दीपावली के बाद शादियों का सीजन शुरू होने से ही कारोबारी उम्मीद बांधे हुए है।
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केस - 2
कर्ज चुकाना दूर, खर्च चलाना हुआ मुश्किल
झांसी। प्रेमनगर निवासी एक व्यक्ति ने दो साल पहले आईस क्यूब (बर्फ) का कारोबार शुरू किया था। होटल, रेस्टोरेंट, बार व दुकानों में वो पैकेट बंद आईस क्यूब की सप्लाई करता था। कारोबार अच्छा चल रहा था। ऐसे में एक और मशीन लगाने की योजना बनाई। बैंक से साढ़े चार लाख रुपये का कर्ज लिया। लेकिन, मार्च में लॉकलाउन लग गया और इसके बाद से पूरे गर्मी के सीजन में कारोबार ठप पड़ रहे। ऐसे में बैंक की किस्तों की अदायगी करना तो दूर कारोबारी के लिए घर का खर्च चलाना तक मुश्किल हो गया था।
केस - 3
वेतन हो गया कम, अब कैसे भरें होेम लोन
झांसी। बड़ागांव गेट बाहर निवासी एक व्यक्ति ग्वालियर में एक प्राइवेट कंपनी में कार्यरत हैं। कोरोना काल में उत्पन्न विपरीत परिस्थितियों के चलते कंपनी द्वारा अभी प्रति माह साठ फीसदी वेतन का भुगतान किया जा रहा है। हालांकि, कंपनी ने भरोसा दिया है कि परिस्थितियां सामान्य होने पर बकाया वेतन का भुगतान कर दिया जाएगा। लेकिन, वेतन कम मिलने की वजह से वे मकान बनाने के लिए गए कर्ज की नियमित किस्त अदायगी नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में उन्हें कर्ज पर ब्याज बढ़ने का खतरा सता रहा है।
बैंकों की वसूली लगभग पूरी तरह बंद चल रही है। तमाम लोगों के पास कर्ज चुकाने के लिए अभी पैसा नहीं है। हालांकि, ऐसे भी कई सारे लोग हैं, जो नियमित रूप से अदायगी कर रहे हैं। बैंक परिस्थितियां सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं।
- अरुण कुमार, अग्रणी जिला प्रबंधक