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कोरोना काल में साहूकारों ने दिया ढाई करोड़ का कर्ज
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झांसी। कोरोना वायरस के संक्रमण के नियंत्रण के लिए लागू किए गए लॉकडाउन से कारोबार और रोजगार बुरी तरह से प्रभावित हो गए थे। लेकिन, ऐसे में साहूकारी का धंधा जमकर फलाफूला। दो हजार से अधिक लोगों ने अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए साहूकारों के आगे हाथ फैलाए और उनसे ढाई करोड़ रुपये का कर्ज लिया।
कोरोना वायरस के संक्रमण के प्रभाव को थामने के लिए सरकार ने 25 मार्च से लॉकडाउन लागू कर दिया था। इससे जनजीवन पूरी तरह से थम गया था। इसका सबसे ज्यादा असर छोटे कारोबारियों और कामगारों पर पड़ा था। एक जुलाई से अनलॉक प्रक्रिया शुरू होने के बाद भी जनजीवन पटरी में लौटने में तीन महीने लग गए। जेब खाली होने की वजह से उनके समक्ष रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने का संकट गहरा गया था। इस दौर में साहूकारी का धंधा खूब चला। तीन हजार से अधिक लोगों ने अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए साहूकारों के आगे हाथ फैलाए और उनसे लगभग ढाई करोड़ रुपये का कर्ज लिया।
केस - 1
स्कूल की फीस के लिए लिया कर्ज
झांसी। तिलयानी बजरिया निवासी एक व्यक्ति ने अपने दो बच्चों की स्कूल की फीस भरने के लिए जुलाई माह में साहूकार से अठारह हजार रुपये का कर्ज लिया था। उस व्यक्ति की कपड़े की छोटी सी दुकान है, लॉकडाउन खत्म होने के बाद भी कारोबार मंदा ही रहा। ऐसे में फीस भरने के लिए साहूकार का सहारा लेना पड़ा।
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केस - 2
कर्ज लेकर शुरू की किराने की दुकान
झांसी। गुदरी मुहल्ला निवासी एक व्यक्ति एक शोरूम में काम करता था। लॉकडाउन के दरम्यान शोरूम बंद हो गया। शोरूम मालिक ने शुरुआती दो महीने तक तो तनख्वाह दी, लेकिन इसके बाद हाथ खड़े कर दिए। ऐसे में उस व्यक्ति ने साहूकार से तीस हजार रुपये कर्ज लेकर अपनी छोटी सी किराने की दुकान शुरू कर ली है।
केस - 3
घर का किराया देने के लिए लिया ऋण
झांसी। प्रेमनगर इलाके में रहने वाले एक व्यक्ति ऑटो सर्विसिंग का काम करता है। लॉकडाउन के दरम्यान हाथ और जेब दोनों खाली हो गए थे। घर और दुकान का किराया देने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही थी। किराये के भुगतान और घर की जरूरतों को पूरा करने के लिए साहूकार से सोलह हजार का कर्ज लेना पड़ा।
15 रुपये में बन जाते हैं साहूकार
झांसी। प्रशासन द्वारा साहूकारी का लाइसेंस दिया जाता है। इसकी फीस महज 15 रुपये है। साहूकार 12 से 14 प्रतिशत सालाना ब्याज पर कर्ज दे सकता है। कर्जदारों और दिए गए कर्ज का ब्योरा साहूकारों को प्रत्येक तीन माह में प्रशासन को उपलब्ध कराना होता है। जिले में वर्तमान में 48 पंजीकृत साहूकार है। इसके अलावा तमाम ऐसे भी लोग हैं, जो बगैर पंजीकरण के साहूकारी का धंधा फैलाए हुए हैं। ये महीने का दस से पंद्रह प्रतिशत तक ब्याज वसूल करते हैं।
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कोरोना वायरस के संक्रमण के प्रभाव को थामने के लिए सरकार ने 25 मार्च से लॉकडाउन लागू कर दिया था। इससे जनजीवन पूरी तरह से थम गया था। इसका सबसे ज्यादा असर छोटे कारोबारियों और कामगारों पर पड़ा था। एक जुलाई से अनलॉक प्रक्रिया शुरू होने के बाद भी जनजीवन पटरी में लौटने में तीन महीने लग गए। जेब खाली होने की वजह से उनके समक्ष रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने का संकट गहरा गया था। इस दौर में साहूकारी का धंधा खूब चला। तीन हजार से अधिक लोगों ने अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए साहूकारों के आगे हाथ फैलाए और उनसे लगभग ढाई करोड़ रुपये का कर्ज लिया।
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केस - 1
स्कूल की फीस के लिए लिया कर्ज
झांसी। तिलयानी बजरिया निवासी एक व्यक्ति ने अपने दो बच्चों की स्कूल की फीस भरने के लिए जुलाई माह में साहूकार से अठारह हजार रुपये का कर्ज लिया था। उस व्यक्ति की कपड़े की छोटी सी दुकान है, लॉकडाउन खत्म होने के बाद भी कारोबार मंदा ही रहा। ऐसे में फीस भरने के लिए साहूकार का सहारा लेना पड़ा।
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केस - 2
कर्ज लेकर शुरू की किराने की दुकान
झांसी। गुदरी मुहल्ला निवासी एक व्यक्ति एक शोरूम में काम करता था। लॉकडाउन के दरम्यान शोरूम बंद हो गया। शोरूम मालिक ने शुरुआती दो महीने तक तो तनख्वाह दी, लेकिन इसके बाद हाथ खड़े कर दिए। ऐसे में उस व्यक्ति ने साहूकार से तीस हजार रुपये कर्ज लेकर अपनी छोटी सी किराने की दुकान शुरू कर ली है।
केस - 3
घर का किराया देने के लिए लिया ऋण
झांसी। प्रेमनगर इलाके में रहने वाले एक व्यक्ति ऑटो सर्विसिंग का काम करता है। लॉकडाउन के दरम्यान हाथ और जेब दोनों खाली हो गए थे। घर और दुकान का किराया देने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही थी। किराये के भुगतान और घर की जरूरतों को पूरा करने के लिए साहूकार से सोलह हजार का कर्ज लेना पड़ा।
15 रुपये में बन जाते हैं साहूकार
झांसी। प्रशासन द्वारा साहूकारी का लाइसेंस दिया जाता है। इसकी फीस महज 15 रुपये है। साहूकार 12 से 14 प्रतिशत सालाना ब्याज पर कर्ज दे सकता है। कर्जदारों और दिए गए कर्ज का ब्योरा साहूकारों को प्रत्येक तीन माह में प्रशासन को उपलब्ध कराना होता है। जिले में वर्तमान में 48 पंजीकृत साहूकार है। इसके अलावा तमाम ऐसे भी लोग हैं, जो बगैर पंजीकरण के साहूकारी का धंधा फैलाए हुए हैं। ये महीने का दस से पंद्रह प्रतिशत तक ब्याज वसूल करते हैं।