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डीआरएम कार्यालय में बनेगा कंट्रोल रूम
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झांसी। डीआरएम कार्यालय में संचालित सालों पुराने कंट्रोल रूम में बैठकर नियंत्रकों को अब गाड़ियों को दौड़ाने का काम नहीं करना होगा। रेल प्रशासन कार्यालय परिसर के वाहन स्टैंड को दूसरी जगह शिफ्ट करके यहां नया कंट्रोल रूम बनाने जा रहा है। दो मंजिला हॉल में बनने वाले इस कंट्रोल रूम में सभी अत्याधुनिक मशीनें लगेंगी। इस काम को रेलवे विकास निगम लिमिटेड पूरा करेगा।
रेल पटरियों पर ट्रेनें जरूर दौड़ती नजर आती हैं, लेकिन उनको दौड़ाने का काम कंट्रोल रूम (मंडल नियंत्रण कार्यालय) में तैनात कंट्रोलर ही करते हैं। दरअसल, ट्रेन जैसे ही मंडल में प्रवेश करती हैं, उसको आगे दौड़ाने का काम कंट्रोलर के हाथों में आ जाता है। कंट्रोलर के संपर्क में स्टेशन मास्टर होते हैं। दोनों के समन्वय से ही चालक गाड़ी को दौड़ाने का काम करते हैं। कंट्रोलर के इशारों पर ही सिग्नल लाल, पीले और हरे किए जाते हैं। कंट्रोल रूम में सेक्शनों के हिसाब से अलग- अलग बोर्ड बने हैं। जैसे कि आगासौद से झांसी, झांसी से धौलपुर, झांसी से भीमसेन, झांसी से बांदा, भीमसेन से बांदा सेक्शन के बोर्ड (केबिन) हैं। हर बोर्ड पर कंट्रोलर तैनात रहते हैं, जो अपने सेक्शन में दौड़ने वाली गाड़ियों पर नजर रखते हैं। उनके हाथों में रहता है कि किस गाड़ी को प्राथमिकता पर आगे बढ़ाना है। डीआरएम कार्यालय में कंट्रोल रूम बना हुआ है, जो बहुत पुराना हो गया है। ट्रेनों की बढ़ती संख्या के हिसाब से कर्मचारी यहां काम करने में खुद को असहज महसूस करने लगे हैं। इस कारण अब डीआरएम कार्यालय परिसर में स्थित वाहन स्टैंड को पीछे की तरफ शिफ्ट किया जा रहा है। नए वाहन स्टैंड के लिए शेड डालने का काम अंतिम चरण में चल रहा है। वाहन स्टैंड के शिफ्ट होते ही उसी जगह पर नया कंट्रोल रूम में बनाया जाएगा।
- तीसरी रेल लाइन पर संचालन शुरू होते ही नए कंट्रोल रूम की आवश्यकता ज्यादा पड़ने लगेगी। फरवरी से आरवीएनएल नए कंट्रोल रूम का निर्माण शुरू करेगा। नए कंट्रोल रूम में कर्मचारी अधिक सहूलियत से काम कर सकेंगे। संदीप माथुर, मंडल रेल प्रबंधक।
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रेल पटरियों पर ट्रेनें जरूर दौड़ती नजर आती हैं, लेकिन उनको दौड़ाने का काम कंट्रोल रूम (मंडल नियंत्रण कार्यालय) में तैनात कंट्रोलर ही करते हैं। दरअसल, ट्रेन जैसे ही मंडल में प्रवेश करती हैं, उसको आगे दौड़ाने का काम कंट्रोलर के हाथों में आ जाता है। कंट्रोलर के संपर्क में स्टेशन मास्टर होते हैं। दोनों के समन्वय से ही चालक गाड़ी को दौड़ाने का काम करते हैं। कंट्रोलर के इशारों पर ही सिग्नल लाल, पीले और हरे किए जाते हैं। कंट्रोल रूम में सेक्शनों के हिसाब से अलग- अलग बोर्ड बने हैं। जैसे कि आगासौद से झांसी, झांसी से धौलपुर, झांसी से भीमसेन, झांसी से बांदा, भीमसेन से बांदा सेक्शन के बोर्ड (केबिन) हैं। हर बोर्ड पर कंट्रोलर तैनात रहते हैं, जो अपने सेक्शन में दौड़ने वाली गाड़ियों पर नजर रखते हैं। उनके हाथों में रहता है कि किस गाड़ी को प्राथमिकता पर आगे बढ़ाना है। डीआरएम कार्यालय में कंट्रोल रूम बना हुआ है, जो बहुत पुराना हो गया है। ट्रेनों की बढ़ती संख्या के हिसाब से कर्मचारी यहां काम करने में खुद को असहज महसूस करने लगे हैं। इस कारण अब डीआरएम कार्यालय परिसर में स्थित वाहन स्टैंड को पीछे की तरफ शिफ्ट किया जा रहा है। नए वाहन स्टैंड के लिए शेड डालने का काम अंतिम चरण में चल रहा है। वाहन स्टैंड के शिफ्ट होते ही उसी जगह पर नया कंट्रोल रूम में बनाया जाएगा।
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- तीसरी रेल लाइन पर संचालन शुरू होते ही नए कंट्रोल रूम की आवश्यकता ज्यादा पड़ने लगेगी। फरवरी से आरवीएनएल नए कंट्रोल रूम का निर्माण शुरू करेगा। नए कंट्रोल रूम में कर्मचारी अधिक सहूलियत से काम कर सकेंगे। संदीप माथुर, मंडल रेल प्रबंधक।
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