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Jhansi News: मानसिक परेशानी छुपाएं नहीं, साझा करें...समाधान के रास्ते खुलेंगे
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। समस्या कोई भी हो, छुपाने से वह और बढ़ती जाती है। जबकि, साझा करने से उसके समाधान के रास्ते खुलते हैं। इस बात की तस्दीक नेशनल हेल्थ मिशन के मेंटल हेल्थ प्रोग्राम के आंकड़े भी करते हैं। पिछले एक साल के भीतर मानसिक अवसाद से ग्रसित 2784 लोग मेंटल हेल्थ ओपीडी में पहुंचे। इनमें से 13 लोगों की मनोस्थिति इस कदर गंभीर हो चुकी थी कि वे अपने कदम आत्महत्या की ओर बढ़ा चुके थे, लेकिन काउंसलिंग और इलाज के बाद इन लोगों ने अपने कदम वापस खींच लिए और नए सिरे से जिंदगी की शुरुआत की।
एनएचएम के मेंटल हेल्थ प्रोग्राम के तहत जिला अस्पताल में ओपीडी संचालित की जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्रों में भी समय-समय पर मानसिक परेशानियों में उलझे लोगों की जांच की जाती है। पिछले एक साल में ओपीडी में 4,863 लोग पहुंचे। इनमें से 2,079 लोग ऐसे पाए गए, जिनकी मनोस्थिति प्रभावित हो गई थी। लेकिन, चिंता का वे कारण नहीं बता पाए, बस हर समय वे बेचैन ही रहते थे। इसके अलावा 2,784 लोग मानसिक अवसाद से ग्रसित पाए गए। इनमें से 13 लोग तो आत्महत्या करने का मन बना चुके थे। जबकि, आत्महत्या करने की उनके पास बड़ी वजह नहीं थी। इनमें से कई की पारिवारिक पृष्ठभूमि भी अच्छी थी। इन सभी लोगों की मेंटल हेल्थ प्रोग्राम के तहत काउंसलिंग की गई। इनके परिवार के लोगों की भी समझाइश की गई। इन कोशिशों से हालात बदल गए और आत्महत्या करने का इरादा बदलकर इन सभी लोगों ने नए सिरे से अपने जीवन की शुरुआत की।
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फोटो-- --
मेंटल हेल्थ प्रोग्राम के तहत पिछले साल 2,784 लोग मानसिक अवसाद से ग्रसित पाए गए थे। इनमें से 13 लोग तो आत्महत्या करने का मन बना चुके थे। गनीमत रही कि वे समय रहते मेंटल हेल्थ ओपीडी में पहुंच गए, जिससे उनकी जान बच गई। मानसिक परेशानी को छुपाना नहीं चाहिए, बल्कि साझा करना चाहिए। परिजनों को भी इस बात का ख्याल रखना चाहिए। मानसिक बीमारियों के इलाज के लिए ओपीडी तो संचालित की ही जा रही है, साथ ही टेलीमानस कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है, जिसके तहत फोन पर लोगों की मानसिक समस्याओं का समाधान किया जाता है।
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- आनंद चौबे, मंडलीय परियोजना प्रबंधक-राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन
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हर परिस्थिति में संवारें अपना जीवन
ईसाई धर्म के धर्मगुरु फादर जॉन स्टीफन ने बताया कि मनुष्य का जीवन बेहद दुर्लभ है। हर किसी के जीवन में समस्याएं आती हैं, जिससे तनाव होता है। लेकिन, इससे हमें खुद निपटना होगा। हर धर्म में आत्महत्या को पाप बताया गया है। मनुष्य का जीवन ईश्वर की देन है, हर परिस्थिति से संघर्ष कर हमें इसे संवारना है। अपनी समस्याओं को ईश्वर के समक्ष रखें, निश्चित निदान होगा।
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फोन पर पाएं मानसिक समस्याओं का समाधान
मेंटल हेल्थ प्रोग्राम के तहत टेलीमानस संचालित किया जा रहा है, जिस पर फोन के जरिये मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान किया जाता है। व्यक्ति की पहचान भी गुप्त रखी जाती है। इसके लिए नंबर 14416 और 18008914416 पर संपर्क किया जा सकता है।
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हमें बताएं... अपनी कहानी
अगर आप के मन में कभी आत्महत्या का विचार आया हो तो आपने खुद को उस स्थिति से कैसे निकाला, इस पर अपने विचार अमर उजाला से बांटें... हम प्रकाशित करेंगे आपकी तस्वीर के साथ। अपनी कहानी अमर उजाला के ईमेल jhs-cityreporter@ jhs.amarujala.com या व्हाट्सएप नंबर 7617566164 पर भेज सकते हैं।
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झांसी। समस्या कोई भी हो, छुपाने से वह और बढ़ती जाती है। जबकि, साझा करने से उसके समाधान के रास्ते खुलते हैं। इस बात की तस्दीक नेशनल हेल्थ मिशन के मेंटल हेल्थ प्रोग्राम के आंकड़े भी करते हैं। पिछले एक साल के भीतर मानसिक अवसाद से ग्रसित 2784 लोग मेंटल हेल्थ ओपीडी में पहुंचे। इनमें से 13 लोगों की मनोस्थिति इस कदर गंभीर हो चुकी थी कि वे अपने कदम आत्महत्या की ओर बढ़ा चुके थे, लेकिन काउंसलिंग और इलाज के बाद इन लोगों ने अपने कदम वापस खींच लिए और नए सिरे से जिंदगी की शुरुआत की।
एनएचएम के मेंटल हेल्थ प्रोग्राम के तहत जिला अस्पताल में ओपीडी संचालित की जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्रों में भी समय-समय पर मानसिक परेशानियों में उलझे लोगों की जांच की जाती है। पिछले एक साल में ओपीडी में 4,863 लोग पहुंचे। इनमें से 2,079 लोग ऐसे पाए गए, जिनकी मनोस्थिति प्रभावित हो गई थी। लेकिन, चिंता का वे कारण नहीं बता पाए, बस हर समय वे बेचैन ही रहते थे। इसके अलावा 2,784 लोग मानसिक अवसाद से ग्रसित पाए गए। इनमें से 13 लोग तो आत्महत्या करने का मन बना चुके थे। जबकि, आत्महत्या करने की उनके पास बड़ी वजह नहीं थी। इनमें से कई की पारिवारिक पृष्ठभूमि भी अच्छी थी। इन सभी लोगों की मेंटल हेल्थ प्रोग्राम के तहत काउंसलिंग की गई। इनके परिवार के लोगों की भी समझाइश की गई। इन कोशिशों से हालात बदल गए और आत्महत्या करने का इरादा बदलकर इन सभी लोगों ने नए सिरे से अपने जीवन की शुरुआत की।
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मेंटल हेल्थ प्रोग्राम के तहत पिछले साल 2,784 लोग मानसिक अवसाद से ग्रसित पाए गए थे। इनमें से 13 लोग तो आत्महत्या करने का मन बना चुके थे। गनीमत रही कि वे समय रहते मेंटल हेल्थ ओपीडी में पहुंच गए, जिससे उनकी जान बच गई। मानसिक परेशानी को छुपाना नहीं चाहिए, बल्कि साझा करना चाहिए। परिजनों को भी इस बात का ख्याल रखना चाहिए। मानसिक बीमारियों के इलाज के लिए ओपीडी तो संचालित की ही जा रही है, साथ ही टेलीमानस कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है, जिसके तहत फोन पर लोगों की मानसिक समस्याओं का समाधान किया जाता है।
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- आनंद चौबे, मंडलीय परियोजना प्रबंधक-राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन
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हर परिस्थिति में संवारें अपना जीवन
ईसाई धर्म के धर्मगुरु फादर जॉन स्टीफन ने बताया कि मनुष्य का जीवन बेहद दुर्लभ है। हर किसी के जीवन में समस्याएं आती हैं, जिससे तनाव होता है। लेकिन, इससे हमें खुद निपटना होगा। हर धर्म में आत्महत्या को पाप बताया गया है। मनुष्य का जीवन ईश्वर की देन है, हर परिस्थिति से संघर्ष कर हमें इसे संवारना है। अपनी समस्याओं को ईश्वर के समक्ष रखें, निश्चित निदान होगा।
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फोन पर पाएं मानसिक समस्याओं का समाधान
मेंटल हेल्थ प्रोग्राम के तहत टेलीमानस संचालित किया जा रहा है, जिस पर फोन के जरिये मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान किया जाता है। व्यक्ति की पहचान भी गुप्त रखी जाती है। इसके लिए नंबर 14416 और 18008914416 पर संपर्क किया जा सकता है।
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अगर आप के मन में कभी आत्महत्या का विचार आया हो तो आपने खुद को उस स्थिति से कैसे निकाला, इस पर अपने विचार अमर उजाला से बांटें... हम प्रकाशित करेंगे आपकी तस्वीर के साथ। अपनी कहानी अमर उजाला के ईमेल jhs-cityreporter