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Jhansi News: डॉक्टरों की मेहनत, मां की प्रार्थना आई काम, किशोर को मिला नया जीवन

Tue, 10 Sep 2024 04:58 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 10 Sep 2024 04:58 AM IST
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Doctors' hard work, mother's prayers worked, teen got new life
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सांप के डसने के बाद वेंटिलेटर पर पहुंच गया था, मेडिकल कॉलेज से जल्द होगा डिस्चार्ज
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बच्चे की बंद होती आंखें, तेज चलती सांसें हर पल परिजनों के दिल की धड़कन बढ़ा रही थीं। सांप के डसने के बाद बच्चे की मां तो इस कदर घबरा गई कि बिना समय गंवाए मेडिकल कॉलेज में उसे भर्ती कराने के बाद इमरजेंसी के पीछे बने शिव मंदिर में भगवान से बेटे की जान बचाने के लिए प्रार्थना करने लग गई। अब मां की दुआ और डॉक्टरों की मेहनत से किशोर स्वस्थ हो गया है। उसे एक-दो दिन में डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।
टोड़ी फतेहपुर थाना इलाके के ग्राम पुंछी निवासी नरेंद्र पटेल का 15 साल का बेटा संगीत उर्फ साहिल अपने पिता और मां रजनी के साथ नंदनपुरा में किराये के मकान में रहता है। बुधवार की रात सभी खाना खाकर कमरे में जमीन पर सो रहे थे। रात तकरीबन 11 बजे अचानक संगीत को सांप ने काट लिया था। परिजनों ने बिना कोई देरी किए संगीत को मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में भर्ती करा दिया। उसकी मां का रो-रोकर बुरा हाल था। मां परिवार की अन्य महिलाओं के साथ मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड के पीछे बने शिव मंदिर में बैठकर प्रार्थना करने लगी।
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वहीं, इमरजेंसी में डॉक्टरों ने संगीत को 10 वॉयल एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन लगाए। बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ओमशंकर चौरसिया ने बताया कि संगीत के उल्टे पैर के अंगूठे में सांप ने काटा था। जब वह आया तो आंखें बंद हो रही थीं। सांस भी तेज चल रही थी। देर रात तीन बजे उसे वेंटिलेटर पर भर्ती करना पड़ा। फिर 10 वॉयल एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन और लगाए गए। किशोर का ब्लड प्रेशर भी लगातार कम हो रहा था। ऐसे में बीपी बढ़ाने की दवाएं दी गईं। सेहत में सुधार होने पर सात सितंबर को किशोर को वेंटिलेटर सपोर्ट से हटाया लिया गया। मगर ऑक्सीजन लगी रही। सोमवार को ऑक्सीजन भी हट गई। अब वह स्वस्थ है और खाना भी खाने लगा है। एक-दो दिन में उसे डिस्चार्ज कर देंगे। उन्होंने लोगों से अपील भी की कि अगर सांप डसे तो झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़ें। मरीज को सीधे अस्पताल लेकर आएं।
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सांप को डिब्बे में बंद कर मेडिकल लेकर पहुंच गए थे परिजन
किशोर के दादा रामसुमरनी ने बताया कि कमरे में सांप फुफकार मार रहा था, जिससे किसी की अंदर जाने की हिम्मत नहीं हुई। इस पर रात भर वे सांप की निगरानी करते रहे और उसे भागने नहीं दिया। सुबह होने पर पिपरा गांव से सपेरे को बुलाया गया। सपेरे ने आकर सांप को पकड़कर डिब्बे में बंद किया। इसके बाद सांप को लेकर मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। यहां पर डॉक्टर को सांप दिखाया, ताकि सांप की नस्ल से उसके जहर का पता चला सके और उसी के अनुसार बालक का इलाज किया जा सके।
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