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गर्मी में लोग गंदा और बदबूदार पानी पीते रहे... अफसर सोते रहे

Sat, 24 Sep 2022 01:09 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 24 Sep 2022 01:09 AM IST
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Dirty and badbudar water people drink officer sleep
झांसी। गर्मी के सीजन में महानगर में नलों के जरिये गंदे और बदबूदार पानी की आपूर्ति हुई थी, जिसे पीकर तमाम लोग बीमार तक हो गए थे। इस मसले पर जमकर शोरशराबा भी हुआ । इसके बाद प्रशासन की ओर से जांच शुरू कर दी गई थी, जिसमें दूषित जल की आपूर्ति के लिए जल निगम के परियोजना प्रबंधक हिमांशु नेगी को दोषी ठहराया गया है। रिपोर्ट जिलाधिकारी को प्रेषित कर दी गई है।
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माताटीला बांध से मिलने वाले कच्चे पानी का बबीना में शोधन किया जाता है। यहां दो ट्रीटमेंट प्लांट में 45 एमएलडी व 110 एमएलडी पानी का शुद्धिकरण होता है। इसके बाद ये पानी नलों के जरिये लोगों के घरों तक पहुंचाया जाता है। लेकिन, इस बार मई और जून माह में नलों ने मटमैला और बदबूदार पानी उगला। जल संकट से जूझ रहे लोगों ने मजबूरी में इस दूषित जल का इस्तेमाल किया, जिससे कई इलाकों में लोग बीमार तक हो गए थे। तब इसकी शिकायतें भी खूब हुईं थीं। इस मसले पर हंगामे की स्थिति पैदा हो गई थी। गंदे पानी की आपूर्ति को लेकर कई दिनों तक जल निगम और जल संस्थान गेंद एकदूसरे के पाले में फेंकते रहे थे।
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इसे गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी रविंद्र कुमार की ओर से जांच के आदेश जारी किए गए थे। जांच की जिम्मेदार अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) राम अक्षयवर चौहान को सौंपी गई थी। जांच पूरी कर ली गई है, जिसमें दूषित पानी की आपूर्ति के लिए सीधे तौर पर जल निगम निर्माण इकाई के परियोजना प्रबंधक हिमांशु नेगी को जिम्मेदार ठहराया गया है। एडीएम की ओर से इसकी रिपोर्ट जिलाधिकारी को प्रेषित कर दी गई है।
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जांच में टिक नहीं पाए परियोजना प्रबंधक के तर्क
झांसी। गंदे पानी की आपूर्ति की जिम्मेदारी लेने से बचने के लिए जांच के दौरान परियोजना प्रबंधक की ओर से कई तर्क तक दिए गए, लेकिन उनके सभी तर्क जांच की कसौटी पर खरे नहीं उतर पाए। परियोजना प्रबंधक की ओर से बताया गया था कि प्लांट में एक्सपर्ट कर्मचारी उपलब्ध नहीं थे। लेकिन, जांच में सामने आया कि परियोजना प्रबंधक प्लांट का काम दिसंबर 2021 से देख रहे थे। शुरुआत में ही उन्हें इन कमियों की जानकारी देनी थी। इसे उनकी प्रबंधकीय चूक माना गया। इसके अलावा परियोजना प्रबंधक की ओर से तर्क दिया गया था कि मटमैले और बदबूदार पानी की आपूर्ति पाइप लाइन लीकेज की वजह से हुई, परंतु इसके प्रमाण न होने पर उनकी इस बात को भी जांच में खारिज कर दिया गया। इसके अलावा अन्य तर्क भी दिए, लेकिन उनका कोई मजबूत आधार नहीं मिला।
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