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Jhansi News: एक साल से खराब डिजिटल एक्सरे मशीन, मरीज बाहर से करा रहे जांच
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। मेडिकल कॉलेज में लगभग एक वर्ष से डिजिटल एक्सरे मशीन खराब पड़ी है। यहां मुफ्त में होने वाली इस जांच के लिए मरीजों को बाहर में चार सौ रुपये देने पड़ रहे हैं।
यहां चार आर्थो सर्जन हैं। चारों चिकित्सक की ओपीडी में रोजाना लगभग 200 मरीज आते हैं। इनमें करीब 120 मरीजों को एक्सरे कराने की सलाह दी जाती है। डिजिटल एक्सरे मशीन एक वर्ष से खराब होने से इन 120 मरीजों में लगभग 55-60 लोग सामान्य एक्सरे ही करा लेते हैं। कई मरीजों की समस्या मैन्युअल एक्सरे में स्पष्ट नहीं होती और वह आधा-अधूरा इलाज कराकर घर चले जाते हैं। वहीं, प्रतिदिन 50 से 60 मरीज बाहर निजी एक्सरे सेंटर पर जांच कराने को मजबूर हैं, जिसके लिए उन्हें 400 से 500 रुपये देना पड़ रहा है।
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गंभीर मरीजों को आवाजाही में समस्या
सामान्य रोगी तो बाहर डिजिटल एक्सरे कराने के लिए चले जाते हैं, लेकिन गंभीर व उम्रदराज मरीजों को आने-जाने में दिक्कत होती है। परिजन स्ट्रेचर के सहारे चिलचिलाती धूप में सड़क पार कर जांच के लिए ले जा रहे हैं। तल्ख धूप में स्ट्रेचर खींचने से तीमारदारों की हालत खराब है।
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ललितपुर। मेडिकल कॉलेज में लगभग एक वर्ष से डिजिटल एक्सरे मशीन खराब पड़ी है। यहां मुफ्त में होने वाली इस जांच के लिए मरीजों को बाहर में चार सौ रुपये देने पड़ रहे हैं।
यहां चार आर्थो सर्जन हैं। चारों चिकित्सक की ओपीडी में रोजाना लगभग 200 मरीज आते हैं। इनमें करीब 120 मरीजों को एक्सरे कराने की सलाह दी जाती है। डिजिटल एक्सरे मशीन एक वर्ष से खराब होने से इन 120 मरीजों में लगभग 55-60 लोग सामान्य एक्सरे ही करा लेते हैं। कई मरीजों की समस्या मैन्युअल एक्सरे में स्पष्ट नहीं होती और वह आधा-अधूरा इलाज कराकर घर चले जाते हैं। वहीं, प्रतिदिन 50 से 60 मरीज बाहर निजी एक्सरे सेंटर पर जांच कराने को मजबूर हैं, जिसके लिए उन्हें 400 से 500 रुपये देना पड़ रहा है।
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गंभीर मरीजों को आवाजाही में समस्या
सामान्य रोगी तो बाहर डिजिटल एक्सरे कराने के लिए चले जाते हैं, लेकिन गंभीर व उम्रदराज मरीजों को आने-जाने में दिक्कत होती है। परिजन स्ट्रेचर के सहारे चिलचिलाती धूप में सड़क पार कर जांच के लिए ले जा रहे हैं। तल्ख धूप में स्ट्रेचर खींचने से तीमारदारों की हालत खराब है।
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