फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   Diesel is expensive, fertilizer is expensive...Irrigation has not been easy...Big inflation on agriculture in Bundelkhand

डीजल महंगा, खाद महंगा...आसान नहीं रही सिंचाई...बुंदेलखंड में खेती पर आई बड़ी महंगाई

Mon, 11 Apr 2022 10:24 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 11 Apr 2022 10:24 PM IST
विज्ञापन
Diesel is expensive, fertilizer is expensive...Irrigation has not been easy...Big inflation on agriculture in Bundelkhand
झांसी। बुंदेलखंड की सूखी धरती पर खेती करना अब आसान नहीं रह गया है। डीजल महंगा है। खाद के दाम बढ़ गए। कीटनाशक से लेकर बीज तक पर महंगाई है। हालात कुछ ऐसे हैं कि अब छोटी जोत वाले किसान तो लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं। सरकार जहां किसानों की आय दोगुनी करने की बात कर रही है वही किसान कर्ज लेकर खेती करने को मजबूर हैं। यही वजह है कि छोटे किसानों का खेती से मोहभंग होने लगा है।
विज्ञापन

बुंदेलखंड में गेहूं, मटर, चना, मूंगफली, उड़द, हल्दी, अदरक और मूंग की सबसे ज्यादा खेती होती है। कृषि विभाग के मुताबिक झांसी में 340511 हेक्टेयर और ललितपुर में 3.5 लाख हेक्टेयर में रबी की फसल होती है। इसमें गेहूं की खेती सबसे ज्यादा है। खेती की लागत बीते एक साल में बढ़ती जा रही है। नाबार्ड के स्केल ऑफ फाइनेंस इन एग्रीकल्चर के मुताबिक झांसी में एक हेक्टेयर गेहूं की फसल का खर्च 62 हजार रुपये है। इसका बड़ा कारण बढ़ती महंगाई है। खेती के लिए सबसे जरूरी खाद/डीएपी की कीमत बीते एक साल में 650 से बढ़कर 1350 रुपये हो गई है। एक हेक्टेयर फसल में करीब छह बोरी डीएपी लग जाती है। जिसकी कुल लागत 8100 रुपये होती है। वहीं प्रति हेक्टेयर में जुताई से लेकर कटाई तक पूरी खेती में करीब 300 लीटर से अधिक डीजल खर्च हो जाता है। जिसकी लागत डीजल की 96.49 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से 28947 रुपये होती है। इसके अलावा मजदूरी, बीज, कीटनाशक और अन्य खर्च को जोड़ लें तो कुल 62 हजार रुपये का खर्च बैठता है।
विज्ञापन

वहीं एक हेक्टेयर में कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक कुल 18 से 20 क्विंटल गेहूं की पैदावार होती है। वर्तमान में गेहूं का समर्थन मूल्य 2015 रुपये प्रति क्ंिवटल है। ऐसे में एक हेक्टेयर में किसान की आमदनी कुल 38 से 40 हजार की बीच होती है। आंकड़ों के मुताबिक किसान को एक हेेक्टेयर फसल में 22 हजार का नुकसान होता है। हालांकि बड़ी संख्या में किसान इस खर्च को कम करने के लिए मजदूरी, जमीन का किराया और अन्य संसाधनों का उपयोग कम करते हैं। मगर मौजूदा समय में खेती किसान के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

ऐसे समझिए एक हेक्टेयर फसल का गणित
मद पहले अब
जुताई- 8500 11500
खाद/डीएपी 3900 8100
बीज 3100 3500
सिंचाई- 9600 16000
कीटनाशक 3200 3750
कटाई- 5000 12000
निराई 3000 5000
अन्य 1500 2150
कुल 37800 62000
कहते हैं किसान
लगातार बढ़ रही महंगाई से खेती करना अब मुश्किल होता जा रहा है। खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। अब हेक्टेयर फसल की लागत 60 हजार तक पहुंच गई है। - गिरधारी लाल यादव
------------
डीजल के दाम बढ़ गए। डीएपी महंगी हो गई। मजदूरी भी बढ़ गई। मगर समर्थन मूल्य में मामूली इजाफा होता है। किसानी अब घाटे का सौदा बनती जा रही है। - भारत राजपूत
------------
सबसे ज्यादा दिक्कत सिंचाई में आती है। यहां पानी की कमी है और सिंचाई के लिए मोटर-डीजल पंप पर निर्भर रहना पड़ता है। इस पर ही करीब 16 हजार रुपये तक खर्च होते हैं। - धर्मेंद्र सिंह परिहार
----------
खेती करना अब महंगा हो गया है। फसल का समर्थन मूल्य नहीं बढ़ता है। उसके बाद बारिश में फसल नुकसान हो जाए, तो किसान को और घाटा झेलना पड़ता है।- कांशीराम राजपूत

किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। प्राकृतिक खेती से लागत काफी कम की जा सकती है। वहीं डीजल का खर्च कम करने के लिए किसान सोलर मोटर पंप लगवाएं। - केके सिंह, उप निदेशक कृषि
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed