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Jhansi News: तंगहाली में भी नहीं छोड़ा मैदान, हौसलों से फतह की तैयारी

Wed, 17 Jul 2024 06:53 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 17 Jul 2024 06:53 AM IST
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Didn't leave the field even in times of trouble, prepared for victory with courage
संवाद न्यूज एजेंसी
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झांसी। पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है, मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है। ये लाइनें उत्तर प्रदेश की टीम में शामिल उन खिलाड़ियों पर सटीक बैठती हैं, जिन्होंने तंगहाली में भी मैदान नहीं छोड़ा और अपने हौसलों के दम पर कई प्रतियोगिताओं में खेल का प्रदर्शन किया।
मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में चल रही राष्ट्रीय सब जूनियर हॉकी चैंपियनशिप में प्रतिभाग करने वाली यूपी की बालिका टीम में कई खिलाड़ियों ने आर्थिक संकट झेलने के बाद भी मैदान नहीं छोड़ा। किसी के पिता ऑटो ड्राइवर हैं तो किसी के पिता मजदूरी करते हैं। आर्थिक संकट होने के बाद भी इन पिताओं ने अपनी बेटियों को सभी सुविधाएं मुहैया कराईं। बेटियों ने भी जिला और राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रदर्शन के बाद नॉर्थ जोन राष्ट्रीय हाॅकी चैंपियनशिप में जीत से आगाज किया। टीम में शामिल बेटियों के हौसले बुलंद हैं।
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फोटो...

- बीमारी के चलते 2017 में पापा की मृत्यु हो गई थी। उनका सपना था कि दुनिया भर में देश का नाम रोशन करूं। उनके सपने को साकार करना चाहती हूं। - विभा कटियार
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- मां राष्ट्रीय स्तर की एथलीट हैं। पापा का सपना है कि उनकी बेटी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम रोशन करे। पापा की उम्मीदों पर खरा उतरना चाहती हूं। - श्वेता उपाध्याय
- पापा सरकारी कार्यालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। परिवार की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर है। खेल की सभी सुविधाएं मुहैया कराने में कोई भी कमी नहीं छोड़ते। - शैलजा चतुर्वेदी
- परिवार में आठ सदस्य हैं, जिनमें सबसे छोटी हूं। पापा ऑटो चलाते हैं। परिवार के हर सदस्य की जरूरतें भी पूरी करते हैं। उनकी उम्मीदों को पूरा करना चाहते हैं। - पायल सोनकर
- पिता मैकेनिक हैं और परिवार की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं पर है। खेल में रुचि होने पर उन्होंने ही मुझे हॉकी थमाई। अब उनके ख्वाबों को पूरा करना लक्ष्य है। सोमिका धानुक

- टीम में शामिल सभी खिलाड़ी जोश से लबरेज हैं। जिस तरह प्रदेश की टीम ने जूनियर चैंपियनशिप जीती थी, उसी तरह से सब जूनियर भी जीतेगी। जितेंद्र भदौरिया, कोच यूपी टीम
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