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इस विजयादशमी पर भ्रष्टाचार के राक्षस के खात्मे का लें संकल्प
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झांसी। सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार का दीमक गहरी जड़ें जमाए हुए है। हालात ये हैं कि जन्म के साथ शुरू होने वाला भ्रष्टाचार मौत के बाद तक लगातार जारी रहता है। जी हां, जन्म प्रमाण पत्र से लेकर मृत्यु प्रमाण पत्र तक सुविधा शुल्क दिए बगैर जारी कराना आसान नहीं होता है। आम आदमी को अपने हर काम के लिए भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ता है। हालांकि, इसके खात्मे के लिए सरकारों की ओर से बड़े-बड़े दावे और वादे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर पहुंचकर ये सिफर हो जाते हैं। कामों में पारदर्शिता लाने के लिए ऑनलाइन कार्यशैली को बढ़ावा दिया जा रहा है, बावजूद स्थिति में कोई खास सुधार नहीं आया है। लेकिन, अब हमें इसके खिलाफ खड़े होना है। इस विजयादशमी पर भ्रष्टाचार रूपी राक्षस के खात्मे का संकल्प लेना है।
सिंचाई विभाग में अभी हाल ही में नहरों की सफाई के नाम पर 77 लाख रुपये का घोटाला सामना आया है। सफाई हुए बगैर ही पैसों का बंदरबांट कर लिया गया। इतना ही नहीं, कोरोना जैसी वैश्विक आपदा में भी घोटालेबाज सेंधमारी से नहीं चूके। विभाग की मिलीभगत से ग्राम पंचायतों में निर्धारित से कई गुना दामों में कोरोना किट खरीदी गईं और जमकर भ्रष्टाचार हुआ। ये तो सिर्फ बानगी भर है। आम आदमी को पग-पग पर भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ता है। सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका अंदाजा आरटीओ ऑफिस के इर्दगिर्द जमा दलालों को देखकर लगाया जा सकता है, जो सरकारी कर्मचारियों की सांठगांठ से भ्रष्टाचार की बेल को सींचने का काम करते हैं। थाना हो या तहसील, हर जगह इसका बोलबाला है। स्थिति ये है कि मजबूरी में भ्रष्टाचार आम आदमी के जीवन का हिस्सा बन चुका है। हमारे सहते रहने की आदत से ये और बढ़ता जा रहा है। लेकिन, अब और नहीं, हमें इसके खिलाफ खड़ा होना होगा। भ्रष्टाचार को सहना नहीं होगा, बल्कि इसके खिलाफ बोलना होगा। तभी हम आने वाली पीढ़ी को बेहतर माहौल दे पाएंगे।
मोबाइल को बनाएं हथियार, करें भ्रष्टाचार पर वार
झांसी। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में मोबाइल को बड़ा हथियार बनाया जा सकता है। जी हां, भ्रष्टाचारियों की करतूतों को मोबाइल के कैमरे में कैद किया जा सकता है। जबकि, पैसे के लेनदेन की बातों को भी मोबाइल में आसानी से रिकॉर्ड किया जा सकता है। आपकी ये सजगता भ्रष्टाचारियों के खिलाफ बड़े सुबूत खड़े कर सकती है।
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आसानी से पकड़वा सकते हैं रंगे हाथ
झांसी। भ्रष्टाचार से हर कोई परेशान है, लेकिन इसके खिलाफ आवाज उठाने से बचता है। जबकि, भ्रष्टाचारियों को पकड़वाना बेहद आसान होता है। पुलिस के भ्रष्टाचार निवारण संगठन में भ्रष्टाचारियों के खिलाफ शिकायत कर भ्रष्टाचारियों को रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़वाया जा सकता है। आम आदमी की शिकायत पर पिछले कुछ समय के दरम्यान दो लेखपाल व चिट फंड कार्यालय के लिपिक को रंगे हाथों रिश्वत लेते गिरफ्तार किया जा चुका है।
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सिंचाई विभाग में अभी हाल ही में नहरों की सफाई के नाम पर 77 लाख रुपये का घोटाला सामना आया है। सफाई हुए बगैर ही पैसों का बंदरबांट कर लिया गया। इतना ही नहीं, कोरोना जैसी वैश्विक आपदा में भी घोटालेबाज सेंधमारी से नहीं चूके। विभाग की मिलीभगत से ग्राम पंचायतों में निर्धारित से कई गुना दामों में कोरोना किट खरीदी गईं और जमकर भ्रष्टाचार हुआ। ये तो सिर्फ बानगी भर है। आम आदमी को पग-पग पर भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ता है। सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका अंदाजा आरटीओ ऑफिस के इर्दगिर्द जमा दलालों को देखकर लगाया जा सकता है, जो सरकारी कर्मचारियों की सांठगांठ से भ्रष्टाचार की बेल को सींचने का काम करते हैं। थाना हो या तहसील, हर जगह इसका बोलबाला है। स्थिति ये है कि मजबूरी में भ्रष्टाचार आम आदमी के जीवन का हिस्सा बन चुका है। हमारे सहते रहने की आदत से ये और बढ़ता जा रहा है। लेकिन, अब और नहीं, हमें इसके खिलाफ खड़ा होना होगा। भ्रष्टाचार को सहना नहीं होगा, बल्कि इसके खिलाफ बोलना होगा। तभी हम आने वाली पीढ़ी को बेहतर माहौल दे पाएंगे।
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मोबाइल को बनाएं हथियार, करें भ्रष्टाचार पर वार
झांसी। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में मोबाइल को बड़ा हथियार बनाया जा सकता है। जी हां, भ्रष्टाचारियों की करतूतों को मोबाइल के कैमरे में कैद किया जा सकता है। जबकि, पैसे के लेनदेन की बातों को भी मोबाइल में आसानी से रिकॉर्ड किया जा सकता है। आपकी ये सजगता भ्रष्टाचारियों के खिलाफ बड़े सुबूत खड़े कर सकती है।
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आसानी से पकड़वा सकते हैं रंगे हाथ
झांसी। भ्रष्टाचार से हर कोई परेशान है, लेकिन इसके खिलाफ आवाज उठाने से बचता है। जबकि, भ्रष्टाचारियों को पकड़वाना बेहद आसान होता है। पुलिस के भ्रष्टाचार निवारण संगठन में भ्रष्टाचारियों के खिलाफ शिकायत कर भ्रष्टाचारियों को रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़वाया जा सकता है। आम आदमी की शिकायत पर पिछले कुछ समय के दरम्यान दो लेखपाल व चिट फंड कार्यालय के लिपिक को रंगे हाथों रिश्वत लेते गिरफ्तार किया जा चुका है।