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Jhansi News: महारास लीला एवं रुक्मिणी मंगल की कथा का किया वर्णन

Wed, 27 Nov 2024 03:00 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 27 Nov 2024 03:00 PM IST
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Described the story of Maharas Leela and Rukmini Mangal.
समथर। जीवात्मा और परमात्मा का मिलन का नाम महारास लीला है। उक्त उद्गार नगर के मोहल्ला उपाध्याना में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से कथावाचक अंशुल दीक्षित बेरछा ने व्यक किए। नगर के मोहल्ला उपाध्याना में श्यामदासजी महाराज मंदिर प्रांगण में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में छठवें दिवस कथाव्यास ने महारास लीला और रुक्मिणी मंगल की कथा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जीवात्मा के परमात्मा से मिलन की अलौकिक लीला का नाम ही महारास लीला है। यह लीला ठाकुरजी की काम विजय लीला है। रासलीला का चिंतन करने से जीव की कामवासना नष्ट हो जाती है। रुक्मिणी मंगल की कथा में उन्होंने कहा कि जीव का धर्म शरणागति है। जीव यदि दीनभाव से भगवान की शरणागत होता है तो वे उसे अपनी शरण में ले लेते हैं। रुक्मिणी के आर्त भाव से पुकारने पर श्रीकृष्ण ने उन्हें अपना लिया। कथावाचक ने गोपी गीत, कंस वध, उद्धव ब्रज यात्रा, रणछोर लीला, द्वारिकापुरी निर्माण, मुचकुंद की कथा, श्रीकृष्ण रुक्मिणी विवाह आदि प्रसंगों का वर्णन किया। कथा के बीच गाए भजनों पर श्रोता भाव-विभोर होकर झूम उठे। कथा पारीक्षत शशिकांति, कृष्णकुमार चौरसिया ने भागवतजी की आरती की। इस अवसर पर भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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