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Jhansi News: ई-कोर्ट पोर्टल पर निर्णय अपलोड करने की मांग
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जिला बार एसोसिएशन ने प्रभारी जिला जज को सौंपा ज्ञापन, निर्णय अपलोड न होने से अधिवक्ताओं और वादकारियों को परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जिला बार एसोसिएशन ने प्रभारी जिला जज को ज्ञापन सौंपकर न्यायालयों द्वारा पारित निर्णयों को उसी दिन ई-कोर्ट पोर्टल पर अपलोड कराने की मांग की है। अधिवक्ताओं का कहना है कि निर्णय अपलोड न होने से अधिवक्ताओं और वादकारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अधिवक्ताओं ने बताया कि जिला न्यायालय के विभिन्न आदेश ई-कोर्ट पोर्टल पर पूर्ण रूप से अपलोड नहीं किए जा रहे हैं। इससे इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से जारी व्यवस्था का लाभ अधिवक्ताओं और वादकारियों को नहीं मिल पा रहा है। कई मामलों में न्यायालय के जजमेंट निर्णीत तो प्रदर्शित होते हैं, लेकिन सही ढंग से अपलोड न होने के कारण उन्हें ऑनलाइन खोला नहीं जा सकता। इससे अधिवक्ताओं को वेबसाइट पर काफी समय खर्च करने के बाद भी निर्णय की प्रति उपलब्ध नहीं हो पाती। उन्हें न्यायालय के रिकॉर्ड से जानकारी प्राप्त करने के लिए अन्य प्रक्रिया अपनानी पड़ती है।
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नकल विभाग पर बढ़ रहा अतिरिक्त दबाव
अधिवक्ताओं ने कहा कि निर्णय ऑनलाइन उपलब्ध न होने के कारण अधिवक्ताओं और वादकारियों को प्रमाणित प्रतिलिपि के लिए आवेदन करना पड़ता है। जबकि कई मामलों में यह प्रतिलिपि केवल रिकॉर्ड के लिए आवश्यक होती है। इससे नकल विभाग पर भी अतिरिक्त काम का दबाव बढ़ता है। बार एसोसिएशन ने मांग की है कि सभी न्यायालयों के पीठासीन अधिकारियों को निर्देशित किया जाए कि निर्णय हस्ताक्षरित और उद्घोषित करने के बाद उसे ई-कोर्ट पोर्टल पर अपलोड कराना सुनिश्चित करें, ताकि अधिवक्ताओं और वादकारियों को समय से निर्णय उपलब्ध हो सके। ज्ञापन पर जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश देवलिया और महामंत्री लखन यादव के हस्ताक्षर हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जिला बार एसोसिएशन ने प्रभारी जिला जज को ज्ञापन सौंपकर न्यायालयों द्वारा पारित निर्णयों को उसी दिन ई-कोर्ट पोर्टल पर अपलोड कराने की मांग की है। अधिवक्ताओं का कहना है कि निर्णय अपलोड न होने से अधिवक्ताओं और वादकारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अधिवक्ताओं ने बताया कि जिला न्यायालय के विभिन्न आदेश ई-कोर्ट पोर्टल पर पूर्ण रूप से अपलोड नहीं किए जा रहे हैं। इससे इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से जारी व्यवस्था का लाभ अधिवक्ताओं और वादकारियों को नहीं मिल पा रहा है। कई मामलों में न्यायालय के जजमेंट निर्णीत तो प्रदर्शित होते हैं, लेकिन सही ढंग से अपलोड न होने के कारण उन्हें ऑनलाइन खोला नहीं जा सकता। इससे अधिवक्ताओं को वेबसाइट पर काफी समय खर्च करने के बाद भी निर्णय की प्रति उपलब्ध नहीं हो पाती। उन्हें न्यायालय के रिकॉर्ड से जानकारी प्राप्त करने के लिए अन्य प्रक्रिया अपनानी पड़ती है।
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नकल विभाग पर बढ़ रहा अतिरिक्त दबाव
अधिवक्ताओं ने कहा कि निर्णय ऑनलाइन उपलब्ध न होने के कारण अधिवक्ताओं और वादकारियों को प्रमाणित प्रतिलिपि के लिए आवेदन करना पड़ता है। जबकि कई मामलों में यह प्रतिलिपि केवल रिकॉर्ड के लिए आवश्यक होती है। इससे नकल विभाग पर भी अतिरिक्त काम का दबाव बढ़ता है। बार एसोसिएशन ने मांग की है कि सभी न्यायालयों के पीठासीन अधिकारियों को निर्देशित किया जाए कि निर्णय हस्ताक्षरित और उद्घोषित करने के बाद उसे ई-कोर्ट पोर्टल पर अपलोड कराना सुनिश्चित करें, ताकि अधिवक्ताओं और वादकारियों को समय से निर्णय उपलब्ध हो सके। ज्ञापन पर जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश देवलिया और महामंत्री लखन यादव के हस्ताक्षर हैं।