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आपदा में आगे आएं स्कूल, फीस माफ कर करें जरूरतमंदों की मदद
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झांसी। देश में कोरोना की दस्तक देने के साथ ही कारोबार और रोजगार प्रभावित होना शुरू हो गए थे। वायरस के नियंत्रण के लिए लागू किए गए लॉकडाउन की वजह से ये संकट और भी गहराया हुआ है। लॉकडाउन खुलने के बाद भी संकट के बादलों के छंटने में समय लग सकता है। ऐसे में तमाम लोगों के लिए अपनी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति करना मुश्किल हो रहा है। उस पर अपने बच्चों की स्कूल की फीस जमा करने का मसला भी उनके लिए समस्या खड़ा कर रहा है। हालांकि, प्रशासन की ओर से अभिभावकों को राहत दी गई है। स्कूल प्रबंधनों को निर्देशित किया गया है कि वे किसी भी अभिभावक को फीस के लिए बाध्य नहीं करेंगे। अप्रैल, मई और जून माह की वसूली जाने वाली तिमाही फीस आगामी महीनों में समायोजित करेंगे। लेकिन, ज्यादातर अभिभावक इस राहत को नाकाफी मान रहे हैं। उनका कहना है कि जरूरतमंद परिवारों के बच्चों की इन तीन माह की फीस पूरी तरह से माफ की जाए। देश में आई आपदा के इस दौरान स्कूल प्रबंधन मदद के लिए आगे आएं।
कोरोना वायरस की आपदा की वजह से समाज का एक बड़ा तबका बुरी तरह से प्रभावित हो गया है। उसे उबरने में काफी समय लग सकता है। ऐसे में स्कूल प्रबंधनों को ऐसे परिवारों के बच्चों की फीस माफ करना चाहिए।
- सीमा गुप्ता, सिविल लाइन
इस आपदा से लड़ने का काम केवल सरकार का नहीं है। सभी को एक दूसरे की मदद के लिए आगे आना होगा। यही रास्ता स्कूल प्रबंधन भी अपनाएं। वे भी उनके विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों की फीस माफ कर मदद करें।
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- रिंकी, तलैया मुहल्ला
विद्यार्थी और विद्यालय का गहरा नाता होता है। आपदा के इस दौरान में इस नाते को बरकरार रखने की बड़ी जिम्मेदारी विद्यालयों की बनती है। वे बच्चों की फीस माफ कर इस जिम्मेदारी का निर्वहन करें।
- मालती सिंह, खातीबाबा
विद्यालयों हर साल फीस वृद्धि करतें हैं। किताबों का खर्च भी बढ़ा दिया जाता है, जिसे अभिभावक सहर्ष स्वीकार कर लेते हैं। ऐसे में आपदा के इस दौरान विद्यालय प्रबंधन को आम जनमानस के साथ खड़ा होना चाहिए।
- रंजीता सिंह, सिद्धेश्वर कॉलोनी
कोरोना वायरस की आपदा की वजह से रोजगार और कारोबार बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। इससे समाज का एक बड़ा तबका बुरी तरह से टूट गया है। इस वर्ग की विद्यालय प्रबंधनों को फीस माफ कर मदद करनी चाहिए।
- सरोज जैन, रस विहार कॉलोनी
तमाम सारे लोगों के लिए अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो रहा है। ऐसे में स्कूल फीस जमा करना उनके लिए आसान नहीं है। फीस माफ कर विद्यालय प्रबंधनों को ऐसे लोगों की मदद करनी चाहिए।
- शमा खान, अलीगोल
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कोरोना वायरस की आपदा की वजह से समाज का एक बड़ा तबका बुरी तरह से प्रभावित हो गया है। उसे उबरने में काफी समय लग सकता है। ऐसे में स्कूल प्रबंधनों को ऐसे परिवारों के बच्चों की फीस माफ करना चाहिए।
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- सीमा गुप्ता, सिविल लाइन
इस आपदा से लड़ने का काम केवल सरकार का नहीं है। सभी को एक दूसरे की मदद के लिए आगे आना होगा। यही रास्ता स्कूल प्रबंधन भी अपनाएं। वे भी उनके विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों की फीस माफ कर मदद करें।
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- रिंकी, तलैया मुहल्ला
विद्यार्थी और विद्यालय का गहरा नाता होता है। आपदा के इस दौरान में इस नाते को बरकरार रखने की बड़ी जिम्मेदारी विद्यालयों की बनती है। वे बच्चों की फीस माफ कर इस जिम्मेदारी का निर्वहन करें।
- मालती सिंह, खातीबाबा
विद्यालयों हर साल फीस वृद्धि करतें हैं। किताबों का खर्च भी बढ़ा दिया जाता है, जिसे अभिभावक सहर्ष स्वीकार कर लेते हैं। ऐसे में आपदा के इस दौरान विद्यालय प्रबंधन को आम जनमानस के साथ खड़ा होना चाहिए।
- रंजीता सिंह, सिद्धेश्वर कॉलोनी
कोरोना वायरस की आपदा की वजह से रोजगार और कारोबार बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। इससे समाज का एक बड़ा तबका बुरी तरह से टूट गया है। इस वर्ग की विद्यालय प्रबंधनों को फीस माफ कर मदद करनी चाहिए।
- सरोज जैन, रस विहार कॉलोनी
तमाम सारे लोगों के लिए अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो रहा है। ऐसे में स्कूल फीस जमा करना उनके लिए आसान नहीं है। फीस माफ कर विद्यालय प्रबंधनों को ऐसे लोगों की मदद करनी चाहिए।
- शमा खान, अलीगोल