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भागदौड़ भरी जिंदगी में बढ़ी फिजियोथेरेपिस्ट की मांग
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झांसी। भागदौड़ भरी जिंदगी में बीमारियां बढ़ जाने से फिजियोथे रैपिस्ट की मांग काफी बढ़ गई है। फिजियोथेरेपिस्ट बिना दवा के फिजियो तकनीक और एक्सरसाइज से मरीजों को ठीक कर देते हैं। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में फिजियोथैरेपी कोर्स चलता है। ये कोर्स करने के लिए छात्र-छात्राओं के पास 10 जून तक फॉर्म भरने का मौका है। कोर्स के लिए प्रवेश परीक्षा होती है।
वाहनों की संख्या बढ़ने से दुर्घटनाओं में भी इजाफा हुआ है। हड्डियों की टूट-फूट होने पर शुरूआत में मरीज दवाओं का इस्तेमाल करते हैं। चूंकि, ज्यादा दवाएं खाना सेहत के लिए हानिकारक होता है। ऐसे में मांसपेशियों और जोड़ों से संबंधी दिक्कतों को दूर करने के लिए कई मरीजों को बाद में फिजियोथैरेपी करानी पड़ती है। बीयू के फिजियोथैरेपी विभाग के समन्वयक डॉ. सतेंद्र सिंह ने बताया कि फिजियोथैरेपी चिकित्सा विज्ञान की ऐसी शाखा है, जिसके जरिए शरीर के बाहरी हिस्सों का इलाज किया जाता है। इसमें दवाओं का इस्तेमाल न के बराबर होता है। सिर्फ विभिन्न फिजियो तकनीकी और एक्सरसाइज का उपयोग करके रोगों का इलाज होता है। इस कोर्स को करने के बाद रोजगार के कई अवसर हैं। सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में फिजियोथैरेपिस्ट रखे जाते हैं। इसके अलावा खुद की क्लीनिक भी खोल सकते हैं। रेलवे, बीएसएफ जैसे संस्थानों में भी फिजियोथैरेपिस्ट की भी रिक्तियां निकलती हैं। डॉ. सतेंद्र ने कहा कि ये कोर्स करने के लिए छात्र-छात्राओं में एकाग्रता, बेहतर कम्युनिकेशन स्किल, समस्या को समझकर निदान करने का कौशल, जुझारूपन और आत्मविश्वास होना जरूरी है।
इंटरमीडिएट पास के लिए कोर्स
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कोर्स का नाम: बैचलर इन फिजियोथैरेपी
चयन की प्रक्रिया: प्रवेश परीक्षा
योग्यता: 50 फीसदी अंकों से इंटर पास
सीटें: 40
अवधि: साढ़े चार साल
फीस: 52000
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वाहनों की संख्या बढ़ने से दुर्घटनाओं में भी इजाफा हुआ है। हड्डियों की टूट-फूट होने पर शुरूआत में मरीज दवाओं का इस्तेमाल करते हैं। चूंकि, ज्यादा दवाएं खाना सेहत के लिए हानिकारक होता है। ऐसे में मांसपेशियों और जोड़ों से संबंधी दिक्कतों को दूर करने के लिए कई मरीजों को बाद में फिजियोथैरेपी करानी पड़ती है। बीयू के फिजियोथैरेपी विभाग के समन्वयक डॉ. सतेंद्र सिंह ने बताया कि फिजियोथैरेपी चिकित्सा विज्ञान की ऐसी शाखा है, जिसके जरिए शरीर के बाहरी हिस्सों का इलाज किया जाता है। इसमें दवाओं का इस्तेमाल न के बराबर होता है। सिर्फ विभिन्न फिजियो तकनीकी और एक्सरसाइज का उपयोग करके रोगों का इलाज होता है। इस कोर्स को करने के बाद रोजगार के कई अवसर हैं। सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में फिजियोथैरेपिस्ट रखे जाते हैं। इसके अलावा खुद की क्लीनिक भी खोल सकते हैं। रेलवे, बीएसएफ जैसे संस्थानों में भी फिजियोथैरेपिस्ट की भी रिक्तियां निकलती हैं। डॉ. सतेंद्र ने कहा कि ये कोर्स करने के लिए छात्र-छात्राओं में एकाग्रता, बेहतर कम्युनिकेशन स्किल, समस्या को समझकर निदान करने का कौशल, जुझारूपन और आत्मविश्वास होना जरूरी है।
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इंटरमीडिएट पास के लिए कोर्स
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कोर्स का नाम: बैचलर इन फिजियोथैरेपी
चयन की प्रक्रिया: प्रवेश परीक्षा
योग्यता: 50 फीसदी अंकों से इंटर पास
सीटें: 40
अवधि: साढ़े चार साल
फीस: 52000