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डेल्टा प्लस के रूप की जांच के लिए अब ढाई गुना सैंपल भेजे जाएंगे
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झांसी। देश के कई राज्यों में तेजी से पैर पसार रहे कोरोना वायरस के डेल्टा प्लस वेरिएंट के खतरे को देखते हुए मेडिकल कॉलेज प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है। कॉलेज प्राचार्य ने अब नए रूप की जांच यानी जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए भेजे जाने वाले सैंपलों की संख्या ढाई गुनी करने का फैसला लिया है। यदि झांसी में इसकी दस्तक होती है, तो समय से मरीज को भर्ती कर न सिर्फ तत्काल इलाज दिया जाए, बल्कि इसका प्रसार भी रोका जा सके।
झांसी से 100 किलोमीटर दूर मध्य प्रदेश के शिवपुरी में कोरोना के नए रूप डेल्टा प्लस की दस्तक से हड़कंप मच गया है। ये दूसरी लहर में झांसी समेत देश भर में तबाही मचाने वाले डेल्टा वेरिएंट से ज्यादा खतरनाक बताया जा रहा है। इससे संक्रमित व्यक्ति की हालत काफी तेजी से बिगड़ती है। ऐसे में डेल्टा प्लस वेरिएंट से संक्रमित व्यक्तियों के अस्पतालों में भर्ती होने से लेकर दम तोड़ने तक की दर ज्यादा बताई जा रही है। कोरोना का नया रूप झांसी और बुंदेलखंड में तबाही न मचा दे, इसके लिए मेडिकल कॉलेज प्रशासन अलर्ट हो गया है।
बताया गया कि आरटीपीसीआर जांच में जिन कोविड मरीजों की सीटी वैल्यू 25 से कम आती है, उनमें से 20 प्रतिशत सैंपलों को जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए दिल्ली और लखनऊ भेजा जा रहा है। मगर अब झांसी में इन सैंपलों की संख्या ढाई गुनी करने की तैयारी है। यानी कि अब 50 प्रतिशत सैंपलों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। ताकि, इस वेरिएंट से संक्रमित व्यक्ति की जल्दी पहचान हो जाए। इससे मरीज को तुरंत इलाज भी मिल जाएगा। वहीं, उसके संपर्क में आने वाले दूसरे लोगों की भी पहचान कर जांच करा ली जाएगी। इससे संक्रमण का प्रसार थम सकेगा।
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ये है जीनोम सिक्वेंसिंग
जीनोम सीक्वेंसिंग एक तरह से किसी वायरस का बायोडाटा होता है। कोई वायरस कैसा है, किस तरह दिखता है, इसकी जानकारी जीनोम से मिलती है। वायरस के विशाल समूह को जीनोम कहा जाता है। वायरस के बारे में जानने की विधि को जीनोम सिक्वेंसिंग कहते हैं। इससे ही कोरोना के नए स्ट्रेन के बारे में पता चलता है।
डेल्टा प्लस वेरिएंट क्या है
यह नया स्वरूप डेल्टा प्लस (एवाई.1) भारत में सबसे पहले सामने आए डेल्टा (बी.1.617.2) के म्यूटेशन से बना है। इसके अलावा के 41 एन नाम का म्यूटेशन जो दक्षिण अफ्रीका में बीटा वेरिएंट में पाया गया था। उसके भी इसके लक्षण मिलते-जुलते हैं। इसलिए यह ज्यादा खतरनाक है।
जिन कोविड मरीजों की सीटी वैल्यू 25 से कम आती है, उनमें से 20 प्रतिशत सैंपलों को जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए दिल्ली सैंपल भेजे जा रहे हैं। चूंकि, शिवपुरी में भी नए वेरिएंट के मरीज मिले हैं, ऐसे में अब 50 प्रतिशत सैंपलों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। - डॉ. एनएस सेंगर, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज झांसी।
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झांसी से 100 किलोमीटर दूर मध्य प्रदेश के शिवपुरी में कोरोना के नए रूप डेल्टा प्लस की दस्तक से हड़कंप मच गया है। ये दूसरी लहर में झांसी समेत देश भर में तबाही मचाने वाले डेल्टा वेरिएंट से ज्यादा खतरनाक बताया जा रहा है। इससे संक्रमित व्यक्ति की हालत काफी तेजी से बिगड़ती है। ऐसे में डेल्टा प्लस वेरिएंट से संक्रमित व्यक्तियों के अस्पतालों में भर्ती होने से लेकर दम तोड़ने तक की दर ज्यादा बताई जा रही है। कोरोना का नया रूप झांसी और बुंदेलखंड में तबाही न मचा दे, इसके लिए मेडिकल कॉलेज प्रशासन अलर्ट हो गया है।
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बताया गया कि आरटीपीसीआर जांच में जिन कोविड मरीजों की सीटी वैल्यू 25 से कम आती है, उनमें से 20 प्रतिशत सैंपलों को जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए दिल्ली और लखनऊ भेजा जा रहा है। मगर अब झांसी में इन सैंपलों की संख्या ढाई गुनी करने की तैयारी है। यानी कि अब 50 प्रतिशत सैंपलों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। ताकि, इस वेरिएंट से संक्रमित व्यक्ति की जल्दी पहचान हो जाए। इससे मरीज को तुरंत इलाज भी मिल जाएगा। वहीं, उसके संपर्क में आने वाले दूसरे लोगों की भी पहचान कर जांच करा ली जाएगी। इससे संक्रमण का प्रसार थम सकेगा।
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ये है जीनोम सिक्वेंसिंग
जीनोम सीक्वेंसिंग एक तरह से किसी वायरस का बायोडाटा होता है। कोई वायरस कैसा है, किस तरह दिखता है, इसकी जानकारी जीनोम से मिलती है। वायरस के विशाल समूह को जीनोम कहा जाता है। वायरस के बारे में जानने की विधि को जीनोम सिक्वेंसिंग कहते हैं। इससे ही कोरोना के नए स्ट्रेन के बारे में पता चलता है।
डेल्टा प्लस वेरिएंट क्या है
यह नया स्वरूप डेल्टा प्लस (एवाई.1) भारत में सबसे पहले सामने आए डेल्टा (बी.1.617.2) के म्यूटेशन से बना है। इसके अलावा के 41 एन नाम का म्यूटेशन जो दक्षिण अफ्रीका में बीटा वेरिएंट में पाया गया था। उसके भी इसके लक्षण मिलते-जुलते हैं। इसलिए यह ज्यादा खतरनाक है।
जिन कोविड मरीजों की सीटी वैल्यू 25 से कम आती है, उनमें से 20 प्रतिशत सैंपलों को जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए दिल्ली सैंपल भेजे जा रहे हैं। चूंकि, शिवपुरी में भी नए वेरिएंट के मरीज मिले हैं, ऐसे में अब 50 प्रतिशत सैंपलों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। - डॉ. एनएस सेंगर, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज झांसी।