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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   - Declining interest in Hindi at the undergraduate level; postgraduate students and researchers are embracing the language.

Jhansi News: रोजगार और बुलंदी के नए रास्ते खोल रही मातृभाषा

Wed, 09 Sep 2026 02:19 AM IST
झांसी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी Updated Wed, 09 Sep 2026 02:19 AM IST
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- Declining interest in Hindi at the undergraduate level; postgraduate students and researchers are embracing the language.
झांसी। हिंदी के प्रति स्नातक (यूजी) के विद्यार्थियों का रुझान अब कम हो रहा है। परास्नातक (पीजी) के विद्यार्थियों और शोधार्थियों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है। इसकी वजह उनकी समझ में आ गया है कि हिंदी अपनाने पर तमाम कॅरिअर की संभावनाएं हैं।
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हिंदी विषय के वरिष्ठ शिक्षकों का कहना है कि कोचिंग के भ्रमजाल में फंसकर विद्यार्थी समझ रहे हैं कि हिंदी की जगह अंग्रेजी अपनाने से कॅरिअर बनेगा, जो गलत है। जिसकी वजह से विद्यार्थी हिंदी से दूर हो रहे हैं, जो सही नहीं। चूंकि हिंदी आम बोलचाल की भाषा है, इसलिए विद्यार्थी समझते हैं कि उन्हें हिंदी आती है। हकीकत यह है कि बोलचाल की हिंदी और उसके साहित्य व व्याकरण की हिंदी अलग रूप लेती है। यह गलतफहमी है कि हिंदी सिमट रही है। हकीकत यह है कि हिंदी का विस्तार हो रहा है। यही वजह है चाहे फिल्म उद्योगों हो, विज्ञापन की दुनिया हो या फिर मीडिया हाउस, हर जगह हिंदी ही चलती है। शिक्षा के क्षेत्र से लेकर सिविल सर्विसेज तक की परीक्षा में हिंदी का अहम योगदान है। प्रतियोगी परीक्षाओं की सफलता में भी हिंदी अहम स्थान रखती है।
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हिंदी के विद्वानों ने स्वीकार कि हिंदी स्नातक पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या कम हुई है। मगर उत्साहित है कि परास्नातक में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ रही है। शोधार्थियों की संख्या भी सीटों के सापेक्ष शत-प्रतिशत है।
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0- बीयू में हिंदी के विद्यार्थियों का आंकड़ा
वर्ष यूजी विद्यार्थी पीजी विद्यार्थी
2024-25 115 53
2025-26 85 35
2026-27 77 69


0- ये बोले विद्वान
हिंदी के प्रति रुझान कम नहीं हो रहा बल्कि काफी बढ़ रहा है। यही वजह है कि पीजी में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ी है। वर्तमान 75 शोधार्थी शोध कर रहे हैं और एक भी सीट खाली नहीं है।

प्रो. पुनीत बिसारिया विभागाध्यक्ष हिंदी विभाग बीयू

चूंकि हिंदी मातृभाषा है, इसलिए विद्यार्थी गंभीरता से नहीं लेते हैं। हकीकत यह है कि हिंदी से कॅरिअर की तमाम संभावनाएं हैं। हर प्रतियोगी परीक्षा में हिंदी का अहम स्थान होता है।
डॉ. नवेंद्र सिंह, विभागाध्यक्ष हिंदी विभाग बीकेडी
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