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Jhansi: सर्दी की विदाई, मार्च की गर्मी अभी से आई, झांसी इस समय सबसे गर्म, फसलों को नुकसान की संभावना
Fri, 10 Feb 2023 05:00 AM IST
झांसी ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, झांसी
अमर उजाला ब्यूरो, झांसी
Published by: झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 10 Feb 2023 05:00 AM IST
सार
फरवरी में औसतन तापमान 25 डिग्री सेल्सियस रहता है। जबकि, मार्च में 30 डिग्री सेल्सियस। इस बार फरवरी में ही मार्च जैसी गर्मी पड़ने लगी है।
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झांसी में सर्दी की विदाई (सांकेतिक फोटो)
- फोटो : Social media
विस्तार
झांसी में दिन में सर्दी की विदाई हो गई है। फरवरी में ही मार्च जैसी गर्मी पड़ने लगी है। बृहस्पतिवार को अधिकतम तापमान 28.9 डिग्री सेल्सियस रहने से झांसी प्रदेश में सबसे गर्म रहा। मौसम विभाग का मानना है कि 15 फरवरी से तापमान 31 डिग्री के पार जा सकता है।
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मध्य जनवरी के बाद से मौसम ने एकदम से करवट ले ली है। तापमान तेजी से बढ़ता जा रहा है और अब तो सिर्फ रात में सामान्य ठंड बची हुई है। पिछले साल से इस बार फरवरी के शुरूआती दिनों में तीन से चार डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान ज्यादा बना हुआ है। वर्ष 2022 में फरवरी के शुरूआती दस दिनों में झांसी में अधिकतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था। जबकि, इस बार 30.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। मौसम विभाग की मानें तो वर्ष 2021 में भी यही हालात थे।
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बृहस्पतिवार को झांसी प्रदेश में सर्वाधिक गर्म रहा। अधिकतम तापमान 28.9 डिग्री सेल्सियस रहा, जो कि सामान्य से 3.1 डिग्री ज्यादा है। वहीं, न्यूनतम तापमान 12.6 डिग्री सेल्सियस रहा, ये सामान्य से 1.6 डिग्री अधिक है। मौसम वैज्ञानिक डॉ. आदित्य कुमार सिंह ने बताया कि अब सर्दी नहीं लौटेगी। अगर फरवरी में बारिश होती भी है तो तापमान में मामूली अंतर आएगा। कहा कि पूर्वोत्तर दिशा से सर्द हवाएं झांसी की तरफ चली हैं। इस वजह से एक-दो डिग्री तापमान कम हुआ है। मगर आगामी दिनों में पारा और बढ़ेगा। उन्होंने बताया कि फरवरी में औसतन तापमान 25 डिग्री सेल्सियस रहता है। जबकि, मार्च में 30 डिग्री सेल्सियस। इस बार फरवरी में ही मार्च जैसी गर्मी पड़ने लगी है।
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छोटा हो सकता है फसल का दाना
बीयू के कृषि विज्ञान संस्थान के डॉ. संतोष पांडेय ने बताया कि गर्मी का ग्राफ जिस तरीके से लगातार बढ़ रहा है, उससे फसलों को सिंचाई के लिए पानी की आवश्यकता बढ़ गई है। आगे के दिनों में तापमान और बढ़ता है और फसलों को पर्याप्त पानी नहीं मिलता है तो फसलों को नुकसान संभव है। अभी सरसों चना, मटर, मसूर की फलियों में दाने बन रहे हैं, जबकि, गेहूं की बालियां निकल रही हैं। गर्मी से दाने समय से पहले पक जाएंगे। इससे उनका आकार छोटा रह जाएगा और उत्पादन घट जाएगा।