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Datia: पीतांबरा पीठ की 8 हजार दुर्लभ किताबों को मिलेगा डिजिटल जीवन, 16 लाख पन्नों का होगा डिजिटलीकरण
Mon, 21 Sep 2026 11:32 AM IST
दीपक महाजन
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Mon, 21 Sep 2026 11:32 AM IST
सार
पीठ के पुस्तकालय में संरक्षित पूज्यपाद स्वामी जी की पांडुलिपियों के करीब 6700 पन्नों का डिजिटलीकरण पहले ही पूरा किया जा चुका है। अब बड़े स्तर पर दुर्लभ पुस्तकों को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित करने की तैयारी है।
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दतिया पीतांबरा पीठ में रिसर्च सेंटर का निर्माण होता हुआ।
- फोटो : संवाद।
विस्तार
प्रसिद्ध पीतांबरा पीठ के पुस्तकालय में संरक्षित दुर्लभ पुस्तकों और पांडुलिपियों को अब डिजिटल जीवन देने की तैयारी है। शारदीय नवरात्रि के दौरान पुस्तकालय में रखी करीब 8 हजार दुर्लभ पुस्तकों के 16 लाख पन्नों का डिजिटलीकरण किया जाएगा। इनमें अंग्रेजी, जर्मन, लैटिन, फ्रेंच, रूसी और संस्कृत समेत विभिन्न भाषाओं में लिखे ग्रंथ शामिल हैं। इस काम में केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय की तकनीकी टीम का सहयोग लिया जाएगा। डिजिटलीकरण पर करीब 32 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। पीठ के पुस्तकालय में संरक्षित पूज्यपाद स्वामी जी की पांडुलिपियों के करीब 6700 पन्नों का डिजिटलीकरण पहले ही पूरा किया जा चुका है। अब बड़े स्तर पर दुर्लभ पुस्तकों को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित करने की तैयारी है।
जर्जर हो चुके ग्रंथों को मिलेगा स्थायी डिजिटल रिकॉर्ड
पीतांबरा पीठ के पुस्तकालय में धार्मिक, आध्यात्मिक, वैदिक और विभिन्न विषयों से संबंधित दुर्लभ ग्रंथ और पांडुलिपियां लंबे समय से संरक्षित हैं। इनमें कई पुस्तकें इतनी पुरानी और जर्जर हो चुकी हैं कि उन्हें बार-बार खोलना या छूना भी जोखिम भरा है। कागज खराब होने के कारण इनके नष्ट होने का खतरा बना रहता है।
ऐसे में डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से मूल पुस्तकों को कम से कम छेड़ना पड़ेगा और उनकी सामग्री लंबे समय तक सुरक्षित रखी जा सकेगी। 16 लाख पन्नों का डिजिटल संग्रह तैयार होने के बाद सदियों पुराने साहित्य की सामग्री एक क्लिक पर अध्ययन के लिए उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा आधार तैयार होगा।
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मूल प्रति को नुकसान पहुंचाए बिना शोध की सुविधा
दुर्लभ ग्रंथों के डिजिटल स्वरूप में उपलब्ध होने से शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को भी सुविधा मिलेगी। वे मूल प्रति को बार-बार संभाले बिना उसके डिजिटल संस्करण के जरिये सामग्री का अध्ययन कर सकेंगे। इससे धार्मिक और आध्यात्मिक साहित्य के साथ-साथ ऐतिहासिक, वैदिक और शैक्षणिक विषयों पर शोध को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
तीन करोड़ से बन रहा वैदिक पुस्तकालय एवं रिसर्च सेंटर
दुर्लभ साहित्य के संरक्षण और शोध को बढ़ावा देने के लिए पीतांबरा पीठ परिसर में करीब तीन करोड़ रुपये की लागत से वैदिक पुस्तकालय एवं रिसर्च सेंटर का निर्माण भी किया जा रहा है। केंद्र में वैदिक साहित्य, प्राचीन ग्रंथों और दुर्लभ पुस्तकों के संरक्षण के साथ शोधकर्ताओं के लिए अध्ययन की सुविधाएं विकसित करने की योजना है। सेंटर के समन्वयक पुणे के प्रमोद वर्मा के अनुसार, वैदिक पुस्तकालय एवं रिसर्च सेंटर के निर्माण में मुंबई के कारोबारी सुरेश सरिया आर्थिक सहयोग कर रहे हैं। केंद्र के जरिये दुर्लभ साहित्य को व्यवस्थित तरीके से संरक्षित करने और शोध के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने की योजना है।
पहले 6700 पन्नों का हो चुका डिजिटलीकरण
पीतांबरा पीठ के पुस्तकालय में मौजूद पूज्यपाद स्वामी जी की पांडुलिपियों के करीब 6700 पन्नों को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित किया जा चुका है। अब नवरात्रि के दौरान करीब 8 हजार पुस्तकों के 16 लाख पन्नों को डिजिटल करने की तैयारी है। इससे पुस्तकालय में मौजूद दुर्लभ साहित्य का एक बड़ा डिजिटल रिकॉर्ड तैयार हो सकेगा।
इन्होंने यह कहा
पीतांबरा पीठ के पुस्तकालय में रखे दुर्लभ ग्रंथ और पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण किया जा रहा है। इस दिशा में काम शुरू हो चुका है। इसका उद्देश्य दुर्लभ साहित्य को सुरक्षित रखना है।-डॉ. धीरेंद्र सिंह चंदेल, न्यासी, श्री पीतांबरा पीठ, दतिया
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जर्जर हो चुके ग्रंथों को मिलेगा स्थायी डिजिटल रिकॉर्ड
पीतांबरा पीठ के पुस्तकालय में धार्मिक, आध्यात्मिक, वैदिक और विभिन्न विषयों से संबंधित दुर्लभ ग्रंथ और पांडुलिपियां लंबे समय से संरक्षित हैं। इनमें कई पुस्तकें इतनी पुरानी और जर्जर हो चुकी हैं कि उन्हें बार-बार खोलना या छूना भी जोखिम भरा है। कागज खराब होने के कारण इनके नष्ट होने का खतरा बना रहता है।
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ऐसे में डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से मूल पुस्तकों को कम से कम छेड़ना पड़ेगा और उनकी सामग्री लंबे समय तक सुरक्षित रखी जा सकेगी। 16 लाख पन्नों का डिजिटल संग्रह तैयार होने के बाद सदियों पुराने साहित्य की सामग्री एक क्लिक पर अध्ययन के लिए उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा आधार तैयार होगा।
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मूल प्रति को नुकसान पहुंचाए बिना शोध की सुविधा
दुर्लभ ग्रंथों के डिजिटल स्वरूप में उपलब्ध होने से शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को भी सुविधा मिलेगी। वे मूल प्रति को बार-बार संभाले बिना उसके डिजिटल संस्करण के जरिये सामग्री का अध्ययन कर सकेंगे। इससे धार्मिक और आध्यात्मिक साहित्य के साथ-साथ ऐतिहासिक, वैदिक और शैक्षणिक विषयों पर शोध को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
तीन करोड़ से बन रहा वैदिक पुस्तकालय एवं रिसर्च सेंटर
दुर्लभ साहित्य के संरक्षण और शोध को बढ़ावा देने के लिए पीतांबरा पीठ परिसर में करीब तीन करोड़ रुपये की लागत से वैदिक पुस्तकालय एवं रिसर्च सेंटर का निर्माण भी किया जा रहा है। केंद्र में वैदिक साहित्य, प्राचीन ग्रंथों और दुर्लभ पुस्तकों के संरक्षण के साथ शोधकर्ताओं के लिए अध्ययन की सुविधाएं विकसित करने की योजना है। सेंटर के समन्वयक पुणे के प्रमोद वर्मा के अनुसार, वैदिक पुस्तकालय एवं रिसर्च सेंटर के निर्माण में मुंबई के कारोबारी सुरेश सरिया आर्थिक सहयोग कर रहे हैं। केंद्र के जरिये दुर्लभ साहित्य को व्यवस्थित तरीके से संरक्षित करने और शोध के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने की योजना है।
पहले 6700 पन्नों का हो चुका डिजिटलीकरण
पीतांबरा पीठ के पुस्तकालय में मौजूद पूज्यपाद स्वामी जी की पांडुलिपियों के करीब 6700 पन्नों को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित किया जा चुका है। अब नवरात्रि के दौरान करीब 8 हजार पुस्तकों के 16 लाख पन्नों को डिजिटल करने की तैयारी है। इससे पुस्तकालय में मौजूद दुर्लभ साहित्य का एक बड़ा डिजिटल रिकॉर्ड तैयार हो सकेगा।
इन्होंने यह कहा
पीतांबरा पीठ के पुस्तकालय में रखे दुर्लभ ग्रंथ और पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण किया जा रहा है। इस दिशा में काम शुरू हो चुका है। इसका उद्देश्य दुर्लभ साहित्य को सुरक्षित रखना है।-डॉ. धीरेंद्र सिंह चंदेल, न्यासी, श्री पीतांबरा पीठ, दतिया