फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   Cyber criminals are using the bank accounts of the poor

गरीबों के बैंक खातों का इस्तेमाल कर रहे हैं साइबर अपराधी

Sat, 31 Jul 2021 02:21 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 31 Jul 2021 02:21 AM IST
विज्ञापन
Cyber criminals are using the bank accounts of the poor
झांसी। ठगी की वारदात को अंजाम देने के लिए साइबर अपराधी गरीबों के बैंक खातों का इस्तेमाल कर रहे हैं। चंद रुपयों की लालच देकर वे उन्हें अपने जाल में फंसा लेेते हैं। खाताधारक को मालूम ही नहीं होता है कि वे किसी आपराधिक वारदात का हिस्सा बनने जा रहे हैं। साइबर ठगी के अस्सी फीसदी मामले में पुलिस के सामने ये तथ्य सामने आया है।
विज्ञापन

एटीएम कार्ड का नंबर, पिन नंबर व अन्य जानकारियां हासिल कर खाते से रकम उड़ाना आम बात हो गई है। इसके अलावा कभी नौकरी के नाम पर युवाओं को ठगा जाता है, तो कभी फेसबुक आईडी हैक कर साइबर अपराधी रकम समेट लेते हैं। इन सब घटनाओं को अंजाम तक पहुंचाने के लिए बैंक खाते का इस्तेमाल किया जाता है। पकड़े जाने से बचने के लिए साइबर अपराधी अपने बैंक खाते का इस्तेमाल नहीं करते, बल्कि गरीबों को झांसा देकर वे उन्हें अपने जाल में फंसा लेते हैं। उनसे बैंक खाते का पूरा ब्योरा और एटीएम कार्ड हासिल कर लेते हैं। इसके आधार पर नेट बैंकिंग की सुविधा भी वे ले लेते हैं। जबकि, खाताधारक को इसकी जानकारी नहीं होती है। उसे तो केवल इतना बताया जाता है कि कुछ रकम उसके खाते में आएगी, जिसे वे निकाल लेंगे। इसके बदले में खाताधारक को तीन-चार हजार रुपये थमा दिए जाते हैं। ये धनराशि भी उसके खाते में छोड़ दी जाती है।
विज्ञापन

साइबर अपराध की जांच में पुलिस के सामने सबसे अहम जानकारी बैंक खाता ही होती है। साइबर पुलिस बैंक से खाताधारक की जानकारी लेकर उसके पास पहुंचती है, तो पता चलता है कि साइबर अपराध के बारे में उसे जानकारी ही नहीं है। उसने तो चंद रुपयों की खातिर अपना खाता किसी को किराये पर देखा रखा है। साइबर अपराध के अस्सी फीसदी मामलों में यही बात सामने आती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

सामने नहीं आते, फोन पर लेते हैं फांस
झांसी। साइबर अपराधी जिन लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं, उनसे उनका कभी आमना-सामना नहीं होता है। फोन कॉल के जरिये वे ऐसे लोगों को फांस लेते हैं। साइबर सेल प्रभारी नीरज कुमार ने बताया कि साइबर अपराधियों के टारगेट पर वे लोग होते हैं, जिनके खाते में रकम के नाम पर चंद रुपये ही जमा रहते हैं और कभी कभार ही ट्रांजेक्शन होता है। एक-दो बार खातों को इस्तेमाल करने के बाद साइबर ठग अपना दूसरा शिकार तलाश लेते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed