{"_id":"589235954f1c1b7c3de83706","slug":"currency-pm","type":"story","status":"publish","title_hn":" पीएम की मुद्रा नहीं लौटा रहे लोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पीएम की मुद्रा नहीं लौटा रहे लोग
jhansi
Updated Thu, 02 Feb 2017 12:53 AM IST
विज्ञापन
money
- फोटो : demo pic
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत उद्योग लगाने के लिए दिए गए लोन की किस्तें लोग नहीं लौटा रहे हैं। इससे बैंकों के 29 करोड़ रुपये फंस गए हैं। लोन के लिए सिक्योरिटी जमा न होने से लोगों को रकम चुकाने की चिंता नहीं हो रही है। अप्रैल 2016 से अब तक 13860 से अधिक खाते खोले जा चुके हैं। इनमें से अधिकांश खाते नॉन परफार्मिंग एसेट्स (एनपीए) श्रेणी में आ गए हैं।
केंद्र सरकार ने मई 2015 में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना का शुभारंभ किया। लोगों को रोजगार मुहैया करवाने के लिए बैंकों को अधिकाधिक लोन वितरित करने के निर्देश दिए। योजना के तहत सर्व यूपी ग्रामीण बैंक ने जिले में 2149 लोगों को सात करोड़ 92 लाख 60 हजार का लोन दिया गया। इसमें 984 लोगों ने चार करोड़ 28 लाख के लोन की पहली किस्त ही नहीं चुकाई। इससे इनके खाते एनपीए की श्रेणी में आ गए हैं। इसी तरह पंजाब नेशनल बैंक ने जिले में इस वित्तीय वर्ष में 4230 लोगों को 32 करोड़ 38 लाख का लोन दिया। इसमें लगभग 3 हजार से अधिक लोगों ने 25 करोड़ से अधिक लोन की किस्तें नहीं लौटाई हैं। इससे यह खाते भी एनपीए की श्रेणी में आ गए हैं। बैंक अधिकारियों ने बताया कि योजना के तहत लोन देने पर बैंक ने कोई सिक्योरिटी नहीं ली। इससे लोगों को संपत्ति जब्त होने का खतरा भी नहीं है। यही वजह है कि वह किस्तें नहीं चुका रहे हैं।
लोन न चुकाने पर होगा नुकसान
लोन की किस्त लगातार तीन महीने तक न चुकाने से खाता एनपीए की श्रेणी में चला जाता है। इसके बाद बैंक हर महीने चार नोटिस भेजता है। इन नोटिस पर आने वाला खर्चा भी ग्राहक के खाते में जोड़ा जाता है। अलग-अलग बैंक नोटिस की राशि 100 से 400 रुपये तक वसूलते हैं। इसके बाद भी लोन की किस्त न चुकाने पर बैंक रिकवरी सर्टीफिकेट जारी कर देती है। इसके बाद प्रशासन लोन का दस प्रतिशत पेनाल्टी वसूलता है। इसके अलावा घर की कुर्की, गिरफ्तारी आदि हो भी सकती है। इसके बाद बैंकों के सिविल सॉफ्टवेयर में नाम दर्ज होेने के बाद अन्य बैंक भी कर्ज नहीं देते हैं।
विज्ञापन
ये है प्रधानमंत्री मुद्रा योजना
छोटे कारोबारियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा मुद्रा (माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट फंड रिफाइनेंस एजेंसी) योजना के तहत ऋण लेने की सुविधा प्रदान की गई है। इसमें बगैर गारंटी के ऋण देने का प्रावधान है। इस योजना के तहत तीन तरह का ऋण दिया जाता है। शिशु योजना के तहत पचास हजार रुपये तक, किशोर योजना के तहत पचास हजार से पांच लाख तक तथा तरुण योजना के तहत पांच लाख से दस लाख रुपये तक के ऋण का प्रावधान है। इसमें न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित की गई है। जबकि, शैक्षिक योग्यता का पैमाना निर्धारित नहीं किया गया है।
ये ले सकते हैं ऋण
मुद्रा योजना के तहत लघु विनिर्माण इकाइयां, सेवा क्षेत्र की इकाइयां, दुकानदार, फल-सब्जी विक्रेता, ट्रक परिचालक, खाद्य सेवा इकाइयां, मरम्मत दुकानें, मशीन परिचालन, लघु उद्योग, दस्तकार, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां तथा व्यवसायों के लिए ऋण का प्रावधान किया गया है।
वर्जन
इस तरह के लोन में सिक्योरिटी नहीं ली जाती है। बैंक वसूली के लिए दबाव भी नहीं बना सकते हैं। इस कारण खाते एनपीए हो जाते हैं। लोन की किस्तों को समय से चुकाने पर ग्राहकों का ही फायदा है।
- एसके व्यास, क्षेत्रीय प्रबंधक, सर्व यूपी ग्रामीण बैंक
वर्जन
मुद्रा योजना छोटे कारोबारियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई है। तकनीकी शिक्षा धारकों को प्राथमिकता के आधार पर ऋण देने का प्रावधान है।
- एसके चावला, अग्रणी जिला प्रबंधक
विज्ञापन
केंद्र सरकार ने मई 2015 में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना का शुभारंभ किया। लोगों को रोजगार मुहैया करवाने के लिए बैंकों को अधिकाधिक लोन वितरित करने के निर्देश दिए। योजना के तहत सर्व यूपी ग्रामीण बैंक ने जिले में 2149 लोगों को सात करोड़ 92 लाख 60 हजार का लोन दिया गया। इसमें 984 लोगों ने चार करोड़ 28 लाख के लोन की पहली किस्त ही नहीं चुकाई। इससे इनके खाते एनपीए की श्रेणी में आ गए हैं। इसी तरह पंजाब नेशनल बैंक ने जिले में इस वित्तीय वर्ष में 4230 लोगों को 32 करोड़ 38 लाख का लोन दिया। इसमें लगभग 3 हजार से अधिक लोगों ने 25 करोड़ से अधिक लोन की किस्तें नहीं लौटाई हैं। इससे यह खाते भी एनपीए की श्रेणी में आ गए हैं। बैंक अधिकारियों ने बताया कि योजना के तहत लोन देने पर बैंक ने कोई सिक्योरिटी नहीं ली। इससे लोगों को संपत्ति जब्त होने का खतरा भी नहीं है। यही वजह है कि वह किस्तें नहीं चुका रहे हैं।
विज्ञापन
लोन न चुकाने पर होगा नुकसान
लोन की किस्त लगातार तीन महीने तक न चुकाने से खाता एनपीए की श्रेणी में चला जाता है। इसके बाद बैंक हर महीने चार नोटिस भेजता है। इन नोटिस पर आने वाला खर्चा भी ग्राहक के खाते में जोड़ा जाता है। अलग-अलग बैंक नोटिस की राशि 100 से 400 रुपये तक वसूलते हैं। इसके बाद भी लोन की किस्त न चुकाने पर बैंक रिकवरी सर्टीफिकेट जारी कर देती है। इसके बाद प्रशासन लोन का दस प्रतिशत पेनाल्टी वसूलता है। इसके अलावा घर की कुर्की, गिरफ्तारी आदि हो भी सकती है। इसके बाद बैंकों के सिविल सॉफ्टवेयर में नाम दर्ज होेने के बाद अन्य बैंक भी कर्ज नहीं देते हैं।
विज्ञापन
ये है प्रधानमंत्री मुद्रा योजना
छोटे कारोबारियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा मुद्रा (माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट फंड रिफाइनेंस एजेंसी) योजना के तहत ऋण लेने की सुविधा प्रदान की गई है। इसमें बगैर गारंटी के ऋण देने का प्रावधान है। इस योजना के तहत तीन तरह का ऋण दिया जाता है। शिशु योजना के तहत पचास हजार रुपये तक, किशोर योजना के तहत पचास हजार से पांच लाख तक तथा तरुण योजना के तहत पांच लाख से दस लाख रुपये तक के ऋण का प्रावधान है। इसमें न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित की गई है। जबकि, शैक्षिक योग्यता का पैमाना निर्धारित नहीं किया गया है।
ये ले सकते हैं ऋण
मुद्रा योजना के तहत लघु विनिर्माण इकाइयां, सेवा क्षेत्र की इकाइयां, दुकानदार, फल-सब्जी विक्रेता, ट्रक परिचालक, खाद्य सेवा इकाइयां, मरम्मत दुकानें, मशीन परिचालन, लघु उद्योग, दस्तकार, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां तथा व्यवसायों के लिए ऋण का प्रावधान किया गया है।
वर्जन
इस तरह के लोन में सिक्योरिटी नहीं ली जाती है। बैंक वसूली के लिए दबाव भी नहीं बना सकते हैं। इस कारण खाते एनपीए हो जाते हैं। लोन की किस्तों को समय से चुकाने पर ग्राहकों का ही फायदा है।
- एसके व्यास, क्षेत्रीय प्रबंधक, सर्व यूपी ग्रामीण बैंक
वर्जन
मुद्रा योजना छोटे कारोबारियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई है। तकनीकी शिक्षा धारकों को प्राथमिकता के आधार पर ऋण देने का प्रावधान है।
- एसके चावला, अग्रणी जिला प्रबंधक