{"_id":"5761a9ff4f1c1b481e11bac9","slug":"voilence-on-rozgar-sevak-s-suicide","type":"story","status":"publish","title_hn":"रोजगार सेवक की खुदकुशी पर बवाल","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
रोजगार सेवक की खुदकुशी पर बवाल
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 16 Jun 2016 12:48 AM IST
विज्ञापन
suicide, jhansi hindi news
- फोटो : demo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गुरसराय / मऊरानीपुर (झांसी)। बामौर ब्लॉक के दुरखुरू गांव में रोजगार सेवक रवींद्र सिंह ने पेड़ पर फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। उसके पास मिले सोसाइड नोट में डीसी मनरेगा पर उत्पीड़न करने व एक वर्ष से वेतन न मिलने का आरोप लगाया है। इससे बवाल हो गया। घटना से आक्रोशित साथी रोजगार सेवकों ने पहले गुरसरांय अस्पताल में हंगामा किया तथा बाद में यहां से चालीस किलोमीटर दूर मऊरानीपुर पहुंचकर शव को सड़क पर रखकर जाम लगा दिया। सीडीओ ने फोन पर कार्रवाई का आश्वासन दिया तब कहीं प्रदर्शनकारियों ने करीब डेढ़ घंटे बाद जाम खोला।
बामौर विकास खंड के ग्राम दुरखुरुग्राम पंचायत में 40 वर्षीय रविंद्र सिंह पुत्र धनीराम रोजगार सेवक के पद पर तैनात थे। बुधवार की सुबह वह घर से खेतों की ओर निकले तथा यहां पेड़ पर रस्सी बांधकर फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। कुछ देर बाद खेतों की ओर से निकले ग्रामीणों ने रविंद्र को फांसी पर लटका देखा तो उन्होंने परिजनों को सूचना दी तथा शव को पेड़ से उतारकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गरौठा ले गए, जहां चिकित्सकों ने गुरसराय ले जाने की बात कही। इसके बाद रविंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुरसरांय लाया गया, यहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद गरौठा पुलिस को सूचना दी गई। अस्पताल पहुँची पुलिस ने जब मृतक के जेबों की तलाशी ली तो सुसाइड नोट निकला।
नोट में मनरेगा के डीसी पर घूस माँगने एवं प्रताड़ित करने तथा एक वर्ष से मानदेय न मिलने की बात लिखी है। घूसखोरी व उत्पीड़न के चलते आत्महत्या को मजबूर होने की बात फैलते ही बामौर एवं गुरसराय ब्लॉक के अनेक रोजगार सेवक अस्पताल पहुंच गए तथा मनरेगा उपायुक्त के खिलाफ मामला दर्ज करवाने की मांग पर अड़ गए। तीन घंटे तक हंगामा चलता रहा। घटना की खबर मिलते ही खंड विकास अधिकारी बामौर मुकेश पटेल, गुरसराय के के पांडेय एवं गुरसराय तथा गरौठा पुलिस अस्पताल पहुंच गई। सभी ने मिलकर मामला शांत करवाकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। बाद में रोजगार सेवकों से बात करने पहुंचे उपजिलाधिकारी श्रीराम यादव के सामने एक बार फिर हंगामा होने लगा।
विज्ञापन
रोजगार सेवक संघ के जिलाध्यक्ष बरजोर सिंह यादव ने मामला दर्ज करवाने की मांग रखी। रोजगार सेवक संघ के जिलाध्यक्ष बरजोर सिंह यादव के साथ भारी संख्या में रोजगार सेवक पोस्टमार्टम के लिए ले जाए जा रहे शव को रोकने के लिए निकल पड़े। भीड़ के पीछे एसडीएम एवं पुलिस बल चल दिया। देर शाम बड़वार बांध पर एक बार फिर रोजगार सेवकों के बीच वार्ता का दौर चला, लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला। रोजगार सेवक मनरेगा का काम बंद करने की चेतावनी देकर चले गए। बाद में उन्होंने मऊरानीपुर पहुंचकर शव को रखकर जाम लगा दिया।
दिया जा चुका है मार्च तक का मानदेय
रोजगार सेवक के सुसाइड नोट में एक वर्ष से मानदेय न मिलने की बात लिखी है। इस संबंध में खंड विकास अधिकारी मुकेश पटेल से जानकारी ली गई, तो उन्होंने बताया कि मार्च 2016 तक का मानदेय दिया जा चुका है।
आरोप बेबुनियाद: डीसी
डीसी मनरेगा विकास मिश्रा ने सुसाइड नोट में लगाए गए रिश्वत मांगने के आरोप तथा एक वर्ष से मानदेय न दिए जाने की बात को खारिज करते हुए आरोपों को बेबुनियाद बताया है।
कार्रवाई न हुई तो नहीं करेंगे काम
ग्राम रोजगार सेवक संघ के जिलाध्यक्ष बरजोर सिंह यादव ने डीसी मनरेगा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि कार्रवाई न होने तक रोजगार सेवक काम नही करेंगे।
डीसी ने झांसी बुलाकर प्रताड़ित किया था : धनीराम
मऊरानीपुर पोस्टमार्टम हाउस पर मौजूद मृतक रोजगार सेवक के पिता धनीराम ने बताया कि पिछले एक वर्ष से मानदेय न मिल पाने की वजह से रविंद्र बेहद परेशान था। उन्होंने आरोप लगाया है कि घटना के एक दिन पहले उसे झाँसी बुलाया गया था और डीसी मनरेगा ने उसे दो घंटे तक कमरे में बंद करके प्रताड़ित किया था तथा उससे बीस हजार रुपये की माँग की थी। झाँसी से रात्रि के समय लौटने के बाद वह काफी विचलित नजर आया और उसने प्रात: 7 बजे खेत में लगे पेड़ पर लटक कर आत्महत्या कर ली। रोजगार सेवकों ने इस घटना के लिए डीसी मनरेगा सहित बामौर के वीडीओ को भी जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर चेतावनी दी है कि जब तक रोजगार सेवक की मौत के जिम्मेदार दोनों अधिकारी जेल नहीं भेजे जाते उनका आन्दोलन जारी रहेगा। मुख्य विकास अधिकारी के आदेश पर रात्रि मे ही पोस्टमार्टम हाउस पर रोशनी की व्यवस्था कर पोस्टमार्टम किया गया पोस्टमार्टम हाउस पर उपजिलाधिकारी सहित भारी पुलिस बल तैनात रहा ।
विज्ञापन
बामौर विकास खंड के ग्राम दुरखुरुग्राम पंचायत में 40 वर्षीय रविंद्र सिंह पुत्र धनीराम रोजगार सेवक के पद पर तैनात थे। बुधवार की सुबह वह घर से खेतों की ओर निकले तथा यहां पेड़ पर रस्सी बांधकर फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। कुछ देर बाद खेतों की ओर से निकले ग्रामीणों ने रविंद्र को फांसी पर लटका देखा तो उन्होंने परिजनों को सूचना दी तथा शव को पेड़ से उतारकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गरौठा ले गए, जहां चिकित्सकों ने गुरसराय ले जाने की बात कही। इसके बाद रविंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुरसरांय लाया गया, यहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद गरौठा पुलिस को सूचना दी गई। अस्पताल पहुँची पुलिस ने जब मृतक के जेबों की तलाशी ली तो सुसाइड नोट निकला।
विज्ञापन
नोट में मनरेगा के डीसी पर घूस माँगने एवं प्रताड़ित करने तथा एक वर्ष से मानदेय न मिलने की बात लिखी है। घूसखोरी व उत्पीड़न के चलते आत्महत्या को मजबूर होने की बात फैलते ही बामौर एवं गुरसराय ब्लॉक के अनेक रोजगार सेवक अस्पताल पहुंच गए तथा मनरेगा उपायुक्त के खिलाफ मामला दर्ज करवाने की मांग पर अड़ गए। तीन घंटे तक हंगामा चलता रहा। घटना की खबर मिलते ही खंड विकास अधिकारी बामौर मुकेश पटेल, गुरसराय के के पांडेय एवं गुरसराय तथा गरौठा पुलिस अस्पताल पहुंच गई। सभी ने मिलकर मामला शांत करवाकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। बाद में रोजगार सेवकों से बात करने पहुंचे उपजिलाधिकारी श्रीराम यादव के सामने एक बार फिर हंगामा होने लगा।
विज्ञापन
रोजगार सेवक संघ के जिलाध्यक्ष बरजोर सिंह यादव ने मामला दर्ज करवाने की मांग रखी। रोजगार सेवक संघ के जिलाध्यक्ष बरजोर सिंह यादव के साथ भारी संख्या में रोजगार सेवक पोस्टमार्टम के लिए ले जाए जा रहे शव को रोकने के लिए निकल पड़े। भीड़ के पीछे एसडीएम एवं पुलिस बल चल दिया। देर शाम बड़वार बांध पर एक बार फिर रोजगार सेवकों के बीच वार्ता का दौर चला, लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला। रोजगार सेवक मनरेगा का काम बंद करने की चेतावनी देकर चले गए। बाद में उन्होंने मऊरानीपुर पहुंचकर शव को रखकर जाम लगा दिया।
दिया जा चुका है मार्च तक का मानदेय
रोजगार सेवक के सुसाइड नोट में एक वर्ष से मानदेय न मिलने की बात लिखी है। इस संबंध में खंड विकास अधिकारी मुकेश पटेल से जानकारी ली गई, तो उन्होंने बताया कि मार्च 2016 तक का मानदेय दिया जा चुका है।
आरोप बेबुनियाद: डीसी
डीसी मनरेगा विकास मिश्रा ने सुसाइड नोट में लगाए गए रिश्वत मांगने के आरोप तथा एक वर्ष से मानदेय न दिए जाने की बात को खारिज करते हुए आरोपों को बेबुनियाद बताया है।
कार्रवाई न हुई तो नहीं करेंगे काम
ग्राम रोजगार सेवक संघ के जिलाध्यक्ष बरजोर सिंह यादव ने डीसी मनरेगा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि कार्रवाई न होने तक रोजगार सेवक काम नही करेंगे।
डीसी ने झांसी बुलाकर प्रताड़ित किया था : धनीराम
मऊरानीपुर पोस्टमार्टम हाउस पर मौजूद मृतक रोजगार सेवक के पिता धनीराम ने बताया कि पिछले एक वर्ष से मानदेय न मिल पाने की वजह से रविंद्र बेहद परेशान था। उन्होंने आरोप लगाया है कि घटना के एक दिन पहले उसे झाँसी बुलाया गया था और डीसी मनरेगा ने उसे दो घंटे तक कमरे में बंद करके प्रताड़ित किया था तथा उससे बीस हजार रुपये की माँग की थी। झाँसी से रात्रि के समय लौटने के बाद वह काफी विचलित नजर आया और उसने प्रात: 7 बजे खेत में लगे पेड़ पर लटक कर आत्महत्या कर ली। रोजगार सेवकों ने इस घटना के लिए डीसी मनरेगा सहित बामौर के वीडीओ को भी जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर चेतावनी दी है कि जब तक रोजगार सेवक की मौत के जिम्मेदार दोनों अधिकारी जेल नहीं भेजे जाते उनका आन्दोलन जारी रहेगा। मुख्य विकास अधिकारी के आदेश पर रात्रि मे ही पोस्टमार्टम हाउस पर रोशनी की व्यवस्था कर पोस्टमार्टम किया गया पोस्टमार्टम हाउस पर उपजिलाधिकारी सहित भारी पुलिस बल तैनात रहा ।