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लेखराज को दस वर्ष का सश्रम कारावास
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 21 May 2016 11:42 PM IST
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court disition, jhansi news
- फोटो : demo
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झांसी। पूर्व ब्लाक प्रमुख बंगरा लेखराज सिंह यादव व उनके तीन साथियों को गैंगेस्टर एक्ट के तहत विशेष न्यायाधीश शकील अहमद खां की अदालत ने दस वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही 50-50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा भी सुनाई गई है।
मऊरानीपुर थाना क्षेत्र के कस्बा रानीपुर निवासी लेखराज सिंह यादव, हरदेव सिंह, रामस्वरूप उर्फ चिंटू, जवाहर के खिलाफ मऊरानीपुर पुलिस द्वारा गिरोह बंद अधिनियम 2/3 के तहत आरोप पत्र गैंगेस्टर एक्ट कोर्ट में दाखिल किया गया था। आरोप पत्र में बताया गया था कि लेखराज व उसके साथी एक गिरोह बनाकर समाज विरोधी क्रियाकलापों में संलिप्त रहते हुए धनोपार्जन करते हैं और इनकी दहशत के कारण पीड़ित लोग शिकायत करने से भी कतराते हैं।
यह गिरोह अपने साथ लाइसेंसी व गैर लाइसेंसी हथियार लेकर लोगों को डराता धमकाता है और अवैध रुप से रुपयों की उगाही करता है। आरोप पत्र में बताया गया कि यह गिरोह गरीब किसानों के खेतों की फसलों को जबरन गुंडई के बल पर कटवा कर कब्जा कर लेता है।
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पूरे मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने उक्त चारों को गैंगेस्टर एक्ट के तहत दोषी करार देते हुए उन्हें 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। साथ ही चारों दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। अर्थदंड न देने की स्थिति में एक-एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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मऊरानीपुर थाना क्षेत्र के कस्बा रानीपुर निवासी लेखराज सिंह यादव, हरदेव सिंह, रामस्वरूप उर्फ चिंटू, जवाहर के खिलाफ मऊरानीपुर पुलिस द्वारा गिरोह बंद अधिनियम 2/3 के तहत आरोप पत्र गैंगेस्टर एक्ट कोर्ट में दाखिल किया गया था। आरोप पत्र में बताया गया था कि लेखराज व उसके साथी एक गिरोह बनाकर समाज विरोधी क्रियाकलापों में संलिप्त रहते हुए धनोपार्जन करते हैं और इनकी दहशत के कारण पीड़ित लोग शिकायत करने से भी कतराते हैं।
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यह गिरोह अपने साथ लाइसेंसी व गैर लाइसेंसी हथियार लेकर लोगों को डराता धमकाता है और अवैध रुप से रुपयों की उगाही करता है। आरोप पत्र में बताया गया कि यह गिरोह गरीब किसानों के खेतों की फसलों को जबरन गुंडई के बल पर कटवा कर कब्जा कर लेता है।
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पूरे मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने उक्त चारों को गैंगेस्टर एक्ट के तहत दोषी करार देते हुए उन्हें 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। साथ ही चारों दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। अर्थदंड न देने की स्थिति में एक-एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।