{"_id":"5b2ab0554f1c1bf76e8b93b5","slug":"farji-sim-ka-karowar","type":"story","status":"publish","title_hn":"फर्जी सिम का कारोबार, सुरक्षा से खिलवाड़","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
फर्जी सिम का कारोबार, सुरक्षा से खिलवाड़
amarujala
Updated Thu, 21 Jun 2018 01:21 AM IST
विज्ञापन
mobile, jhansi news
- फोटो : demo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
महानगर की दुकानों पर धड़ल्ले से फर्जी सिम बेची जा रही हैं। जो शहर के साथ-साथ राष्ट्र की सुरक्षा से बड़ा खिलवाड़ है। यह सिम बिना कागजात के लोगाें को दी जा रही हैं। पुलिस ऐसी सिम के कारोबार से चिंतित तो है, पर दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने से उनके हौसले बुलंद हैं।
मोटे मुनाफे के फेर में फर्जी सिम बेचने का कारोबार सुरक्षा व्यवस्था के लिए चुनौती बना हुआ है। जिले में बड़ी संख्या में लोगों के मोबाइल फोन में फर्जी सिमकार्ड चल रहे हैं। आपराधिक प्रवृत्ति के लोग दुकानदारों को लालच देकर बिना पहचान पत्र के के सिमकार्ड खरीद लेते हैं और घटनाओं को अंजाम देते हैं। घटना के बाद पुलिस जांच करती है तो फोन से संपर्क नहीं हो पाता है। इससे पुलिस अपराधियों तक नहीं पहुंच पाती है और घटनाओं का खुलासा नहीं हो पाता है। पिछले साल कोतवाली पुलिस व स्वाट टीम ने फर्जी सिम बेचने वाले गिरोह का खुलासा कर कई कंपनियों की सिम बरामद की थीं। इसके बाद भी अवैध कारोबार पर रोक नहीं लग सकी। अब तो गली से लेकर बाजार की दुकानें पर ऐसी सिम बेची जा रही हैं।
सूत्रों से पता चला है कि दूसरे व्यक्ति की फोटो और किसी भी पता के नाम से फर्जी कागजात के आधार पर डेमो सिम चालू की जाती है। इस डेमो से सैकड़ों की संख्या में फर्जी कागजात लगाकर सिम नंबर चालू किये जाते हैं, जो फुटकर दुकानदारों के माध्यम से बिना आईडी प्रूफ के बिकते रहते हैं। इसमें कौन सा व्यक्ति यह सिम चला रहा है, इसका कोई आधार नहीं होता है। फर्जी सिम से महिलाओं को परेशान करने के काम बड़ी तादात में हो रहे हैं। किसी को धमकी देना, आपराधिक गतिविधियां चलाना फर्जी सिम से बेहद आसान काम है।
विज्ञापन
25 की सिम 20 का बैलेंस
फर्जी सिम का व्यापार एक्टीवेशन में मिलने वाले कमीशन के लिए किया जाता है। एक विक्रेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कंपनी एजेंट से उन्हें 25 रुपये की सिम मिलती है, जिसमें 20 रुपये बैलेंस और दो महीने का टैरिफ होता है। ऐसी सिम में पहले से आईडी लगी होती है और यह सिम एक्टीवेट भी होती है। दुकानदार इस सिम को 50 रुपये से ज्यादा कीमत में बेचता है। बताते हैं कि सिम कार्ड की मूल कीमत उसकी एमआरपी यानि करीब 10 रुपये होती है। इसमें बैलेंस और टैरिफ बाउचर रिचार्ज किया जाता है। इसका कमीशन उस व्यक्ति को जाता है, जिसकी सिम से सिम एक्टीवेट होती है। बिना आईडी की सिम में डिस्ट्रीब्यूटर का कमीशन और फिर दुकानदार का मुनाफा जुड़ा होता है।
सिम खरीदतें समय बरतें यह सावधानी
जब अपनी सिम खरीदें तो अपनी ही आईडी लगाएं। कस्टमर केयर पर चेक कराएं कि वही आईडी लगाई गई है, जो आपने दी या नहीं। ऐसा न होने पर इसकी शिकायत पुलिस के पास कर सकते हैं। ऐसा होने पर पुलिस कार्रवाई करेगी।
यह हैं नियम
ट्राई के नियम के मुताबिक किसी भी उपभोक्ता को सिम खरीदने के लिए अपना पहचान पत्र देना जरूरी होता है। इसके लिए निर्वाचन पहचान पत्र, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, राशन कार्ड के साथ उपभोक्ता की फोटो अनिवार्य है, साथ ही सिम के एक्टीवेशन के बाद उसकी जांच करनी होती है।
होगी कड़ी कार्रवाई
अवैध कारोबार पर रोक लगाने के लिए पुलिस नजर रखेगी। जल्द ही बाजारोें में छापेमारी कर ऐसे अवैध कारोबारियों पर कड़ी कार्रवाई होगी, ताकि यह अवैध कारोबार पूरी तरह बंद हो जाए।
- सुभाष सिंह, डीआईजी
विज्ञापन
मोटे मुनाफे के फेर में फर्जी सिम बेचने का कारोबार सुरक्षा व्यवस्था के लिए चुनौती बना हुआ है। जिले में बड़ी संख्या में लोगों के मोबाइल फोन में फर्जी सिमकार्ड चल रहे हैं। आपराधिक प्रवृत्ति के लोग दुकानदारों को लालच देकर बिना पहचान पत्र के के सिमकार्ड खरीद लेते हैं और घटनाओं को अंजाम देते हैं। घटना के बाद पुलिस जांच करती है तो फोन से संपर्क नहीं हो पाता है। इससे पुलिस अपराधियों तक नहीं पहुंच पाती है और घटनाओं का खुलासा नहीं हो पाता है। पिछले साल कोतवाली पुलिस व स्वाट टीम ने फर्जी सिम बेचने वाले गिरोह का खुलासा कर कई कंपनियों की सिम बरामद की थीं। इसके बाद भी अवैध कारोबार पर रोक नहीं लग सकी। अब तो गली से लेकर बाजार की दुकानें पर ऐसी सिम बेची जा रही हैं।
विज्ञापन
सूत्रों से पता चला है कि दूसरे व्यक्ति की फोटो और किसी भी पता के नाम से फर्जी कागजात के आधार पर डेमो सिम चालू की जाती है। इस डेमो से सैकड़ों की संख्या में फर्जी कागजात लगाकर सिम नंबर चालू किये जाते हैं, जो फुटकर दुकानदारों के माध्यम से बिना आईडी प्रूफ के बिकते रहते हैं। इसमें कौन सा व्यक्ति यह सिम चला रहा है, इसका कोई आधार नहीं होता है। फर्जी सिम से महिलाओं को परेशान करने के काम बड़ी तादात में हो रहे हैं। किसी को धमकी देना, आपराधिक गतिविधियां चलाना फर्जी सिम से बेहद आसान काम है।
विज्ञापन
25 की सिम 20 का बैलेंस
फर्जी सिम का व्यापार एक्टीवेशन में मिलने वाले कमीशन के लिए किया जाता है। एक विक्रेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कंपनी एजेंट से उन्हें 25 रुपये की सिम मिलती है, जिसमें 20 रुपये बैलेंस और दो महीने का टैरिफ होता है। ऐसी सिम में पहले से आईडी लगी होती है और यह सिम एक्टीवेट भी होती है। दुकानदार इस सिम को 50 रुपये से ज्यादा कीमत में बेचता है। बताते हैं कि सिम कार्ड की मूल कीमत उसकी एमआरपी यानि करीब 10 रुपये होती है। इसमें बैलेंस और टैरिफ बाउचर रिचार्ज किया जाता है। इसका कमीशन उस व्यक्ति को जाता है, जिसकी सिम से सिम एक्टीवेट होती है। बिना आईडी की सिम में डिस्ट्रीब्यूटर का कमीशन और फिर दुकानदार का मुनाफा जुड़ा होता है।
सिम खरीदतें समय बरतें यह सावधानी
जब अपनी सिम खरीदें तो अपनी ही आईडी लगाएं। कस्टमर केयर पर चेक कराएं कि वही आईडी लगाई गई है, जो आपने दी या नहीं। ऐसा न होने पर इसकी शिकायत पुलिस के पास कर सकते हैं। ऐसा होने पर पुलिस कार्रवाई करेगी।
यह हैं नियम
ट्राई के नियम के मुताबिक किसी भी उपभोक्ता को सिम खरीदने के लिए अपना पहचान पत्र देना जरूरी होता है। इसके लिए निर्वाचन पहचान पत्र, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, राशन कार्ड के साथ उपभोक्ता की फोटो अनिवार्य है, साथ ही सिम के एक्टीवेशन के बाद उसकी जांच करनी होती है।
होगी कड़ी कार्रवाई
अवैध कारोबार पर रोक लगाने के लिए पुलिस नजर रखेगी। जल्द ही बाजारोें में छापेमारी कर ऐसे अवैध कारोबारियों पर कड़ी कार्रवाई होगी, ताकि यह अवैध कारोबार पूरी तरह बंद हो जाए।
- सुभाष सिंह, डीआईजी