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क्राइम- साइबर क्राइम की विवेचना में पुलिस पसीने-पसीने-City

Tue, 29 May 2018 01:49 AM IST
Updated Tue, 29 May 2018 01:49 AM IST
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क्राइम- साइबर क्राइम की विवेचना में पुलिस पसीने-पसीने-City
साइबर क्राइम का खेल, अपराधियों के आगे पुलिस फेल
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सब हेड: एक साल में 128 शिकायतें आईं, एक की भी गिरफ्तारी नहीं हो सकी
- थानों में विशेषज्ञों की कमी, 47 शिकायतें फेसबुक पर फेक आईडी बनाकर ब्लैकमेल करने की
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
साइबर जगत में अपराधियों की स्मार्टनेस के आगे पुलिस फिसड्डी साबित हो रही है। पिछले एक साल में पुलिस की साइबर सेल में 128 प्रार्थनापत्र आए, इनमें से 47 शिकायतें फेसबुक पर फेक आईडी बनाकर ब्लैकमेल करने के थे। एक भी मामले में पुलिस के हाथ अपराधियों के गिरेबां तक नहीं पहुंच सके। इसके पीछे पुलिस में साइबर विशेषज्ञों की कमी बताई जा रही है।
जिले में लगातार हो रहे साइबर क्राइम की गुत्थी सुलझाने में पुलिस की कमजोरी के पीछे मजबूत टीम न होना प्रमुख कारण माना जा रहा है। थानों पर साइबर एक्सपर्ट नहीं है, ऐसे में अधिकतर मामले थाने से साइबर सेल में ट्रांसफर कर दिए जाते हैं। साइबर सेल की जांच में काफी समय लग जाता है। इसकी वजह से विवेचनाएं लंबित हैं। पुलिस के साइबर सेल में एक प्रभारी और दो सिपाही हैं। साइबर सेल प्रभारी के पास क्राइम ब्रांच की भी जिम्मेदारी है। सेल में जो दो सिपाही हैं, उन्हें ट्रेनिंग तो दिलाई गई है, लेकिन वह साइबर मामलों के विशेषज्ञ नहीं है। यही वजह है कि शातिर अपराधी लोगों को अपना शिकार बना लेते हैं और पुलिस उन तक पहुंच ही नहीं पाती।
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हर माह आठ से दस मामले साइबर क्राइम के दर्ज हो रहे हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो एक साल में 128 शिकायतें साइबर सेल के पास पहुंची हैं, जिनमें 47 शिकायतें फेसबुक संबंधी हैं। इंटरनेट के माध्यम से ही लोगों को शिकार बनाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर वैमनस्यता फैलाने वाले पोस्ट डाले जा रहे हैं, लेकिन पुलिस इन पर लगाम कसने में नाकाम साबित हो रही है।
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कई तरह के आ चुके हैं मामले
थानों में एक्सपर्ट के न होने से पुलिस साइबर क्राइम पर नकेल कसने में हांफ रही है। कई थानों में आइटी एक्ट के तमाम मुकदमों की विवेचनाएं लंबित हैं। लंबित मामलों में एटीएम फ्राड, फेसबुक पर फेक आईडी बनाकर ब्लैकमेल करने की घटनाएं सर्वाधिक हैं। विवेचनाओं के पूरा न होने से साइबर शातिर घटनाएं कर रहे हैं।

केस-1
सदर बाजार इलाके में रहने वाले रंजीत को मोबाइल पर कॉल आई। जिसमें उनकी पत्नी ने कॉल रिसीव किया तो बदमाश ने बैंक अधिकारी बन अकाउंट नंबर, एटीएम नंबर और ओटीपी हासिल कर लिया। इसके बाद उसने 10 ट्रांजेक्शन कर खाते से हजारों रुपये निकाल लिए।

केस- 2
शिवाजी नगर में रहने वाली एक छात्रा की फेसबुक अकाउंट से फोटो निकालकर कर दूसरा अकाउंट बना लिया। इसके बाद उसकी कई फोटो भेजकर ब्लैकमेल किया गया। शिकायत के बाद फर्जी आईडी तो बंद हो गई, लेकिन आरोपियों पर कार्रवाई नहीं हो सकी।

केस- 3
कोतवाली इलाके में रहने वाले सलमान के मोबाइल पर फोन आया कि उनको कंपनी की इनामी योजना में फ्लैट निकला है, जिसकी कीमत 25 लाख रुपये है। लालच में आकर उन्होंने चार बार अलग-अलग खाते में 50 हजार रुपये जमा कर दिए। इसके बाद जब संपर्क किया तो मोबाइल बंद है, पुलिस से शिकायत के बाद जांच जारी है।

केस-4
सीपरी इलाके में रहने वाले छात्र अनिल के नाम पर कुछ लोगों ने सिम निकाल ली और उसका उपयोग भी किया गया। पता चलने पर उन्होंने सिम तो बंद कराई, लेकिन शिकायत के बाद आज तक सिम निकलवाने लोगों का पता नहीं चल सका।

ये घटनाएं प्रमुख
- एटीएम का पासवर्ड पूछकर बैंक अकाउंट से रुपए निकाल लेना
- फर्जी ईमेल आईडी बनाकर किसी के नाम का दुरुपयोग करना
- फेसबुक अकाउंट पर छेड़छाड़, अश्लील फोटो और वीडियो अपलोड करना
- ऑनलाइन शॉपिंग के जरिए ठगी करके ग्राहकों को चूना लगाना
- सोशल मीडिया में तस्वीर वायरल कर ब्लैकमेल करना व धमकी देना

इन धाराओं में केस
हैकिंग, डेटा चोरी समेत कई ऐसे मामलों में आईटी एक्ट के सेक्शन 66 और सेक्शन 43 के तहत केस दर्ज होता है, जबकि क्रेडिट और डेबिट की चोरी, क्लोनिंग, मोबाइल सिम कार्ड फर्जीवाड़ा और इससे जुड़े मामलों में आईपीसी की धाराओं में केस दर्ज किया जाता है। इन मामलों में आईपीसी के सेक्शन 463 और सेक्शन 471 में केस दर्ज किया जाता है।


कमी पूरी करेंगे
साइबर क्राइम के बढ़ते अपराध को देखते हुए समय-समय पर कार्यशाला के जरिए नई तकनीकों की जानकारी दी जा रही है। साइबर मामलों के निस्तारण के लिए स्पेशल टीम भी लगाई गई है। साथ ही थानों पर जरूरत पड़ने पर उनका भी सहयोग किया जाता है। साइबर सेल अधिकारियों के मार्गदर्शन में काम कर रही है। बड़ी सफलताएं भी सेल की मदद से मिली हैं। कुछ कमी हो सकती है उसे जल्द दूर कर लिया जाएगा।
विनोद कुमार सिंह, एसएसपी
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