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अब भी बंधुआ मजदूर कैद-City
Updated Mon, 30 Jul 2018 03:16 AM IST
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और भी हैं बंधुआ मजदूर
झांसी। बंधन से आजाद हुए दो मजदूरों जैसे कई और मजदूर हैं, जो गांवों में बंधुआ मजदूरी कर रहे हैं। लेकिन, इनके बारे में किसी को जानकारी नहीं है। यह मजदूर जिनकी कैद में हैं, वह इन पर निगरानी रखते हैं, इनके साथ मारपीट करते हैं, जिससे मजदूरों का कैद से मुक्त हो पाना मुश्किल है। दो मजदूर आजाद होने के बाद अब पुलिस ने गुपचुप तरीके से ऐसे गांवों की पड़ताल शुरू कर दी है।
थाना रक्सा के गांव शिवगढ़ मवई में इलाहाबाद के रामबाग निवासी शिवम सिंह और मध्य प्रदेश टीकमगढ़ के चकरपुर स्थित रातौली गांव निवासी बब्लू अहिरवार को बंधक बनाकर मजदूरी कराई जा रही थी। पुलिस के आने पर मजदूर ने भागकर सूचना दी और चंगुल से मुक्त हो गया।
जिले के कई गांव ऐसे हैं, जहां कुछ लोगों की अप्रत्यक्ष हुकूमत चलती है। इनके आगे न पुलिस और न कोई अफसर, कुछ नहीं बोलता है। इस कारण ऐसे लोगों के हौसले बुलंद हैं। थाना सीपरी बाजार, रक्सा, बबीना, मऊरानीपुर, टहरौली समेत अन्य थाना क्षेत्रों में बंधुआ मजदूरी कराने का सिलसिला लगातार चल रहा है। जिन लोगों के पास भैंसों का तबेला है, वहां पर बंधुआ मजदूर अधिक हैं। यदि कोई पूछता भी है तो यह कहकर गुमराह किया जाता है कि इसके माता- पिता नहीं हैं, रास्ते में भटक रहा था। इसलिए ले आए हैं। मजदूर की मजदूरी यह रहती है कि उसके साथ इतनी मारपीट होती है कि भय के कारण सच नहीं बोल पाता है।
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दोनों मजदूरों को मुक्त कराने के बाद जिले की पुलिस सतर्क हो गई है। पुलिस ने अंदरखाने इसकी पड़ताल शुरू कर दी है। इस संबंध में एसएसपी विनोद कुमार सिंह ने सभी थानेदारों को निर्देश दे दिए हैं।
कई गांवों में मजदूरी से तौबा
मध्य प्रदेश के दतिया, शिवपुरी, करैरा व टीकमगढ़ समेत आसपास के अन्य जिलों में गरीबी और बेकारी बहुत अधिक है, इसलिए दो जून की रोटी के लिए वहां के निवासी सुबह के समय मजदूरी करने निकल आते हैं। लेकिन, जिले के कुछ गांव ऐसे हैं, जहां यह मजदूरी करने के लिए जाने से कतराते हैं। क्योंकि, उन्हें गांवों के हालातों के बारे में पता है।
मऊरानीपुर से भी कराए थे मुक्त
वर्ष 2016 मेें पुलिस ने मऊरानीपुर क्षेत्र से भी मजदूरों को मुक्त कराया था। इन मजदूरों को बंधक बनाने के बाद कम मजदूरी पर एक बोरिंग करने वाली कंपनी काम करा रही थी। सूचना पर पुलिस ने सभी मजदूरों को मुक्त कराया था।
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झांसी। बंधन से आजाद हुए दो मजदूरों जैसे कई और मजदूर हैं, जो गांवों में बंधुआ मजदूरी कर रहे हैं। लेकिन, इनके बारे में किसी को जानकारी नहीं है। यह मजदूर जिनकी कैद में हैं, वह इन पर निगरानी रखते हैं, इनके साथ मारपीट करते हैं, जिससे मजदूरों का कैद से मुक्त हो पाना मुश्किल है। दो मजदूर आजाद होने के बाद अब पुलिस ने गुपचुप तरीके से ऐसे गांवों की पड़ताल शुरू कर दी है।
थाना रक्सा के गांव शिवगढ़ मवई में इलाहाबाद के रामबाग निवासी शिवम सिंह और मध्य प्रदेश टीकमगढ़ के चकरपुर स्थित रातौली गांव निवासी बब्लू अहिरवार को बंधक बनाकर मजदूरी कराई जा रही थी। पुलिस के आने पर मजदूर ने भागकर सूचना दी और चंगुल से मुक्त हो गया।
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जिले के कई गांव ऐसे हैं, जहां कुछ लोगों की अप्रत्यक्ष हुकूमत चलती है। इनके आगे न पुलिस और न कोई अफसर, कुछ नहीं बोलता है। इस कारण ऐसे लोगों के हौसले बुलंद हैं। थाना सीपरी बाजार, रक्सा, बबीना, मऊरानीपुर, टहरौली समेत अन्य थाना क्षेत्रों में बंधुआ मजदूरी कराने का सिलसिला लगातार चल रहा है। जिन लोगों के पास भैंसों का तबेला है, वहां पर बंधुआ मजदूर अधिक हैं। यदि कोई पूछता भी है तो यह कहकर गुमराह किया जाता है कि इसके माता- पिता नहीं हैं, रास्ते में भटक रहा था। इसलिए ले आए हैं। मजदूर की मजदूरी यह रहती है कि उसके साथ इतनी मारपीट होती है कि भय के कारण सच नहीं बोल पाता है।
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दोनों मजदूरों को मुक्त कराने के बाद जिले की पुलिस सतर्क हो गई है। पुलिस ने अंदरखाने इसकी पड़ताल शुरू कर दी है। इस संबंध में एसएसपी विनोद कुमार सिंह ने सभी थानेदारों को निर्देश दे दिए हैं।
कई गांवों में मजदूरी से तौबा
मध्य प्रदेश के दतिया, शिवपुरी, करैरा व टीकमगढ़ समेत आसपास के अन्य जिलों में गरीबी और बेकारी बहुत अधिक है, इसलिए दो जून की रोटी के लिए वहां के निवासी सुबह के समय मजदूरी करने निकल आते हैं। लेकिन, जिले के कुछ गांव ऐसे हैं, जहां यह मजदूरी करने के लिए जाने से कतराते हैं। क्योंकि, उन्हें गांवों के हालातों के बारे में पता है।
मऊरानीपुर से भी कराए थे मुक्त
वर्ष 2016 मेें पुलिस ने मऊरानीपुर क्षेत्र से भी मजदूरों को मुक्त कराया था। इन मजदूरों को बंधक बनाने के बाद कम मजदूरी पर एक बोरिंग करने वाली कंपनी काम करा रही थी। सूचना पर पुलिस ने सभी मजदूरों को मुक्त कराया था।