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क्राइम- महानगर की तीसरी आंख खराब-Dehat
Updated Fri, 03 Aug 2018 07:48 PM IST
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व्यवस्था की ‘आंख’ में लापरवाही का ‘मोतियाबिंद’
शहर के प्रमुख चौराहों पर लगे सीसीटीवी कैमरे खराब, बेकाबू अपराध
पैसों की कमी के कारण नहीं हो पा रहा इनका रखरखाव
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। शहर की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए पुलिस ने प्रमुख चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे तो लगवाए हैं, लेकिन पैसे की कमी के कारण रखरखाव नहीं करा सकी। नतीजा, सभी कैमरे खराब हैं। इस कारण कैमरे के सामने वारदात होने के बाद भी पुलिस के हाथ अपराधियों के गिरेबां तक नहीं पहुंच पाते हैं। इन सीसीटीवी कैमरों को दुरुस्त कराने के लिए पुलिस को अब शासन से बजट मिलने का इंतजार है।
शहर में बढ़ते अपराधों पर काबू पाने के लिए पुलिस प्रशासन ने 2013-14 में प्रमुख चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए थे, ताकि इसकी मदद से घटना को अंजाम देकर फरार हो रहे अपराधियों को पकड़ा जा सके और उन पर कार्रवाई की जा सके। चौराहों पर लगे सीसीटीवी कुछ साल तक पुलिस की तीसरी आंख बनकर सक्रिय रहे, लेकिन समय के साथ-साथ इनमें खराबी आने लगी, जो समय रहते ठीक नहीं हो पाई। इसकी वजह से ये खराब हो गए। लिहाजा अब पुलिस की तीसरी आंख कई जगहों पर बंद है, क्योंकि साल मेें एक बार मेंटिनेंस के लिए रुपये आते हैं। बजट न आने के कारण मेंटिनेंस न होने के कारण कैमरे खराब हो गए हैं। बंद सीसीटीवी पुलिस विभाग के लिए सिरदर्द बन गए हैं, क्योंकि खराब कैमरों की वजह से पुलिस अपराधियों को पकड़ नहीं पा रही है। इसका फायदा उठाकर अपराधी खुलेआम घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं और पुलिस सिर्फ लकीर पीटती नजर आ रही है।
यहां लगे हैं
महानगर के इलाइट चौराहे, चित्रा चौराहे, जेल चौराहे, बीकेडी चौराहे, जीवनशाह तिराहे, कचहरी चौराहे पर पुलिस के एक-एक कैमरे व अन्य संस्थाओं से भी कैमरे लगवाए थे, जो वर्तमान में खराब पड़े हुए हैं। कैमरों का सही तरीके से रखरखाव भी नहीं हो पा रहा है। गर्मी, बरसात व सर्दी में भी कोई रखरखाव के इंतजाम नहीं हैं।
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आए दिन होती है चेन स्नेचिंग व छेड़खानी
मुख्य चौराहाें पर आए दिन चेन स्नेचिंग से लेकर छेड़खानी की वारदातें होती रहती हैं, लेकिन सीसीटीवी कैमरे खराब होेने के कारण पुलिस आरोपियों तक नहीं पहुंच पाती है और मामले दर्ज न करने अपनी लाज बचाती है।
बनाकर भेजा है बजट
सीसीटीवी कैमरे खराब पड़े हुए हैं, जिनका बजट बनाकर भेजा गया है। इसी माह बजट आने के बाद जल्द कैमरों को सही करा दिया जाएगा। मुख्य चौराहों पर स्थित दुकानों, शोरूमों, घरों व होटलाें के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों से पुलिस को खासी मदद मिलती है।
विनोद कुमार सिंह, एसएसपी
केस एक
मिल सकता था हमले का सुबूत
21 जुलाई को कचहरी चौराहे के पास बदमाशों ने कारोबारी संजय वर्मा की गाड़ी पर फायरिंग की और भाग निकले। इस घटना में एक की मौत हो गई थी, जबकि तीन लोग घायल हो गए थे। यहां भी सीसीटीवी कैमरा खराब होने के कारण पुलिस को सफलता नहीं मिल सकी थी। यदि कैमरे सही होते तो वारदात के सुबूत पुलिस के पास होते। हालांकि , पुलिस ने एक आरोपी दबोच लिया है।
केस दो
लुटेरे अब भी बेसुराग
21 अप्रैल को थाना नवाबाद थाना इलाके में सुकुवा-ढुकुवा कॉलोनी गेट पर बाइक सवार तीन बदमाश बिजली विभाग के कैशियर रामविशाल पर डंडे से हमला कर उनका बैग लूट ले गए थे। बैग में सीपरी बाजार बिजली काउंटर का 3 लाख 14 हजार 250 रुपये और 19 हजार 297 रुपये के चेक भी रखे थे। यहां कैमरे लगे थे, लेकिन खराब होने के कारण उसमें बदमाश कैद नहीं हो सके।
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व्यवस्था की ‘आंख’ में लापरवाही का ‘मोतियाबिंद’
शहर के प्रमुख चौराहों पर लगे सीसीटीवी कैमरे खराब, बेकाबू अपराध
पैसों की कमी के कारण नहीं हो पा रहा इनका रखरखाव
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। शहर की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए पुलिस ने प्रमुख चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे तो लगवाए हैं, लेकिन पैसे की कमी के कारण रखरखाव नहीं करा सकी। नतीजा, सभी कैमरे खराब हैं। इस कारण कैमरे के सामने वारदात होने के बाद भी पुलिस के हाथ अपराधियों के गिरेबां तक नहीं पहुंच पाते हैं। इन सीसीटीवी कैमरों को दुरुस्त कराने के लिए पुलिस को अब शासन से बजट मिलने का इंतजार है।
शहर में बढ़ते अपराधों पर काबू पाने के लिए पुलिस प्रशासन ने 2013-14 में प्रमुख चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए थे, ताकि इसकी मदद से घटना को अंजाम देकर फरार हो रहे अपराधियों को पकड़ा जा सके और उन पर कार्रवाई की जा सके। चौराहों पर लगे सीसीटीवी कुछ साल तक पुलिस की तीसरी आंख बनकर सक्रिय रहे, लेकिन समय के साथ-साथ इनमें खराबी आने लगी, जो समय रहते ठीक नहीं हो पाई। इसकी वजह से ये खराब हो गए। लिहाजा अब पुलिस की तीसरी आंख कई जगहों पर बंद है, क्योंकि साल मेें एक बार मेंटिनेंस के लिए रुपये आते हैं। बजट न आने के कारण मेंटिनेंस न होने के कारण कैमरे खराब हो गए हैं। बंद सीसीटीवी पुलिस विभाग के लिए सिरदर्द बन गए हैं, क्योंकि खराब कैमरों की वजह से पुलिस अपराधियों को पकड़ नहीं पा रही है। इसका फायदा उठाकर अपराधी खुलेआम घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं और पुलिस सिर्फ लकीर पीटती नजर आ रही है।
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यहां लगे हैं
महानगर के इलाइट चौराहे, चित्रा चौराहे, जेल चौराहे, बीकेडी चौराहे, जीवनशाह तिराहे, कचहरी चौराहे पर पुलिस के एक-एक कैमरे व अन्य संस्थाओं से भी कैमरे लगवाए थे, जो वर्तमान में खराब पड़े हुए हैं। कैमरों का सही तरीके से रखरखाव भी नहीं हो पा रहा है। गर्मी, बरसात व सर्दी में भी कोई रखरखाव के इंतजाम नहीं हैं।
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आए दिन होती है चेन स्नेचिंग व छेड़खानी
मुख्य चौराहाें पर आए दिन चेन स्नेचिंग से लेकर छेड़खानी की वारदातें होती रहती हैं, लेकिन सीसीटीवी कैमरे खराब होेने के कारण पुलिस आरोपियों तक नहीं पहुंच पाती है और मामले दर्ज न करने अपनी लाज बचाती है।
बनाकर भेजा है बजट
सीसीटीवी कैमरे खराब पड़े हुए हैं, जिनका बजट बनाकर भेजा गया है। इसी माह बजट आने के बाद जल्द कैमरों को सही करा दिया जाएगा। मुख्य चौराहों पर स्थित दुकानों, शोरूमों, घरों व होटलाें के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों से पुलिस को खासी मदद मिलती है।
विनोद कुमार सिंह, एसएसपी
केस एक
मिल सकता था हमले का सुबूत
21 जुलाई को कचहरी चौराहे के पास बदमाशों ने कारोबारी संजय वर्मा की गाड़ी पर फायरिंग की और भाग निकले। इस घटना में एक की मौत हो गई थी, जबकि तीन लोग घायल हो गए थे। यहां भी सीसीटीवी कैमरा खराब होने के कारण पुलिस को सफलता नहीं मिल सकी थी। यदि कैमरे सही होते तो वारदात के सुबूत पुलिस के पास होते। हालांकि , पुलिस ने एक आरोपी दबोच लिया है।
केस दो
लुटेरे अब भी बेसुराग
21 अप्रैल को थाना नवाबाद थाना इलाके में सुकुवा-ढुकुवा कॉलोनी गेट पर बाइक सवार तीन बदमाश बिजली विभाग के कैशियर रामविशाल पर डंडे से हमला कर उनका बैग लूट ले गए थे। बैग में सीपरी बाजार बिजली काउंटर का 3 लाख 14 हजार 250 रुपये और 19 हजार 297 रुपये के चेक भी रखे थे। यहां कैमरे लगे थे, लेकिन खराब होने के कारण उसमें बदमाश कैद नहीं हो सके।