{"_id":"599c592a4f1c1ba53c8b460d","slug":"11503418666-jhansi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"तीन तलाक-केस स्टडी-City","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
तीन तलाक-केस स्टडी-City
Updated Tue, 22 Aug 2017 09:47 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फोटो...
‘तलाक, तलाक, तलाक’... और बिखर गई मुमताज की जिंदगी
सब हेड... तीन लफ्जों के सहारे एक झटके में टूटा 14 साल का रिश्ता
क्रासर
- बच्चों से किया दूर, गुजारा भत्ता भी नहीं मिला, सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जगी इंसाफ की उम्मीद
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
चौदह साल का रिश्ता पति ने तलाक के तीन लफ्जों के सहारे एक झटके में तोड़ दिया। खुद को समाज का रहनुमा बताने वालों ने भी साथ नहीं दिया। लेकिन, मंगलवार को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले से अब इंसाफ मिलने की उम्मीद जग गई है, वरना जिंदगी तो नरक बन ही चुकी है। यह कहना है मुमताज का, जिसे उसका पति ठुकरा चुका है और वह बदहाली में एक-एक दिन बस किसी तरह से काट ही रही है।
आवास विकास कॉलोनी निवासी रहमत खां की पुत्री मुमताज (28) की शादी 2003 में शहर क्षेत्र में रहने वाले बंटी से हुई थी। मुमताज ने बताया कि शादी के बाद से ही उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाने लगा था। सबकुछ सहकर उसने जैसे-तैसे चौदह सालों का सफर तय कर लिया। इस दौरान तीन बच्चे भी हो गए। लेकिन, इसी साल मई में वह ससुराल में थी और उसके मायके में पति की ओर से नोटिस भेज दिया गया, जिसमें बताया कि तीन बार ‘तलाक, तलाक और तलाक’ कहने से मुमताज और उसके पति का रिश्ता टूट गया है। इसके बाद भी वह ससुराल में बनी रही और वह अपने रिश्ते को बचाना चाहती थी। इसके लिए उसने सारे जतन किए, लेकिन यहां उसे हर पल प्रताड़ित किया जाने लगा। थक हारकर वह चार साल की बेटी के साथ पिता के घर आ गई। वह पति को छोड़ना नहीं चाहती थी, इसके लिए उसने समाज के प्रभावशाली लोगों का दरवाजा खटखटाया, लेकिन सभी ओर से उसे निराशा ही मिली। मुमताज ने बताया कि सभी ने कहा कि तीन बार तलाक कहे जाने की वजह से अब वह पति के साथ नहीं रह सकती है। उसे किसी तरह का कोई गुजारा भत्ता भी नहीं दिया गया। बुजुर्ग पिता की माली हालत खस्ता है। लेकिन, मुमताज के पास पिता के पास रहने के अलावा और कोई चारा भी नहीं है।
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिए जाने से मुमताज बेहद खुश है। मुमताज का कहना है कि अब उसे न्याय मिलने की उम्मीद जग गई है। हालांकि, वह अपने रिश्ते को कायम रखना चाहती है, क्योंकि उसे अपने तीनों बच्चों का भविष्य भी संवारना है। उम्मीद है कि अब नये कानून के जरिये वह अपना रिश्ता बचा पाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
‘तलाक, तलाक, तलाक’... और बिखर गई मुमताज की जिंदगी
सब हेड... तीन लफ्जों के सहारे एक झटके में टूटा 14 साल का रिश्ता
क्रासर
- बच्चों से किया दूर, गुजारा भत्ता भी नहीं मिला, सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जगी इंसाफ की उम्मीद
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
चौदह साल का रिश्ता पति ने तलाक के तीन लफ्जों के सहारे एक झटके में तोड़ दिया। खुद को समाज का रहनुमा बताने वालों ने भी साथ नहीं दिया। लेकिन, मंगलवार को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले से अब इंसाफ मिलने की उम्मीद जग गई है, वरना जिंदगी तो नरक बन ही चुकी है। यह कहना है मुमताज का, जिसे उसका पति ठुकरा चुका है और वह बदहाली में एक-एक दिन बस किसी तरह से काट ही रही है।
आवास विकास कॉलोनी निवासी रहमत खां की पुत्री मुमताज (28) की शादी 2003 में शहर क्षेत्र में रहने वाले बंटी से हुई थी। मुमताज ने बताया कि शादी के बाद से ही उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाने लगा था। सबकुछ सहकर उसने जैसे-तैसे चौदह सालों का सफर तय कर लिया। इस दौरान तीन बच्चे भी हो गए। लेकिन, इसी साल मई में वह ससुराल में थी और उसके मायके में पति की ओर से नोटिस भेज दिया गया, जिसमें बताया कि तीन बार ‘तलाक, तलाक और तलाक’ कहने से मुमताज और उसके पति का रिश्ता टूट गया है। इसके बाद भी वह ससुराल में बनी रही और वह अपने रिश्ते को बचाना चाहती थी। इसके लिए उसने सारे जतन किए, लेकिन यहां उसे हर पल प्रताड़ित किया जाने लगा। थक हारकर वह चार साल की बेटी के साथ पिता के घर आ गई। वह पति को छोड़ना नहीं चाहती थी, इसके लिए उसने समाज के प्रभावशाली लोगों का दरवाजा खटखटाया, लेकिन सभी ओर से उसे निराशा ही मिली। मुमताज ने बताया कि सभी ने कहा कि तीन बार तलाक कहे जाने की वजह से अब वह पति के साथ नहीं रह सकती है। उसे किसी तरह का कोई गुजारा भत्ता भी नहीं दिया गया। बुजुर्ग पिता की माली हालत खस्ता है। लेकिन, मुमताज के पास पिता के पास रहने के अलावा और कोई चारा भी नहीं है।
विज्ञापन
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिए जाने से मुमताज बेहद खुश है। मुमताज का कहना है कि अब उसे न्याय मिलने की उम्मीद जग गई है। हालांकि, वह अपने रिश्ते को कायम रखना चाहती है, क्योंकि उसे अपने तीनों बच्चों का भविष्य भी संवारना है। उम्मीद है कि अब नये कानून के जरिये वह अपना रिश्ता बचा पाएगी।
विज्ञापन