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गोबर के पेंट से चमकेंगी घरों की दीवारें: स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने किया तैयार, कीमत 200 रुपये प्रति लीटर
Sun, 12 Oct 2025 09:53 PM IST
दीपक महाजन
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Sun, 12 Oct 2025 09:53 PM IST
सार
गोवंश से तैयार पेंट की यह भी खासियत है कि इसमें एंटी बैक्टीरियल और एंटी फंगल गुण होते हैं। इस प्रक्रिया में गोबर को पानी में मिलाकर कुछ घंटे रखा जाता है फिर उसे पिसकर और गर्म करके एक विशेष रसायन के साथ मिलाया जाता है।
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गोबर से पेंट तैयार करती महिलाएं
- फोटो : संवाद
विस्तार
इस दीपावली के लिए स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने विशेष रूप से गोबर का पेंट तैयार किया है। इस खास तरह के पेंट से लोग अब घरों की दीवारों को चमका सकेंगे। इसकी खासियत यह है कि हर साल दीवारों को रंगने की जरूरत नहीं होगी क्योंकि यह पेंट पांच साल तक टिका रहेगा।
चिरगांव के ग्राम गुलारा में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) की मदद से स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने गोबर से पेंट बनाने के लिए आवेदन किया था। इसे स्वीकृत किया गया और वहां पर पेंट बनाने के लिए आधुनिक मशीनें लगा दी गईं। इस प्लांट में चिरगांव स्थित गोशाला से प्रतिदिन गोबर लाया जाता है। इसका शोधन करने के बाद मशीन में डालकर पेंट तैयार किया जाता है। इसके बाद डिब्बों में भरा जाता है।
कीमत 200 रुपये प्रति लीटर
एनआरएलएम के उपायुक्त बीआर अंबेड ने बताया कि 28 अगस्त को इस प्लांट को पूरी तरीके से तैयार करने के बाद स्वयं सहायता समूह के हवाले कर दिया गया था। तब से महिलाएं गोबर से पेंट बना रही हैं। दीपावली नजदीक होने पर प्लांट में काम तेज कर दिया गया है। महिलाओं के अनुसार, अब तक 250 लीटर पेंट तैयार किया है। बाजार में इसकी कीमत 200 रुपये प्रति लीटर है।
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पेंट की खासियत
गोवंश से तैयार पेंट की यह भी खासियत है कि इसमें एंटी बैक्टीरियल और एंटी फंगल गुण होते हैं। इस प्रक्रिया में गोबर को पानी में मिलाकर कुछ घंटे रखा जाता है फिर उसे पिसकर और गर्म करके एक विशेष रसायन के साथ मिलाया जाता है। इससे पुट्टी और पेंट बनता है। ये पेंट सिंथेटिक पेंट के हानिकारक रसायनों का एक अच्छा विकल्प है और घरों को ठंडा रखने में भी मदद करता है।
बिजली कटौती बन रही बाधा
समूह से जुड़ी महिला शबाना बानो ने बताया कि बिजली कटौती के कारण उत्पादन बहुत ही कम हो रहा है। वहीं, कभी-कभार लो वोल्टेज की भी समस्या है। यहां सोलर प्लांट लगा तो है लेकिन उतनी क्षमता का नहीं है कि मशीनों को संचालित किया जा सके। इस संबंध में विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया गया है। इसके बावजूद, यहां 12-16 घंटे की बिजली कटौती की जा रही है।
सफलता की कहानी महिलाओं की जुबानी
पुष्पा देवी ने बताया कि गाय के गोबर को पहले पानी मिलाकर 45 मिनट तक फेटा जाता है। इसके बाद इसे तेज आंच पर पकाया जाता है। फिर इसमें सोडा और प्रॉक्साइड मिलकर 12 घंटे के लिए छोड़ दिया जाता है। इसके बाद गोबर के ठंडा होने के बाद इससे लिक्विड और ठोस को अलग किया जाता है। - पुष्पा देवी
दमयंती का कहना है कि गोबर को पानी के साथ मिलाकर पतला किया जाता है, फिर इसे ट्रिपल डिस्क रिफाइनरी में पीसकर चिकना किया जाता है। इसके बाद, कैल्शियम जैसे घटक मिलाकर पेंट का बेस बनाया जाता है। इसमें लगभग 30 प्रतिशत गोबर होता है। प्राकृतिक रंग मिलाकर रंगीन और ऑर्गेनिक पेंट तैयार किया जाता है।
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चिरगांव के ग्राम गुलारा में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) की मदद से स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने गोबर से पेंट बनाने के लिए आवेदन किया था। इसे स्वीकृत किया गया और वहां पर पेंट बनाने के लिए आधुनिक मशीनें लगा दी गईं। इस प्लांट में चिरगांव स्थित गोशाला से प्रतिदिन गोबर लाया जाता है। इसका शोधन करने के बाद मशीन में डालकर पेंट तैयार किया जाता है। इसके बाद डिब्बों में भरा जाता है।
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कीमत 200 रुपये प्रति लीटर
एनआरएलएम के उपायुक्त बीआर अंबेड ने बताया कि 28 अगस्त को इस प्लांट को पूरी तरीके से तैयार करने के बाद स्वयं सहायता समूह के हवाले कर दिया गया था। तब से महिलाएं गोबर से पेंट बना रही हैं। दीपावली नजदीक होने पर प्लांट में काम तेज कर दिया गया है। महिलाओं के अनुसार, अब तक 250 लीटर पेंट तैयार किया है। बाजार में इसकी कीमत 200 रुपये प्रति लीटर है।
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पेंट की खासियत
गोवंश से तैयार पेंट की यह भी खासियत है कि इसमें एंटी बैक्टीरियल और एंटी फंगल गुण होते हैं। इस प्रक्रिया में गोबर को पानी में मिलाकर कुछ घंटे रखा जाता है फिर उसे पिसकर और गर्म करके एक विशेष रसायन के साथ मिलाया जाता है। इससे पुट्टी और पेंट बनता है। ये पेंट सिंथेटिक पेंट के हानिकारक रसायनों का एक अच्छा विकल्प है और घरों को ठंडा रखने में भी मदद करता है।
बिजली कटौती बन रही बाधा
समूह से जुड़ी महिला शबाना बानो ने बताया कि बिजली कटौती के कारण उत्पादन बहुत ही कम हो रहा है। वहीं, कभी-कभार लो वोल्टेज की भी समस्या है। यहां सोलर प्लांट लगा तो है लेकिन उतनी क्षमता का नहीं है कि मशीनों को संचालित किया जा सके। इस संबंध में विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया गया है। इसके बावजूद, यहां 12-16 घंटे की बिजली कटौती की जा रही है।
सफलता की कहानी महिलाओं की जुबानी
पुष्पा देवी ने बताया कि गाय के गोबर को पहले पानी मिलाकर 45 मिनट तक फेटा जाता है। इसके बाद इसे तेज आंच पर पकाया जाता है। फिर इसमें सोडा और प्रॉक्साइड मिलकर 12 घंटे के लिए छोड़ दिया जाता है। इसके बाद गोबर के ठंडा होने के बाद इससे लिक्विड और ठोस को अलग किया जाता है। - पुष्पा देवी
दमयंती का कहना है कि गोबर को पानी के साथ मिलाकर पतला किया जाता है, फिर इसे ट्रिपल डिस्क रिफाइनरी में पीसकर चिकना किया जाता है। इसके बाद, कैल्शियम जैसे घटक मिलाकर पेंट का बेस बनाया जाता है। इसमें लगभग 30 प्रतिशत गोबर होता है। प्राकृतिक रंग मिलाकर रंगीन और ऑर्गेनिक पेंट तैयार किया जाता है।