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गबन के आरोपी पर मुकदमा दर्ज कराने से कांपते रहे अधिकारी
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झांसी। रोगी कल्याण समिति के पैसे में गबन करने के आरोपी जिला अस्पताल के कर्मचारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने में अधिकारियों के हाथ कांपते रहे। ये हाल तब है, जब सीधे निदेशक प्रशासन ने सीएमएस को मुकदमा दर्ज कराकर एफआईआर की नकल तत्काल महानिदेशालय भेजने के आदेश दिए हैं। आदेश मिलने के 24 घंटे बाद भी सीएमएस एफआईआर नहीं करा पाए।
जिला अस्पताल में तैनात कनिष्ठ सहायक दिनेश कुमार रायकवार के खिलाफ विभागीय जांच में रोगी कल्याण समिति का पैसा जमा करने में गड़बड़ी की पुष्टि हुई है। अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण ने एक अक्तूबर को जांच कर अपनी आख्या महानिदेशालय को सौंप दी थी। इसमें दिनेश के खिलाफ रोगी कल्याण समिति खाते में जमा की गई राशि दो लाख अड़तालिस हजार तीन सौ पच्चीस रुपये की भिन्नता पाई गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर निदेशक प्रशासन डॉ. राजागणपति आर ने इस भिन्नता को वित्तीय अनियमितता और गबन की श्रेणी में मानते हुए कनिष्ठ सहायक को कर दिया। निलंबन अवधि में सीएमओ पीलीभीत कार्यालय में संबद्ध रहने के आदेश जारी कर दिए। साथ ही प्रकरण की जांच के लिए सीडीओ अथवा उपाध्यक्ष जिला स्वास्थ्य समिति, अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को संयुक्त रूप से जांच अधिकारी नामित किया जाता है। प्रमुख अधीक्षक को पत्र लिखकर उन्होंने निर्देश दिए हैं कि कनिष्ठ सहायक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराते हुए एफआईआर की नकल तत्काल महानिदेशालय को उपलब्ध कराएं। इसके अलावा धनराशि की वसूली कर्मचारी के वेतन से हर महीने 50 प्रतिशत की जाए। ये आदेश बुधवार की शाम को सीएमएस को मिल गया था मगर बृहस्पतिवार तक वह मुकदमा दर्ज नहीं करा पाए। इससे अस्पताल में तमाम तरह की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है।
मामले की पूरी जानकारी कर रहा हूं। कर्मचारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज होगी। इसके लिए नोडल अधिकारी डॉ. गोकुल प्रसाद को पत्र बनाने के निर्देश दे दिए हैं। - डॉ. केके गुप्ता, सीएमएस, जिला अस्पताल।
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जिला अस्पताल में तैनात कनिष्ठ सहायक दिनेश कुमार रायकवार के खिलाफ विभागीय जांच में रोगी कल्याण समिति का पैसा जमा करने में गड़बड़ी की पुष्टि हुई है। अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण ने एक अक्तूबर को जांच कर अपनी आख्या महानिदेशालय को सौंप दी थी। इसमें दिनेश के खिलाफ रोगी कल्याण समिति खाते में जमा की गई राशि दो लाख अड़तालिस हजार तीन सौ पच्चीस रुपये की भिन्नता पाई गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर निदेशक प्रशासन डॉ. राजागणपति आर ने इस भिन्नता को वित्तीय अनियमितता और गबन की श्रेणी में मानते हुए कनिष्ठ सहायक को कर दिया। निलंबन अवधि में सीएमओ पीलीभीत कार्यालय में संबद्ध रहने के आदेश जारी कर दिए। साथ ही प्रकरण की जांच के लिए सीडीओ अथवा उपाध्यक्ष जिला स्वास्थ्य समिति, अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को संयुक्त रूप से जांच अधिकारी नामित किया जाता है। प्रमुख अधीक्षक को पत्र लिखकर उन्होंने निर्देश दिए हैं कि कनिष्ठ सहायक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराते हुए एफआईआर की नकल तत्काल महानिदेशालय को उपलब्ध कराएं। इसके अलावा धनराशि की वसूली कर्मचारी के वेतन से हर महीने 50 प्रतिशत की जाए। ये आदेश बुधवार की शाम को सीएमएस को मिल गया था मगर बृहस्पतिवार तक वह मुकदमा दर्ज नहीं करा पाए। इससे अस्पताल में तमाम तरह की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है।
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मामले की पूरी जानकारी कर रहा हूं। कर्मचारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज होगी। इसके लिए नोडल अधिकारी डॉ. गोकुल प्रसाद को पत्र बनाने के निर्देश दे दिए हैं। - डॉ. केके गुप्ता, सीएमएस, जिला अस्पताल।
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