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जलसंस्थान में भ्रष्टाचार पर लगी लगाम, 20 करोड़ के फायदे में आया
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झांसी। जलसंस्थान में सालों से चल रहे भ्रष्टाचार का खेल पर लगाम लगी है। मंडलायुक्त की सख्ती के बाद मोटर की मरम्मत और ब्लीचिंग पाउडर की दरों में 47 फीसदी कमी आई है। इसके चलते जलसंस्थान को करीब 20 करोड़ रुपये का फायदा हुआ है।
जल संस्थान में टेंडर प्रक्रिया में भी कमीशनबाजी के खेल की वजह से सालों से ठेकेदारों और अधिकारियों द्वारा विभाग को करोड़ों का चूना लगाया जा रहा है। मंडलायुक्त झांसी डॉ. अजय शंकर पांडेय ने विवादाें से घिरे जलसंस्थान की कार्यप्रणाली को सुधारने की पहल की। मंडलायुक्त ने जलसंस्थान को स्पष्ट निर्देश दे रखे थे कि भविष्य में जो भी निविदाएं जलसंस्थान द्वारा आमंत्रित की जाएं। उसमें खुली प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित किया जाए।
मंडलायुक्त की सख्त पारदर्शिता की वजह से मोटर मरम्मत की निविदा की दरों में लगभग 26 से 47 फीसदी की कमी आई है। झांसी डिवीजन जलसंस्थान द्वारा तीनों जनपद झांसी, ललितपुर और उरई में मोटर पंपों की मरम्मत के लिए टेंडर निकाले गए थे। इससे जलसंस्थान को 10 से 12 लाख रुपये की बचत होगी।
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इसके साथ ही पहले जलसंस्थान में ठेकेदारों की देनदारी 24 करोड़ की थी। मंडलायुक्त ने जब बिल मांगे तो ठेकेदार बिल ही नहीं दे सके। इससे जल संस्थान को 19 करोड़ का चूना लगने से बच गया। वहीं, सबसे बड़ी कार्रवाई में ब्लीचिंग पाउडर खरीद का मामला सामने आया है। जिस पर तत्कालीन महाप्रबंधक को निर्देश देकर अधिक ब्लीचिंग पाउडर खरीद का आदेश निरस्त करवाया। साथ ही टेंडर निकलवाने के निर्देश दिए। इसमें लगभग पिछले साल के मुताबिक 7000 रुपये मीट्रिक टन के हिसाब से लाभ हुआ है। जिससे तकरीबन 21 लाख का लाभ होगा। जो प्रदेश में सबसे कम है।
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जल संस्थान में टेंडर प्रक्रिया में भी कमीशनबाजी के खेल की वजह से सालों से ठेकेदारों और अधिकारियों द्वारा विभाग को करोड़ों का चूना लगाया जा रहा है। मंडलायुक्त झांसी डॉ. अजय शंकर पांडेय ने विवादाें से घिरे जलसंस्थान की कार्यप्रणाली को सुधारने की पहल की। मंडलायुक्त ने जलसंस्थान को स्पष्ट निर्देश दे रखे थे कि भविष्य में जो भी निविदाएं जलसंस्थान द्वारा आमंत्रित की जाएं। उसमें खुली प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित किया जाए।
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मंडलायुक्त की सख्त पारदर्शिता की वजह से मोटर मरम्मत की निविदा की दरों में लगभग 26 से 47 फीसदी की कमी आई है। झांसी डिवीजन जलसंस्थान द्वारा तीनों जनपद झांसी, ललितपुर और उरई में मोटर पंपों की मरम्मत के लिए टेंडर निकाले गए थे। इससे जलसंस्थान को 10 से 12 लाख रुपये की बचत होगी।
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इसके साथ ही पहले जलसंस्थान में ठेकेदारों की देनदारी 24 करोड़ की थी। मंडलायुक्त ने जब बिल मांगे तो ठेकेदार बिल ही नहीं दे सके। इससे जल संस्थान को 19 करोड़ का चूना लगने से बच गया। वहीं, सबसे बड़ी कार्रवाई में ब्लीचिंग पाउडर खरीद का मामला सामने आया है। जिस पर तत्कालीन महाप्रबंधक को निर्देश देकर अधिक ब्लीचिंग पाउडर खरीद का आदेश निरस्त करवाया। साथ ही टेंडर निकलवाने के निर्देश दिए। इसमें लगभग पिछले साल के मुताबिक 7000 रुपये मीट्रिक टन के हिसाब से लाभ हुआ है। जिससे तकरीबन 21 लाख का लाभ होगा। जो प्रदेश में सबसे कम है।