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सुरक्षा एजेंसी को लाखों रुपये का भुगतान करने में फंसे निगम अफसर

Sat, 03 Jul 2021 01:33 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 03 Jul 2021 01:33 AM IST
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corporation officers trapped in paying lakhs of rupees to security egency
झांसी। नगर निगम में सुरक्षाकर्मियों को तैनात करने वाली एजेंसी को हर माह लाखों रुपये के अनियमित भुगतान करने को लेकर निगम अफसर फंस गए हैं। नगर निगम के लेखा विभाग ने इस भुगतान को वित्तीय नियमों के विपरीत करार देते हुए अगले सभी भुगतानों पर रोक लगा दी। पड़ताल में मालूम चला कि चार दर्जन से अधिक कर्मचारियों के नाम दो-दो भुगतान किए गए। लेखा विभाग की आपत्ति से निगम प्रशासन में खलबली मची हुई है।
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नगर निगम मुख्य इमारत समेत विभिन्न पार्कों में सुरक्षा व्यवस्था के लिए करीब 380 सुरक्षाकर्मी लगाए गए हैं। यह सुरक्षाकर्मी एक निजी एजेंसी के मार्फत लगाए गए। हर माह इस मद में 60-65 लाख रुपये का भुगतान होता है लेकिन, जब बिल-वाउचर की पड़ताल हुई तब कई अनियमितताएं पकड़ में आईं।
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शासन ने गड़बड़ी रोकने की खातिर नकद भुगतान पर काफी पहले से पूरी तरह रोक लगाई हुई है लेकिन, अभी अस्सी फीसदी सुरक्षाकर्मियों को नकद भुगतान किया जा रहा है। कागजी खानापूर्ति के लिए कुछ कर्मचारियों के खाते में पैसा भेजा जा रहा। इनमें 50 कर्मचारी ऐसे मिले जिनके नाम नकद भुगतान के साथ ही बैंक खातों में शामिल थे। इन सुरक्षाकर्मियों के नाम से 11 से 15 हजार रुपये निकाले जा रहे थे लेकिन, उनको भुगतान सिर्फ 6 से 9 हजार रुपये के बीच किया जा रहा था। इसी तरह एजेंसी नगर निगम से कर्मचारियों के ईपीएफ (कर्मचारी भविष्य निधि) के नाम पर भी पैसे वसूल कर रही थी लेकिन, यह पैसा भी कर्मचारियों के खाते में जमा था। ईपीएफ के नाम पर लाखों रुपये की कटौती का भी कोई हिसाब नहीं मिला। इन सबके बावजूद एजेंसी पर मेहरबान अफसर लगातार भुगतान करते रहे।
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पिछले महीने जब भुगतान की फाइल लेखा विभाग में पहुंची तब ऐसी तमाम गड़बड़ियां मिलने पर जून के भुगतान पर रोक लगा दी गई। भुगतान पर आपत्ति दर्ज कराते हुए लेखा विभाग ने सुरक्षाकर्मियों की भारी संख्या के औचित्य पर भी सवाल खड़े किए। कहा, प्रयागराज, कानपुर, आगरा जैसे बड़े नगर निगमों के मुकाबले यहां जरूरत से अधिक कर्मचारी तैनात हैं। महापौर रामतीर्थ सिंघल का कहना है कि इस तरह का मामला अभी उनके संज्ञान में नहीं है। इस मामले पत्रावली तलब की जाएगी। वित्तीय अनियमितता मिलने पर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कराई जाएगी।
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