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विदेशों में भारतीय कर रहे लॉकडाउन का पालन, आप यहां कीजिए
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सुभाषगंज में लॉकडाउन में समाजिक दूरी बनाकर सामान खरीदते लोग।
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झांसी। कोरोना वायरस के संक्रमण से निपटने के लिए लॉकडाउन बड़ा हथियार साबित हो रहा है। विदेशी मुल्कों में रह रहे भारतीय वहां इसका पूरा पालन कर रहे हैं। स्थिति ये है कि एक महीने से घर के बाहर तक कदम नहीं रखा। वे भारत में रह रहे अपने परिजनों व अन्य सभी से भी यही उम्मीद रखे हुए हैं कि वे भी उनकी तरह घर में रहें, ताकि कोरोना की आपदा से निपटा जा सके।
सोशल डिस्टेंसिंग ही दिलाएगी कोरोना से जीत
महानगर के गोपाल नीखरा मुहल्ले के आशीष गुप्ता अमेरिका के वाशिंगटन में पिछले कई सालों से परिवार के साथ रह रहे हैं। उनके इलाके में तीस दिन का लॉकडाउन घोषित किया गया है, जो चार मई को पूरा होगा। आशीष ने बताया कि लॉकडाउन की घोषणा होने के बाद से ही वे अपने परिवार के साथ घर पर ही हैं। बाहर एक कदम भी नहीं रखा है। उनके आसपास रहने वाले सभी लोग भी ऐसा ही कर रहे हैं। लॉकडाउन का पूरी तरह से पालन कर सभी घर में बैठकर कोरोना से लड़ रहे हैं। आशीष ने बताया कि उन्होंने भारत में रहने वाले अपने परिजनों से भी कहा है कि वे लॉकडाउन का पूरी तरह से पालन करें। सोशल डिस्टेंसिंग के जरिये ही कोरोना को मात दी जा सकती है। कोरोना से बचने का यही सबसे बड़ा विकल्प है।
सरकार के निर्देशों का सभी कर रहे पालन
कचहरी चौराहा पर रहने वाले विष्णुकांत अग्रवाल के दो बेटे व तीन बेटियां हैं। इनमें बड़े बेटे पीयूष अग्रवाल पत्नी पारुल व बड़ी बेटी नीतू पति विनय के साथ अमेरिका के कैलिफोर्निया में रहते हैं। उनके छोटे पुत्र पराग पत्नी महिमा और दो बेटियों के साथ लंदन में रहते हैं। अमर उजाला को पीयूष ने फोन पर बताया कि कैलिफोर्निया में एक महीने पहले से लॉकडाउन है। पापा ने भारत आने के लिए कहा था, लेकिन मैंने बताया कि आने- जाने में ही सबसे ज्यादा खतरा है। यहां कोई भी घर से बाहर नहीं निकल रहा है। जरूरी सामान भी ऑनलाइन मंगा रहे हैं। यहां के सभी नागरिक अमेरिकी सरकार के सभी दिशा निर्देशों का पालन कर रहे हैं। इसी तरह लंदन में रहने वाले पराग अग्रवाल ने बताया कि उनके यहां चार हफ्तों से लॉकडाउन है। कुछ दिन और लॉकडाउन खुलने की कोई संभावना नहीं है। वे बेटियों के साथ घर पर ही रहते हैं। बाहर की बनी कोई खाने की वस्तु नहीं मंगा रहे हैं। घर रहकर बेहद सात्विक खाना खा रहे हैं।
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सोशल डिस्टेंसिंग ही दिलाएगी कोरोना से जीत
महानगर के गोपाल नीखरा मुहल्ले के आशीष गुप्ता अमेरिका के वाशिंगटन में पिछले कई सालों से परिवार के साथ रह रहे हैं। उनके इलाके में तीस दिन का लॉकडाउन घोषित किया गया है, जो चार मई को पूरा होगा। आशीष ने बताया कि लॉकडाउन की घोषणा होने के बाद से ही वे अपने परिवार के साथ घर पर ही हैं। बाहर एक कदम भी नहीं रखा है। उनके आसपास रहने वाले सभी लोग भी ऐसा ही कर रहे हैं। लॉकडाउन का पूरी तरह से पालन कर सभी घर में बैठकर कोरोना से लड़ रहे हैं। आशीष ने बताया कि उन्होंने भारत में रहने वाले अपने परिजनों से भी कहा है कि वे लॉकडाउन का पूरी तरह से पालन करें। सोशल डिस्टेंसिंग के जरिये ही कोरोना को मात दी जा सकती है। कोरोना से बचने का यही सबसे बड़ा विकल्प है।
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सरकार के निर्देशों का सभी कर रहे पालन
कचहरी चौराहा पर रहने वाले विष्णुकांत अग्रवाल के दो बेटे व तीन बेटियां हैं। इनमें बड़े बेटे पीयूष अग्रवाल पत्नी पारुल व बड़ी बेटी नीतू पति विनय के साथ अमेरिका के कैलिफोर्निया में रहते हैं। उनके छोटे पुत्र पराग पत्नी महिमा और दो बेटियों के साथ लंदन में रहते हैं। अमर उजाला को पीयूष ने फोन पर बताया कि कैलिफोर्निया में एक महीने पहले से लॉकडाउन है। पापा ने भारत आने के लिए कहा था, लेकिन मैंने बताया कि आने- जाने में ही सबसे ज्यादा खतरा है। यहां कोई भी घर से बाहर नहीं निकल रहा है। जरूरी सामान भी ऑनलाइन मंगा रहे हैं। यहां के सभी नागरिक अमेरिकी सरकार के सभी दिशा निर्देशों का पालन कर रहे हैं। इसी तरह लंदन में रहने वाले पराग अग्रवाल ने बताया कि उनके यहां चार हफ्तों से लॉकडाउन है। कुछ दिन और लॉकडाउन खुलने की कोई संभावना नहीं है। वे बेटियों के साथ घर पर ही रहते हैं। बाहर की बनी कोई खाने की वस्तु नहीं मंगा रहे हैं। घर रहकर बेहद सात्विक खाना खा रहे हैं।

लंदन में रहने वाले पराग अग्रवाल, पत्नी महिमा व बेटियों के साथ। - फोटो : REPORTERS
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