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कोरोना संक्रमितों के शवों के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी भी उठा रही ‘खाकी’
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corona posative funeral by policemen
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झांसी। कानून व्यवस्था के मोर्चे पर डटकर खड़ी रहने वाली पुलिस अब सामाजिक सरोकारों की जिम्मेदारी का भी निर्वहन कर रही है। जी हां, कोरोना वायरस के संक्रमणकाल में तमाम रवायतें बदल चुकी हैं। यहां तक कि शवों के अंतिम संस्कार के लिए परिजन आगे नहीं आ पा रहे हैं। ऐसे में ये जिम्मेदारी भी पुलिस को उठानी पड़ रही है। अनजान शवों को पुलिस कर्मी मुखाग्नि दे रहे हैं।
जिले में कोरोना वायरस के संक्रमण के अब तक 244 मामले सामने आ चुके हैं और इनमें से 24 संक्रमितों की मौत भी हो चुकी है। हिंदू परंपरा के अनुसार मृत्यु उपरांत शव का अंतिम संस्कार मरने वाले के पुत्र, पिता, भाई या अन्य परिजनों के द्वारा किया जाता है। पत्नी और बेटी भी इस जिम्मेदारी को उठा रही हैं। लेकिन, मरने वालों में कई ऐसे भी रहे, जिनके परिजन उनका अंतिम संस्कार नहीं कर सके। हाल ही में अभी एक रेल कर्मचारी की मौत के बाद उसके परिजन अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाए थे। जबकि, इससे पहले एक सेवानिवृत्त शिक्षक के दाह संस्कार में भी उसके परिजन दाह संस्कार में शामिल नहीं हो सके थे। परिजनों के मना करने के बाद पुलिस को इस जिम्मेदारी का निर्वहन करना पड़ा। एंबुलेंस के जरिये शव को श्मशान घाट तक लाया गया। पुलिस कर्मचारियों ने चिता बनाई और विधिवत रूप से शव का अंतिम संस्कार किया। इसके अलावा भी किसी भी कोरोना संक्रमित की मौत के बाद अंतिम संस्कार में पुलिस और मेडिकल टीम को मौजूद रहना पड़ता है।
परिजनों के मना करने के बाद पुलिस अंतिम संस्कार करती है। मरने वाला व्यक्ति जिस थाना क्षेत्र का निवासी होता है, वहीं की पुलिस को इस जिम्मेदारी का निर्वहन करना पड़ता है। इसके अलावा भी किसी भी कोरोना संक्रमित की मौत पर पुलिस मुक्तिधाम में मौजूद रहती है। हालांकि, इस दरम्यान पूरी सावधानी बरती जा रही है।
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- संग्राम सिंह, क्षेत्राधिकारी (नगर)
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जिले में कोरोना वायरस के संक्रमण के अब तक 244 मामले सामने आ चुके हैं और इनमें से 24 संक्रमितों की मौत भी हो चुकी है। हिंदू परंपरा के अनुसार मृत्यु उपरांत शव का अंतिम संस्कार मरने वाले के पुत्र, पिता, भाई या अन्य परिजनों के द्वारा किया जाता है। पत्नी और बेटी भी इस जिम्मेदारी को उठा रही हैं। लेकिन, मरने वालों में कई ऐसे भी रहे, जिनके परिजन उनका अंतिम संस्कार नहीं कर सके। हाल ही में अभी एक रेल कर्मचारी की मौत के बाद उसके परिजन अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाए थे। जबकि, इससे पहले एक सेवानिवृत्त शिक्षक के दाह संस्कार में भी उसके परिजन दाह संस्कार में शामिल नहीं हो सके थे। परिजनों के मना करने के बाद पुलिस को इस जिम्मेदारी का निर्वहन करना पड़ा। एंबुलेंस के जरिये शव को श्मशान घाट तक लाया गया। पुलिस कर्मचारियों ने चिता बनाई और विधिवत रूप से शव का अंतिम संस्कार किया। इसके अलावा भी किसी भी कोरोना संक्रमित की मौत के बाद अंतिम संस्कार में पुलिस और मेडिकल टीम को मौजूद रहना पड़ता है।
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परिजनों के मना करने के बाद पुलिस अंतिम संस्कार करती है। मरने वाला व्यक्ति जिस थाना क्षेत्र का निवासी होता है, वहीं की पुलिस को इस जिम्मेदारी का निर्वहन करना पड़ता है। इसके अलावा भी किसी भी कोरोना संक्रमित की मौत पर पुलिस मुक्तिधाम में मौजूद रहती है। हालांकि, इस दरम्यान पूरी सावधानी बरती जा रही है।
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- संग्राम सिंह, क्षेत्राधिकारी (नगर)