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कोरोना ही नहीं, डेंगू मरीजों के लिए भी वरदान साबित होगी एफेरेसिस मशीन
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मेडिकल कॉलेज में एफेरेसिस मशीन आ गई है।
- फोटो : ???? ????
कोरोना ही नहीं, डेंगू मरीजों के लिए भी वरदान साबित होगी एफेरेसिस मशीन
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में प्लाज्मा दान करने के लिए आई एफेरेसिस मशीन बहुत काम की है। कोविड के दौर के बाद भी डेंगू के रोगियों के उपचार के लिए यह मशीन काम आएगी। इस मशीन के जरिए निकलने वाली प्लेटलेट्स छह यूनिट के बराबर होगी। इससे मरीज के स्वस्थ होने की रफ्तार बढ़ेगी।
मेडिकल कॉलेज में प्लाज्मा दान देने के लिए एफेरेसिस मशीन आ गई है। इस मशीन के जरिए कोरोना को मात दे चुके लोगों का प्लाज्मा निकाला जाएगा। फिर कोविड रोगियों की प्लाज्मा थेरेपी की जाएगी। मगर यह मशीन सिर्फ कोरोना के दौर तक ही काम नहीं आएगी, बल्कि डेंगू के रोगियों के इलाज में काफी मददगार साबित होगी। दरअसल, मेडिकल कॉलेज में मौजूद कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट से ब्लड के चार तत्व आरबीसी, डब्ल्यूबीसी, प्लाज्मा और प्लेटलेट्स निकलते हैं। जबकि, एफेरेसिस मशीन से सिर्फ प्लेटलेट्स ही अलग से निकाल सकते हैं। इसलिए एफेरेसिस मशीन से निकलने वाली एक प्लेटलेट्स कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट से निकाली जाने वाली छह प्लेटलेट्स के बराबर होगी। इसे सिंगल डोनर प्लेटलेट्स या जंबो बैग भी कहते हैं। इससे मरीज के स्वस्थ होने की रफ्तार भी तेज होगी।
ये है अंतर
- कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट से निकलने वाली प्लेटलेट्स रोगी के शरीर में पांच से दस हजार प्लेटलेट्स बढ़ाता है।
- एफेरेसिस मशीन से निकलने वाली प्लेटलेट्स 30 हजार से 60 हजार प्लेटलेट्स मरीज के शरीर में बढ़ाता है।
पैसे की काफी होगी बचत
बाहर से जंबो बैग लेने पर 12 से 20 हजार रुपये तक निजी ब्लड बैंक वसूलते हैं। मेडिकल कॉलेज में एफेरेसिस मशीन शुरू होने के बाद यदि शासन से बैग प्राप्त हो जाते हैं तो सरकारी अस्पताल में भर्ती मरीज को निशुल्क में जंबो बैग मिलेगा। यदि बैग नहीं मिलता है तो भी आधे से कम दामों में सिंगल डोनर प्लेटलेट्स प्राप्त हो सकेंगी।
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वर्जन..
कोरोना के बाद भी एफेरेसिस मशीन डेंगू रोगियों के उपचार में काफी मददगार साबित होगी। इस मशीन से निकलने वाली सिंगल डोनर प्लेटलेट्स कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट की छह यूनिट प्लेटलेट्स के बराबर होगी। इससे रोगी जल्द स्वस्थ हो सकेगा। - डॉ. मयंक सिंह, पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज।
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झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में प्लाज्मा दान करने के लिए आई एफेरेसिस मशीन बहुत काम की है। कोविड के दौर के बाद भी डेंगू के रोगियों के उपचार के लिए यह मशीन काम आएगी। इस मशीन के जरिए निकलने वाली प्लेटलेट्स छह यूनिट के बराबर होगी। इससे मरीज के स्वस्थ होने की रफ्तार बढ़ेगी।
मेडिकल कॉलेज में प्लाज्मा दान देने के लिए एफेरेसिस मशीन आ गई है। इस मशीन के जरिए कोरोना को मात दे चुके लोगों का प्लाज्मा निकाला जाएगा। फिर कोविड रोगियों की प्लाज्मा थेरेपी की जाएगी। मगर यह मशीन सिर्फ कोरोना के दौर तक ही काम नहीं आएगी, बल्कि डेंगू के रोगियों के इलाज में काफी मददगार साबित होगी। दरअसल, मेडिकल कॉलेज में मौजूद कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट से ब्लड के चार तत्व आरबीसी, डब्ल्यूबीसी, प्लाज्मा और प्लेटलेट्स निकलते हैं। जबकि, एफेरेसिस मशीन से सिर्फ प्लेटलेट्स ही अलग से निकाल सकते हैं। इसलिए एफेरेसिस मशीन से निकलने वाली एक प्लेटलेट्स कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट से निकाली जाने वाली छह प्लेटलेट्स के बराबर होगी। इसे सिंगल डोनर प्लेटलेट्स या जंबो बैग भी कहते हैं। इससे मरीज के स्वस्थ होने की रफ्तार भी तेज होगी।
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ये है अंतर
- कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट से निकलने वाली प्लेटलेट्स रोगी के शरीर में पांच से दस हजार प्लेटलेट्स बढ़ाता है।
- एफेरेसिस मशीन से निकलने वाली प्लेटलेट्स 30 हजार से 60 हजार प्लेटलेट्स मरीज के शरीर में बढ़ाता है।
पैसे की काफी होगी बचत
बाहर से जंबो बैग लेने पर 12 से 20 हजार रुपये तक निजी ब्लड बैंक वसूलते हैं। मेडिकल कॉलेज में एफेरेसिस मशीन शुरू होने के बाद यदि शासन से बैग प्राप्त हो जाते हैं तो सरकारी अस्पताल में भर्ती मरीज को निशुल्क में जंबो बैग मिलेगा। यदि बैग नहीं मिलता है तो भी आधे से कम दामों में सिंगल डोनर प्लेटलेट्स प्राप्त हो सकेंगी।
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कोरोना के बाद भी एफेरेसिस मशीन डेंगू रोगियों के उपचार में काफी मददगार साबित होगी। इस मशीन से निकलने वाली सिंगल डोनर प्लेटलेट्स कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट की छह यूनिट प्लेटलेट्स के बराबर होगी। इससे रोगी जल्द स्वस्थ हो सकेगा। - डॉ. मयंक सिंह, पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज।