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कोरोना का खौफ: चिकन से तौबा कर रहे शौकीन, 80 फीसदी गिरा कारोबार
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शहर के एक पॉल्ट्री फार्म में मुर्गे-मुर्गियां।
- फोटो : DEHAT
झांसी। दुनियाभर में कोरोना वायरस का कहर जमकर बरप रहा है। कोरोना के खौफ के चलते पॉल्ट्री उद्योग पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। संक्रमण से बचने के लिए लोग चिकन खाने से तौबा कर रहे हैं। ऐसे में चिकन कारोबारियों की चिंता बढ़ रही है। आलम यह है कि जिले में संचालित पॉल्ट्री फार्म में मुर्गे-मुर्गियों के दाने और रख-रखाव की लागत तक नहीं निकल रही है।
अब कोरोना की दहशत पॉल्ट्री उद्योग को निगल रही है। आलम यह है कि वायरस के चलते लोग चिकन से परहेज कर रहे हैं। जिले में महज 15 दिन में कारोबार में 80 फीसदी की गिरावट आ गई है। जिले में करीब 200 से अधिक पॉल्ट्री फार्म संचालित होते हैं। इनमें करीब एक लाख मुर्गे-मुर्गियों का पालन किया जाता है। कारोबारियों का कहना है कि एक मुर्गे को रोज तीन किलो दाना दिया जाता है। बाजार में दाने की कीमत 35 रुपये किलो है। एक मुर्गे पर रोज औसतन 100 से 120 रुपये का खर्च आ रहा है। लेकिन कोरोना वायरस के चलते फार्म संचालकों की लागत भी नहीं निकल पा रही है। जिले में जिंदा मुर्गा 10 रुपये किलो बिक रहा है। जबकि चिकन 35 रुपये किलो तक बिक रहा है। इसके चलते व्यापारियों की परेशानी बढ़ गई है। जबकि इसे लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय एडवाइजरी जारी कर चुका है। जिसमें कहा गया है कि मुर्गे और चिकन खाने से कोरोना वायरस का खतरा नहीं है। इसके बाद भी व्यापार में आ रही गिरावट को लेकर व्यापारी चिंतित हैं।
यह बोले व्यापारी
कोरोना वायरस की दहशत के चलते पॉल्ट्री उद्योग प्रभावित हो रहा है। व्यापार में 80 फीसदी की गिरावट आ गई है। 10 लाख का कारोबार 50 हजार रुपये तक आ गया है। - सिंकू, कारोबारी
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जिले में मुर्गे के दाम 10 रुपये किलो तक आ गए हैं। जबकि स्वास्थ्य मंत्रालय कह चुका है कि इससे वायरस का कोई खतरा नहीं है, फिर भी लोग दूरी बनाएं हैं। - बादाम सिंह, मुर्गी पालक
वायरस के चलते कारोबार में काफी गिरावट आ गई है। लोगों ने चिकन खाना कम कर दिया है। चिकन के दाम 35 रुपये किलो तक आ गए हैं। मुर्गे पर खर्च होने वाली लागत भी नहीं निकल रही है।- रंजीत सोनकर, व्यापारी
कोरोना वायरस का खौफ लोगों में दिख रहा है। मुर्गे के दामों में भारी गिरावट आ गई है। मुर्गे को दाना खिलाने तक की कीमत नहीं निकल पा रही है। व्यापार प्रभावित हो रहा है।- अकील, व्यापारी
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कहते हैं आंकड़े
200 पॉल्ट्री फार्म संचालित होते हैं जिले में
10 लाख रुपये अधिक का होता है कारोबार
10 रुपये किलो बिक रहा जिंदा मुर्गा
35 रुपये किलो बिक रहा चिकन
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अब कोरोना की दहशत पॉल्ट्री उद्योग को निगल रही है। आलम यह है कि वायरस के चलते लोग चिकन से परहेज कर रहे हैं। जिले में महज 15 दिन में कारोबार में 80 फीसदी की गिरावट आ गई है। जिले में करीब 200 से अधिक पॉल्ट्री फार्म संचालित होते हैं। इनमें करीब एक लाख मुर्गे-मुर्गियों का पालन किया जाता है। कारोबारियों का कहना है कि एक मुर्गे को रोज तीन किलो दाना दिया जाता है। बाजार में दाने की कीमत 35 रुपये किलो है। एक मुर्गे पर रोज औसतन 100 से 120 रुपये का खर्च आ रहा है। लेकिन कोरोना वायरस के चलते फार्म संचालकों की लागत भी नहीं निकल पा रही है। जिले में जिंदा मुर्गा 10 रुपये किलो बिक रहा है। जबकि चिकन 35 रुपये किलो तक बिक रहा है। इसके चलते व्यापारियों की परेशानी बढ़ गई है। जबकि इसे लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय एडवाइजरी जारी कर चुका है। जिसमें कहा गया है कि मुर्गे और चिकन खाने से कोरोना वायरस का खतरा नहीं है। इसके बाद भी व्यापार में आ रही गिरावट को लेकर व्यापारी चिंतित हैं।
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यह बोले व्यापारी
कोरोना वायरस की दहशत के चलते पॉल्ट्री उद्योग प्रभावित हो रहा है। व्यापार में 80 फीसदी की गिरावट आ गई है। 10 लाख का कारोबार 50 हजार रुपये तक आ गया है। - सिंकू, कारोबारी
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जिले में मुर्गे के दाम 10 रुपये किलो तक आ गए हैं। जबकि स्वास्थ्य मंत्रालय कह चुका है कि इससे वायरस का कोई खतरा नहीं है, फिर भी लोग दूरी बनाएं हैं। - बादाम सिंह, मुर्गी पालक
वायरस के चलते कारोबार में काफी गिरावट आ गई है। लोगों ने चिकन खाना कम कर दिया है। चिकन के दाम 35 रुपये किलो तक आ गए हैं। मुर्गे पर खर्च होने वाली लागत भी नहीं निकल रही है।- रंजीत सोनकर, व्यापारी
कोरोना वायरस का खौफ लोगों में दिख रहा है। मुर्गे के दामों में भारी गिरावट आ गई है। मुर्गे को दाना खिलाने तक की कीमत नहीं निकल पा रही है। व्यापार प्रभावित हो रहा है।- अकील, व्यापारी
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कहते हैं आंकड़े
200 पॉल्ट्री फार्म संचालित होते हैं जिले में
10 लाख रुपये अधिक का होता है कारोबार
10 रुपये किलो बिक रहा जिंदा मुर्गा
35 रुपये किलो बिक रहा चिकन