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डेढ़ लाख बच्चों का भोजन बनाने वाले रहते भूखे!

Tue, 02 Jul 2019 11:54 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 02 Jul 2019 11:54 PM IST
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cooks of mid day meal remains hungry
डेढ़ लाख बच्चों का भोजन बनाने वाले रहते भूखे!
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झांसी। सरकारी एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों में कक्षा आठवीं तक के बच्चों को मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराया जाता है। जिले में 4100 रसोइये रोजाना डेढ़ लाख से अधिक बच्चों के लिए मिड-डे मील बनाते हैं। इसके एवज में उन्हें एक हजार रुपये मानदेय दिया जाता है। वह भी समय पर नहीं मिलता। इन हालात में उनके परिवाराें को भरपेट भोजन नसीब नहीं हो पाता। रसोइयों का कहना है कि मानदेय कम होने से उनको दिक्कत हो रही है।
मध्याह्न भोजन प्राधिकरण ने सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों में भोजन बनाने के लिए वर्ष 2007 में रसोइयों की तैनाती की थी। इन्हें 10 माह का मानदेय दिया जाता है। हालांकि यह मानदेय अक्सर तीन से छह माह की अवधि में आता है। रसोइयों का कहना है कि उनसे भोजन पकाने के साथ ही स्कूलों में कई अन्य कार्य भी लिए जाते हैं। बच्चों को घरों से लाना और उनकी देखभाल भी शामिल है। इसके साथ ही चुनाव कार्य में भी जुटना पड़ता है। स्कूल में पूरा समय लग जाता है। जबकि मानदेय सिर्फ एह हजार रुपये महीने के हिसाब से मिलता है। ऐसे में कैसे घर चल सकता है। इनके अनुसार कई बार प्रशासनिक अधिकारियों के यहां चक्कर लगाए लेकिन कुछ नहीं
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शासन ने 1500 रुपये प्रतिमाह की दर से रसोइयों का मानदेय कर दिया है। धनराशि आते ही आवंटित कर दी जाएगी। रसोइयों को एप्रिन व दस्तानें के लिए रुपये आए हैं। उसका उपयोग करने को कहा गया है।
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राज बहादुर सिंह, जिला समन्वयक मध्याह्न भोजन प्राधिकरण
चुनाव ड्यूटी का नहीं मिला पैसा
चुनाव दौरान मतदान कर्मचारियों को खाना एवं नाश्ता तैयार करने के लिए रसोइयों की ड्यूटी लगाई गई थी। रसोइयों का कहना है कि उन्होंने चुनाव में दो दिन कार्य किया लेकिन आज तक उन्हें इस ड्यूटी का रुपया नहीं मिला है। जबकि लेखपालों ने कहा था कि वह ड्यूटी का पैसा देंगे। कई बार उनसे संपर्क किया गया। लेकिन उनका फोन तक नहीं उठता है।

मई व जून का मानदेय नहीं दिया जाता
मध्याह्न भोजन प्राधिकरण ने रसोइयों का मानदेय बढ़ा दिया है। यह एक हजार रुपये था, जो अब 1500 रुपये होगा। इसको लेकर शासनादेश भी आ चुका है। हालांकि अभी तक रुपया आवंटित नहीं हुआ है। विभाग के अनुसार रसोइये की नियुक्ति तभी होती है, जब उसका बच्चा नियुक्ति वाले स्कूल में पढ़ता हो। वहीं मानदेय एक ही माह अप्रैल का ही आना है। मई व जून का मानदेय नहीं दिया जाता है।
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