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बंद हो गई पराली जलाने की सेटेलाइट रिर्पोटिंग
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झांसी। पराली जलने की निगरानी के लिए सेटेलाइट के जरिए रिर्पोटिंग बंद कर दी गई है। इस वर्ष करीब तीन सौ मुकदमे दर्ज हुए जबकि 5.50 लाख रुपये तक जुर्माना वसूला गया। सबसे अधिक 250 से अधिक मामले सिर्फ मोंठ तहसील में ही दर्ज किए गए। यह आंकड़ा पिछले कई वर्षों के मुकाबले सर्वाधिक है।
पराली जलाने से रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट समेत एनजीटी की सख्त निगरानी को देखते हुए इसकी सेटेलाइट से लगातार एक माह तक निगरानी कराई जाती है। निगरानी आईसीएआर की ओर से कराई जाती है। 30 अक्तूबर से 30 नवंबर के बीच सेटेलाइट से कराई गई। निगरानी के दौरान वह सभी इलाके चिह्नित करके बता दिए गए जहां पराली जलाई गई। सबसे अधिक मामले मोंठ इलाके में ही पाए गए। कृषि अधिकारियों के मुताबिक मोंठ इलाके में ही करीब 248 किसानों के खिलाफ मामले दर्ज कराए गए जबकि 300 से अधिक मामले सामने आए।
अफसरों का कहना है कई मामले में पराली के बजाए दूसरी वजहें सामने आईं। दोषियों पर कुल 5.50 लाख रुपये का जुर्माना भी हुआ। अफसरों का कहना है कि करीब अस्सी फीसद जुर्माने की वसूली भी ही चुकी। बता दें, पराली जलाने के मामले में झांसी कई दिनों तक पूरे सूबे में सबसे ऊपर रहा जबकि यहां सिर्फ मोंठ, समथर इलाकों में ही धान उत्पादन होता है। प्रभारी उपनिदेशक कृषि कमलेश कुमार के मुताबिक सेटेलाइट से निगरानी सिर्फ एक माह तक होती है। अब अधिकांश जगह रबी की बुवाई की जा चुकी।
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पराली जलाने से रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट समेत एनजीटी की सख्त निगरानी को देखते हुए इसकी सेटेलाइट से लगातार एक माह तक निगरानी कराई जाती है। निगरानी आईसीएआर की ओर से कराई जाती है। 30 अक्तूबर से 30 नवंबर के बीच सेटेलाइट से कराई गई। निगरानी के दौरान वह सभी इलाके चिह्नित करके बता दिए गए जहां पराली जलाई गई। सबसे अधिक मामले मोंठ इलाके में ही पाए गए। कृषि अधिकारियों के मुताबिक मोंठ इलाके में ही करीब 248 किसानों के खिलाफ मामले दर्ज कराए गए जबकि 300 से अधिक मामले सामने आए।
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अफसरों का कहना है कई मामले में पराली के बजाए दूसरी वजहें सामने आईं। दोषियों पर कुल 5.50 लाख रुपये का जुर्माना भी हुआ। अफसरों का कहना है कि करीब अस्सी फीसद जुर्माने की वसूली भी ही चुकी। बता दें, पराली जलाने के मामले में झांसी कई दिनों तक पूरे सूबे में सबसे ऊपर रहा जबकि यहां सिर्फ मोंठ, समथर इलाकों में ही धान उत्पादन होता है। प्रभारी उपनिदेशक कृषि कमलेश कुमार के मुताबिक सेटेलाइट से निगरानी सिर्फ एक माह तक होती है। अब अधिकांश जगह रबी की बुवाई की जा चुकी।
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