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कासे कहूं बतिया, कोऊ न सुने मेरी...
Mon, 20 May 2019 12:38 AM IST
देवेंद्र कुमार
jhansi
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Published by: देवेंद्र कुमार
Updated Mon, 20 May 2019 12:38 AM IST
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classical music
- फोटो : amarujala
झांसी। आगरा की शास्त्रीय गायिका डा. मेघा तलेगावंकर राव और शुभ्रा तलेगांवकर की जुगलबंदी ने श्रोताओं को शास्त्रीय संगीत की मधुर स्वर लहरियों में विभोर कर दिया। दक्षिण भारतीय राग वाचस्पति के बोल कासे कहूं बतिया, कोऊ न सुने मेरी ... पर श्रोता बार - बार ताली बजाने को विवश हो गए।
महाराष्ट्र समाज के गणेश मंदिर में महाराजा गंगाधर राव और महारानी लक्ष्मीबाई के विवाहोत्सव की वर्षगांठ पर आयोजित हुए शास्त्रीय संगीत के कार्यक्रम में उन्होंने ताल तीन ताल में आओ रे आओ नंदना राह तकत जागू मैं सारी रतिया....., राग चंद्रप्रभा में उन्होंने जानू न तोरी में बलिया को पेश किया। ठुमरी में उन्होंने नाही सुने कोई बतिया..., मराठी भाषा में भजन गजनना चरणी वंदन केले.. का गायन किया। उनके साथ तबले पर संगत पंडित केशव रघुनाथ तलेगांवकर और हरमोनियम पर प्रतिभा तलेगांवकर ने दी। संगीत के कार्यक्रम में गुरुकुल म्यूजिक एकेडमी की कल्याणी श्रीवास्तव ने राग मध्य लय की बंदिश और भजन को प्रस्तुत किया। इसके साथ ही भगवान गणेश की वंदना भी की गई ।अंत में आभार समीर भालेराव ने जताया।
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महाराष्ट्र समाज के गणेश मंदिर में महाराजा गंगाधर राव और महारानी लक्ष्मीबाई के विवाहोत्सव की वर्षगांठ पर आयोजित हुए शास्त्रीय संगीत के कार्यक्रम में उन्होंने ताल तीन ताल में आओ रे आओ नंदना राह तकत जागू मैं सारी रतिया....., राग चंद्रप्रभा में उन्होंने जानू न तोरी में बलिया को पेश किया। ठुमरी में उन्होंने नाही सुने कोई बतिया..., मराठी भाषा में भजन गजनना चरणी वंदन केले.. का गायन किया। उनके साथ तबले पर संगत पंडित केशव रघुनाथ तलेगांवकर और हरमोनियम पर प्रतिभा तलेगांवकर ने दी। संगीत के कार्यक्रम में गुरुकुल म्यूजिक एकेडमी की कल्याणी श्रीवास्तव ने राग मध्य लय की बंदिश और भजन को प्रस्तुत किया। इसके साथ ही भगवान गणेश की वंदना भी की गई ।अंत में आभार समीर भालेराव ने जताया।
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