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‘नए कश्मीर’ का शहर ने तहेदिल से किया स्वागत

Tue, 06 Aug 2019 12:39 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 06 Aug 2019 12:39 AM IST
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city welcomed centres decision on kashmir
इलाइट चौराहा पर उत्तर प्रदेश व्यापार मंडल द्वारा कश्मीर में अनुच्छेद 370 को हटाये जाने का फैसला लि?
‘नए कश्मीर’ का शहर ने तहेदिल से किया स्वागत
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झांसी। कश्मीर में अनुच्छेद 370 को खत्म करने के भारत सरकार के फैसले का शहर ने तहेदिल से स्वागत किया। संसद में गृह मंत्री अमित शाह द्वारा इसकी घोषणा करते ही लोगों में हर्ष की लहर दौड़ गई। किसी ने ढोल - नगाढ़े बजाकर नये कश्मीर का स्वागत किया तो किसी ने आतिशबाजी की। दिन भर शहर की हलचलें बढ़ीं रहीं। हर जगह चर्चा के केंद्र में कश्मीर रहा। खुशी में एक दूसरे को मिठाइयां खिलाई जाती रहीं। सोशल मीडिया पर लोगों ने विजयी मुद्रा में पोस्ट डालीं।
पिछले सप्ताह से कश्मीर में हलचलें बढ़ी हुईं थीं। अमरनाथ यात्रियों व सैलानियों को वापस किया जाने लगा था। सेना का घेरा भी बढ़ने लगा था। वहां से आ रहीं इन खबरों से कयास लगाने लगे थे कि ‘कश्मीर में कुछ बड़ा होने वाला है’। ज्यादातर लोगों का मानना था कि भाजपा के एजेंडे के मुताबिक मोदी सरकार कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने जा रही है, बस इंतजार तो संसद में सरकार की आवाज को कानों से सुनने का था। यही वजह थी कि सुबह से ही 11 बजने का इंतजार किया जाने लगा था। इससे पहले ही टीवी सेट ऑन हो गए थे और लोग संसद की कार्रवाई पर टकटकी जमाए हुए थे। देश की आजादी की वर्षगांठ के दस दिन पहले गृहमंत्री अमित शाह ने संसद को सरकार का फैसला सुनाया। इसके साथ ही शहर के लोगों में विजयी भाव के साथ खुशी की लहर दौड़ गई। लोग सड़कों पर आ गए। ढोल-नगाढ़े बजने लगे और आतिशबाजी की गड़गड़ाहट सुनाई देने लगी। सोशल मीडिया पर भी बधाई संदेशों का सिलसिला दौड़ पड़ा। लोगों ने अपने-अपने अंदाज में सरकार के फैसले पर खुशी जताई।
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उप्र से कई गुना अधिक खर्च है कश्मीरी नागरिकों का
झांसी। उत्तर प्रदेश में सरकार का प्रति व्यक्ति खर्च 4,500 रुपये सालाना है, जबकि कश्मीर में सरकार को 92,000 रुपये प्रति व्यक्ति पर खर्च करने पड़ते हैं। विशेष राज्य के दर्जे से इस रकम का ऑडिट भी नहीं होता था, इससे भ्रष्टाचार चरम पर था। यह कहना है कि सेवानिवृत्त वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के विभाग सरसंघचालक राजेश्वर दयाल खरे का।
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उन्होंने कहा कि कश्मीर में कारोबार न होने की वजह से वहां का पूरा खर्चा सरकार को उठाना पड़ता है। इसमें व्यापक पैमाने पर भ्रष्टाचार होता है। वहां के तमाम नेता पोल खुलने के डर से सरकार के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। वे कश्मीर में यथास्थिति चाहते हैं, ताकि वे मौज में रहे। सही मायने में अब कश्मीर का भारत में अब विलय हुआ है। नये कश्मीर का उदय हुआ है। आने वाले सालों में पिछड़ा कश्मीर देश के अन्य राज्यों के साथ कदमताल करता नजर आएगा।
आम कश्मीरी के दिल में बसता है भारत
झांसी। रिटायर्ड कर्नल जेपी शर्मा ने कश्मीर के अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि वहां की आम जनता देश के साथ है। भारत विरोधी ताकतें वहां बहुत कम हैं, लेकिन देश में जानते सब उन्हीं हो हैं। क्योंकि, उन्हीं को दिखाया जाता है, फिर चाहे वे वहां के नेता हों या पत्थरबाज। आम कश्मीरी की आवाज देश के अन्य हिस्सों तक नहीं पहुंच पाती।

उन्होंने बताया कि सेना की सेवा के दौरान उन्हें दो बार कश्मीर में रहने का मौका मिला। 1985 और 2003 में उनकी कश्मीर में पोस्टिंग हुई। चार-पांच साल रहे। वहां के आम लोगों को करीब से देखा है। माहौल खराब करने का काम वहां के नेता और अलगाववादी ताकतें करती हैं। वे लोगों को भड़काने का काम करते हैं। अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए आम लोगों को भारत के विरुद्ध भड़काया जाता है। वे कश्मीर में किसी की दखल नहीं चाहते। जबकि, सरकार के इस फैसले का सबसे ज्यादा लाभ कश्मीर के आम नागरिकों को मिलने वाला है।
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