{"_id":"60c65add8ebc3e0f0122860f","slug":"choti-se-umar-me-ye-hunar-bah-ustad-bah-jhansi-news-jhs197046420","type":"story","status":"publish","title_hn":"छोटी सी उम्र में ये हुनर, वाह उस्ताद वाह...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छोटी सी उम्र में ये हुनर, वाह उस्ताद वाह...
विज्ञापन
छोटी सी उम्र में ये हुनर, वाह उस्ताद वाह...
झांसी। छोटी सी उम्र में बड़े-बड़े सपने और उस्तादों जैसा हुनर देखना हो तो झांसी के पार्थ उपाध्याय किसी से कम नहीं हैं। मात्र 16 वर्ष की उम्र में पार्थ को तबला वादन में महारथ हासिल है। पांच-छह साल की उम्र से तबला सीख रहे पार्थ पढ़ाई, खेल और कुकिंग में भी पीछे नहीं है। पार्थ के पिता भी तबला वादन के शौकीन हैं।
शहर में बड़ा गांव शिव कॉलोनी में रहने वाले पार्थ कक्षा 12वीं के छात्र हैं। पार्थ के पिता विजय कुमार उपाध्याय सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं और मां उमा उपाध्याय कुशल गृहिणी हैं। पार्थ की एक बहन प्रथा है। प्रथा बताती हैं कि उनके पापा को बचपन से ही तबला वादन का शौक है। उन्होंने वैसे तो कहीं शिक्षा नहीं ली लेकिन प्रैक्टिस करके बेहतरीन तबला बजाना सीखा। वह सरकारी स्कूल में शिक्षक हो गए लेकिन अब भी तबला वादन का शौक जारी है। पार्थ भी बचपन से अपने पापा को तबला बजाते देखता था तो उसे भी इसका शौक हो गया। वह पांच-छह साल की उम्र से ही पापा के साथ बैठकर उन्हें देखता और सीखता था। पापा ने उसका हुनर देखा तो वह दंग रह गए, उन्होंने उसे श्रीरामलाल संगीत महाविद्यालय में दाखिला दिलाया। इसके बाद तो पार्थ को मानो पंख लग गए। तबले पर ताल और थाप के साथ उसकी जुगलबंदी देख बड़े-बड़े वाह-वाह करने लगे हैं। उसके स्कूल के शिक्षक और साथी उसकी कलाकारी को सराहने लगे।
पार्थ का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान स्कूल और संगीत महाविद्यालय बंद रहे लेकिन उसने अपनी प्रैक्टिस जारी रखी। रियाज में और निखार के लिए उसके पापा उसका पूरा साथ देते हैं। पार्थ कई संगीत प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर अपने हुनर का लोहा मनवा चुके हैं। कई पुरस्कार और प्रमाणपत्र भी मिले हैं। पार्थ इस उम्र में जितना अच्छा तबला बजाते हैं, बैडमिंटन खेलते हैं उतनी ही अच्छी कुकिंग भी कर लेते हैं। घर में अच्छी-अच्छी डिश बनाना उसे काफी पसंद है। पार्थ तबला वादन में देश-दुनिया में अपने माता-पिता और झांसी का नाम रोशन करना चाहते हैं। परिवार भी उनके इस सपने को साकार करने में लगा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
झांसी। छोटी सी उम्र में बड़े-बड़े सपने और उस्तादों जैसा हुनर देखना हो तो झांसी के पार्थ उपाध्याय किसी से कम नहीं हैं। मात्र 16 वर्ष की उम्र में पार्थ को तबला वादन में महारथ हासिल है। पांच-छह साल की उम्र से तबला सीख रहे पार्थ पढ़ाई, खेल और कुकिंग में भी पीछे नहीं है। पार्थ के पिता भी तबला वादन के शौकीन हैं।
शहर में बड़ा गांव शिव कॉलोनी में रहने वाले पार्थ कक्षा 12वीं के छात्र हैं। पार्थ के पिता विजय कुमार उपाध्याय सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं और मां उमा उपाध्याय कुशल गृहिणी हैं। पार्थ की एक बहन प्रथा है। प्रथा बताती हैं कि उनके पापा को बचपन से ही तबला वादन का शौक है। उन्होंने वैसे तो कहीं शिक्षा नहीं ली लेकिन प्रैक्टिस करके बेहतरीन तबला बजाना सीखा। वह सरकारी स्कूल में शिक्षक हो गए लेकिन अब भी तबला वादन का शौक जारी है। पार्थ भी बचपन से अपने पापा को तबला बजाते देखता था तो उसे भी इसका शौक हो गया। वह पांच-छह साल की उम्र से ही पापा के साथ बैठकर उन्हें देखता और सीखता था। पापा ने उसका हुनर देखा तो वह दंग रह गए, उन्होंने उसे श्रीरामलाल संगीत महाविद्यालय में दाखिला दिलाया। इसके बाद तो पार्थ को मानो पंख लग गए। तबले पर ताल और थाप के साथ उसकी जुगलबंदी देख बड़े-बड़े वाह-वाह करने लगे हैं। उसके स्कूल के शिक्षक और साथी उसकी कलाकारी को सराहने लगे।
विज्ञापन
पार्थ का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान स्कूल और संगीत महाविद्यालय बंद रहे लेकिन उसने अपनी प्रैक्टिस जारी रखी। रियाज में और निखार के लिए उसके पापा उसका पूरा साथ देते हैं। पार्थ कई संगीत प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर अपने हुनर का लोहा मनवा चुके हैं। कई पुरस्कार और प्रमाणपत्र भी मिले हैं। पार्थ इस उम्र में जितना अच्छा तबला बजाते हैं, बैडमिंटन खेलते हैं उतनी ही अच्छी कुकिंग भी कर लेते हैं। घर में अच्छी-अच्छी डिश बनाना उसे काफी पसंद है। पार्थ तबला वादन में देश-दुनिया में अपने माता-पिता और झांसी का नाम रोशन करना चाहते हैं। परिवार भी उनके इस सपने को साकार करने में लगा है।
विज्ञापन