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विकास का जज्बा रखने वाले को चुनें अपना नेता

Sun, 22 Jan 2017 12:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 22 Jan 2017 12:45 AM IST
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Choose growth leader with passion
amarujala samvaad - फोटो : amar ujala, jhansi news
विधानसभा चुनाव के मद्देनजर शनिवार को ‘अमर उजाला संवाद’ का आयोजन किया गया, जिसमें शहर के बुद्धिजीवियों ने विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखी। उन्होंने जनप्रतिनिधि का चरित्रवान होना जरूरी बताया। साथ ही कहा कि वोट उसे दिया जाए, जिसमें विकास कराने का जज्बा हो। इसके अलावा तस्वीर बदलने के लिए शत-प्रतिशत मतदान को आवश्यक बताया।
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ग्वालियर रोड औद्योगिक क्षेत्र स्थित अमर उजाला के कार्यालय में आयोजित संवाद में बुद्धिजीवियों ने कहा विकास का सुनियोजित होना जरूरी है। एक विभाग सड़क बनाता है और कुछ दिनों बाद दूसरा विभाग आकर पाइप लाइन डालने के लिए सड़क खोद देता है। खोदी गई सड़क की ढंग से मरम्मत तक नहीं की जाती है। इससे धन की बर्बादी तो होती ही है और जनता को लाभ भी नहीं मिल पाता। जनप्रतिनिधि का जनता से जुड़ा होना जरूरी है, तभी वह आम लोगों की समस्याओं को बेहतर ढंग से समझ सकता है। सीपरी ओवरब्रिज का हवाला देते हुए कहा कि विकास की यह परियोजना प्रदेश व केंद्र सरकार के आपसी सामंजस्य के अभाव के चलते लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। बावजूद, सांसद - विधायकों को इसकी परवाह नहीं है। इस दौरान राजनीतिक दलों को आरटीआई के दायरे में लाने की भी पैरवी हुई। बुद्धिजीवियों ने शहर की विभिन्न समस्याओं को उठाया और राजनीतिक दलों को अच्छे प्रत्याशियों को टिकट देने की नसीहत दी।
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सर्वसुलभ हो जनप्रतिनिधि
जनप्रतिनिधि जनता के बीच का हो और वह सर्वसुलभ रहे, ताकि लोग उस तक आसानी से पहुंच सकें और अपनी समस्याएं रख सकें। लेकिन, चुनाव के पहले तक तो प्रत्याशी सर्व सुलभ बने रहते हैं, चुनाव जीतते ही वह जनता से दूरी बढ़ा लेते हैं। फिर न उन्हें जनता से सरोकार रहता है और न ही उनकी समस्याओं से। यह वजह है कि छोटी - छोटी समस्याओं का भी समाधान हीं हो पाता है।
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- सैयर मोहम्मद आरिफ, प्रवक्ता - नेशनल हाफिज सिद्दीकी इंटर कालेज

चरित्रवान को चुनें
नेता उसी को चुनना चाहिए, जो चरित्रवान हो और उसमें त्याग की भावना हो। वह परिस्थितियों को समझे और अपनी समझ से समस्याओं का समाधान खोजे। इसके अलावा अब शिक्षा में नैतिक शिक्षा नहीं है। जबकि, करेक्टर बिल्डिंग एजूकेशन जरूरी है। चरित्र में नैतिकता होने पर भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं से छुटकारा पाना बेहद आसान होगा। नेताओं को ऐसी शिक्षा की पैरवी करना चाहिए। 
- यशवंत सिंह, रिटायर्ड जज   

समस्याओं से सरोकार हो 
सांसद - विधायक आम लोगों की दिक्कतों का ध्यान नहीं रखते हैं। इसका उदाहरण सीपरी बाजार का निर्माणाधीन ओवरब्रिज है। इसके निर्माण की देरी की वजह से यहां से लोगों का आवागमन जोखिम भरा है। बावजूद, हमारे जनप्रतिनिधि इसके तेजी से निर्माण को लेकर गंभीर नहीं है। इसके अलावा हमारे जनप्रतिनिधियों को महिला सुरक्षा के प्रति गंभीर होना चाहिए।  
- डा. अंजू दत्त, प्राचार्य - आर्य कन्या महाविद्यालय 

पार्टियों के फंड की हो जांच 
राजनैतिक दलों को भी सूचना के अधिकार के दायरे में लाया जाना चाहिए। उनके फंड की जांच भी की जानी चाहिए। इससे राजनीति में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा। इसके अलावा विधानसभा चुनाव में 28 लाख रुपये तक की खर्च सीमा का भी सख्ती से पालन कराया जाना चाहिए, इससे सही लोगों को भी चुनाव लड़ने का मौका मिलेगा।  
- डा. कमलेश शर्मा, पूर्व सहायक कुलसचिव - बुंदेलखंड विश्वविद्यालय 

नोटा का हो प्रचार - प्रसार
प्रत्याशी अच्छे नहीं हैं तो नोटा विकल्प का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। लेकिन, इसकी लोगों को जानकारी नहीं है। जिस तरह से चुनाव आयोग मतदाता जागरूकता अभियान चला रहा है, उसी तरह से नोटा के प्रति जागरूक करने के लिए भी अभियान चलाया चलाया जाना चाहिए। लोग जब नोटा का इस्तेमाल करना सीख जाएंगे, तो राजनैतिक दल अच्छे लोगों को चुनाव लड़ाने के लिए मजबूर होंगे।
- डा. डीसी अग्रवाल, पूर्व डीन - वाणिज्य संकाय बुंदेलखंड विश्वविद्यालय  

करोड़ों खर्च करने वाला सेवा क्या करेगा? 
लोग करोड़ों रुपये खर्च कर सांसद-विधायक बनते हैं। अब ऐसे में उनसे जन सेवा की उम्मीद करना बेमानी ही होगी। चुनाव में खर्च की गई रकम की वसूली उनकी प्राथमिकता होती है। लक्ष्मीताल की सात एकड़ जमीन गायब हो गई, आयुर्वेदिक कालेज की जमीन पर कब्जा हो गया, हमारे जनप्रतिनिधि मौन रहे। इसे विकास कहते हैं? यदि यही विकास है, तो हम इससे पहले ही अच्छे थे। 
- अरुण कुमार हिंगवासिया, रिटायर्ड डिप्टी एसपी 

कास्टलेस की भी हो बात 
कैशलेस के साथ कास्टलेस की बात भी होनी चाहिए। राजनैतिक दल जातिगत आंकड़ों के आधार पर टिकटों का बंटवारा करते हैं, इससे समाज में असमानता बढ़ रही है। जबकि, राजनैतिक दलों व नेताओं को जातिविहीन समाज की स्थापना की दिशा में काम करना चाहिए। सब साथ मिलकर आगे बढ़े, इसी से देश व प्रदेश की तरक्की होगी। 
- डा. बृजेंद्र बौद्ध, प्रवक्ता - बुंदेलखंड कालेज 

री-कॉल करने का भी हो पावर 
एक बार चुने जाने के बाद पांच साल का कार्यकाल पक्का है, फिर चाहे काम करें या नहीं, यह स्थिति गलत है। मतदाताओं के पास सांसद - विधायक सिलेक्ट करने का अधिकार है, तो उन्हें री-कॉल करने का पावर भी दिया जाना चाहिए, ताकि काम न करने वाले जनप्रतिनिधि को वापस बुलाया जा सके। यानी वे बरखास्त हो जाएंगे। इससे जनप्रतिनिधियों में भय बना रहेगा और वह काम करने के लिए मजबूर होंगे।
- गोपाल जी अग्रवाल, रिटायर्ड वरिष्ठ बैंक प्रबंधक  

प्लानिंग से हो विकास 
विकास सुनियोजित ढंग से किया जाना चाहिए। लेकिन, देखने में आ रहा है कि विकास की कोई प्लानिंग ही नहीं की जाती है। एक विभाग सड़क बनाता है, तो दूसरा विभाग पाइप लाइन डालने के लिए सड़क खोद देता है। और तो और बाद में मरम्मत तक ढंग से नहीं की जाती। इससे पैसे की बर्बादी तो होती ही है, साथ ही जनता को भी लाभ नहीं मिल पाता है। 
- मो. गुफरान खान, प्रधानाचार्य - हाफिज सिद्दीकी इंग्लिश मीडियम स्कूल 

काम की जारी हो रिपोर्ट 
विधायक-सांसदों ने क्षेत्र के विकास में कितना काम किया है, इसकी रिपोर्ट चुनाव आयोग को जारी करनी चाहिए, ताकि वह झूठे दावों के आधार पर दुबारा से न चुने जा सकें। इसके अलावा भ्रष्टाचार देश की सबसे बड़ी समस्या है। इससे निपटने के लिए हमें भ्रष्ट आचरण वाले नेताओं को नहीं चुनना चाहिए। इससे राजनैतिक दल भी अच्छे लोगों को टिकट देने को विवश होंगे। 
- प्रदीप समाधिया, पूर्व उप मुख्य वाणिज्य प्रबंधक - रेलवे 

क्षेत्र का ब्लू प्रिंट हो सभी के पास  
क्षेत्र में कितनी सड़कें और कितनी गलियां हैं, जनप्रतिनिधियों को इसकी भी जानकारी नहीं होती है। ऐसे में विकास क्या वो खाक कराएंगे। जबकि, सांसद - विधायक से लेकर पार्षद के पास तक अपने - अपने क्षेत्र का ब्लू प्रिंट होना चाहिए। शहर की कई ऐसी समस्याएं हैं, जो बीते कई दशकों से बनी हुई हैं। नेता बदलते रहे, लेकिन समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। 
- निरंजन धुलेकर, रिटायर्ड वरिष्ठ बैंक प्रबंधक 

काम की गोपनीय रिपोर्ट हो तैयार 
राजनैतिक दलों को अपने सांसद और विधायकों की गोपनीय रिपोर्ट तैयार करनी चाहिए, जिसमें यह जांचा जाना चाहिए कि वह जनता की उम्मीदों पर कितने खरे उतरे। इस आधार पर ही उन्हें दुबारा टिकट दिया जाना चाहिए। यह रिपोर्ट सार्वजनिक भी की जानी चाहिए। ऐसे में जनप्रतिनिधियों पर काम करने का दबाव रहेगा। अन्यथा उनकी राजनीति हाशिये पर चली जाएगी। 
- डा. प्रदीप पांडेय, वरिष्ठ परामर्शदाता - जिला चिकित्सालय 

बुंदेलखंड को नहीं मिला इंसाफ 
प्रदेश के अन्य हिस्सों के मुकाबले बुंदेलखंड आज भी पिछड़ा है। इस स्थिति के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार यहां के सांसद - विधायक ही हैं, जिन्होंने क्षेत्र के साथ इंसाफ नहीं किया। इसके अलावा शिक्षा के क्षेत्र में भी यहां काम नहीं हुआ है। बुंदेलखंड के कई इलाकों में तो महिलाओं की साक्षरता दर पचास फीसदी से भी कम है। ऐसे में विकास की बात बेमानी ही है। 

- डा. आर बी मौर्य, प्रवक्ता - बुंदेलखंड कालेज 

इन मुद्दों की भी चर्चा 
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- झांसी में हो एम्स की स्थापना, ताकि बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें
- बुंदेलखंड विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दिया जाए दर्जा 
- ग्वालियर रोड और हंसारी रेलवे क्रासिंग पर बनाया जाए ओवरब्रिज 
- बाजारों का अतिक्रमण साफ हो, शहर में कई जगह हो मल्टी स्टोरी पार्किंग 
- शहर के परकोटे को कब्जा मुक्त कर उसका संरक्षण किया जाए 
- नव विकसित कालोनियों में पानी और बिजली की व्यवस्था दुरुस्त की जाए 
- विकास परियोजनाएं तेजी से पूरी की जाएं 

शत प्रतिशत मतदान का संकल्प 
अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में आए बुद्धिजीवियों ने शत प्रतिशत मतदान का संकल्प लिया और दूसरों को प्रेरित करने की बात भी कही। उन्होंने कहा मतदान ही वह हथियार है, जिसके जरिये हम देश के भविष्य को संवार सकते हैं और भावी पीढ़ी को अच्छा माहौल दे सकते हैं। मतदान के प्रति हमारी उदासीनता की वजह से ही गलत लोग हमारे प्रतिनिधि बन जाते हैं। 
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