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मोबाइल का मोह त्याग खेल के मैदानों में पहुंच रहे बच्चे
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झांसी। गर्मी की छुट्टियां शुरू होते ही खेल के मैदानों में बच्चों की संख्या बढ़ने लगी है। पिछले दो सालों से घरों में रहकर जो बच्चे मोबाइल और टीवी के आदी हो चुके थे, वे भी अब खेल के मैदान में आने लगे हैं।
कोरोना काल में बच्चे घर पर बैठकर मोबाइल और टीवी के आदी हो गए थे। वहीं घर पर रहकर बच्चों की शारीरिक के साथ-साथ मानसिक रूप से प्रभावित हो रहे थे। बच्चों में यह प्रभाव स्कूलों में शिक्षकों और घरों में मां-बाप को भी देखने मिल रहा था। कहते हैं कि खेल तन और मन दोनों को स्वस्थ रखता है। स्कूलों में समर कैंप में जहां बच्चों ने डांस, जूडो-कराटे, कबड्डी, बैडमिंटन, हॉकी आदि सीखा, तो वहीं दूसरी ओर कई बच्चे खेल के मैदानों में ही खेल सीखने पहुंचने लगे हैं। ध्यानचंद स्टेडियम में सुबह और शाम बच्चों की खेल सीखने के लिए बच्चों की भीड़ उमड़ने लगी है। उसमें से कुछ छोटे बच्चे तो वो भी हैं जो कोरोना काल के बाद से लगातार यहां सीखने आ रहे हैं। जबकि कुछ गर्मी की छुट्टी में जूडो, बॉक्सिंग आदि सीखने आने लगे हैं।
दोनों बहनें सीखने आ रहीं बॉक्सिंग
-वैष्णवी साहू (कक्षा 3) और श्रद्धा साहू, (कक्षा 2) दोनों बहनें बॉक्सिंग सीखने आती हैं। बच्चियों ने बताया हमें मैरीकॉम नहीं बनना, हमें अपना नाम बनाना है। उनके कोच ने बताया कि दोनों बच्चियां गरीब परिवार से हैं, लेकिन सीख बहुत जल्दी रही हैं। ऐसे ही मेहनत करती रहीं तो, झांसी का नाम पूरे देश में रोशन कर सकती हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इन बच्चियों के साथ संवाद भी किया था।
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जूडो सीखने में बढ़ रहा बच्चों का क्रेज
-जूडो कोच हरीश चंद राजपूत ने बताया कि लगभग 10-12 बच्चे गर्मी की छुट्टियों में जूडो सीखने आए हैं। इसमें हर उम्र के बच्चे शामिल हैं, लेकिन छोटी कक्षाओं के बच्चों की संख्या ज्यादा है। बच्चों ने कहा कि शुरू में हम मम्मी-पापा के कहने पर आ रहे थे, लेकिन अब जूडो सीखने में मजा आ रहा है। अब तो स्कूल खुलने के बाद भी हम जूडो सीखने के लिए समय निकालेंगे। लड़कियों ने कहा कि आत्मरक्षा के लिए जूडो-कराटे बहुत जरूरी है।
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कोरोना काल में बच्चे घर पर बैठकर मोबाइल और टीवी के आदी हो गए थे। वहीं घर पर रहकर बच्चों की शारीरिक के साथ-साथ मानसिक रूप से प्रभावित हो रहे थे। बच्चों में यह प्रभाव स्कूलों में शिक्षकों और घरों में मां-बाप को भी देखने मिल रहा था। कहते हैं कि खेल तन और मन दोनों को स्वस्थ रखता है। स्कूलों में समर कैंप में जहां बच्चों ने डांस, जूडो-कराटे, कबड्डी, बैडमिंटन, हॉकी आदि सीखा, तो वहीं दूसरी ओर कई बच्चे खेल के मैदानों में ही खेल सीखने पहुंचने लगे हैं। ध्यानचंद स्टेडियम में सुबह और शाम बच्चों की खेल सीखने के लिए बच्चों की भीड़ उमड़ने लगी है। उसमें से कुछ छोटे बच्चे तो वो भी हैं जो कोरोना काल के बाद से लगातार यहां सीखने आ रहे हैं। जबकि कुछ गर्मी की छुट्टी में जूडो, बॉक्सिंग आदि सीखने आने लगे हैं।
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दोनों बहनें सीखने आ रहीं बॉक्सिंग
-वैष्णवी साहू (कक्षा 3) और श्रद्धा साहू, (कक्षा 2) दोनों बहनें बॉक्सिंग सीखने आती हैं। बच्चियों ने बताया हमें मैरीकॉम नहीं बनना, हमें अपना नाम बनाना है। उनके कोच ने बताया कि दोनों बच्चियां गरीब परिवार से हैं, लेकिन सीख बहुत जल्दी रही हैं। ऐसे ही मेहनत करती रहीं तो, झांसी का नाम पूरे देश में रोशन कर सकती हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इन बच्चियों के साथ संवाद भी किया था।
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जूडो सीखने में बढ़ रहा बच्चों का क्रेज
-जूडो कोच हरीश चंद राजपूत ने बताया कि लगभग 10-12 बच्चे गर्मी की छुट्टियों में जूडो सीखने आए हैं। इसमें हर उम्र के बच्चे शामिल हैं, लेकिन छोटी कक्षाओं के बच्चों की संख्या ज्यादा है। बच्चों ने कहा कि शुरू में हम मम्मी-पापा के कहने पर आ रहे थे, लेकिन अब जूडो सीखने में मजा आ रहा है। अब तो स्कूल खुलने के बाद भी हम जूडो सीखने के लिए समय निकालेंगे। लड़कियों ने कहा कि आत्मरक्षा के लिए जूडो-कराटे बहुत जरूरी है।