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बच्चों को खीर खिलाकर कराया अन्नप्राशन
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झांसी। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा पोषण माह के अंतर्गत मंगलवार को सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर अन्नप्राशन दिवस पर छह माह पूर्ण कर चुके बच्चों का अन्नप्राशन कराया गया। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने साग-सब्जियों से कोरोना वायरस का प्रतीक बनाकर लोगों को जागरूक किया।
जिला कार्यक्रम अधिकारी नरेंद्र सिंह ने बताया कि सितंबर माह को पोषण माह के रूप में मनाया जा रहा है। इसी के अंतर्गत आज सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर ऊपरी आहार की महत्ता के बारे में जागरूक करने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने पौष्टिक आहार का प्रदर्शन किया। साथ ही छह माह की अवधि पूरी कर चुके बच्चों का अन्नप्राशन भी कराया। शहर के आवास विकास क्षेत्र की आंगनबाड़ी सुपरवाइजर मीना ने बताया कि आज केंद्रों पर उपस्थित माताओं को केंद्र पर वितरित होने वाले पोषाहार के बारे में बताया गया। कहा कि पोषाहार का सेवन करने से गर्भवती में खून की कमी नहीं होती। इसमे आयरन, प्रोटीन, सोयाबीन आदि का मिश्रण होता है। गर्भवती और किशोरियों को इसलिए दिया जाता है, ताकि महिला कुपोषण का शिकार न हो पाए।
ये हैं जनपद के आंकड़े
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 (2015-16) के अनुसार जनपद में 6-23 माह के लगभग 11.1 प्रतिशत बच्चों को ही स्तनपान के साथ ठोस या अर्ध-ठोस आहार प्राप्त होता है। वहीं, 52.4 प्रतिशत बच्चे ही 6 माह तक सिर्फ स्तनपान करते हैं।
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जिला कार्यक्रम अधिकारी नरेंद्र सिंह ने बताया कि सितंबर माह को पोषण माह के रूप में मनाया जा रहा है। इसी के अंतर्गत आज सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर ऊपरी आहार की महत्ता के बारे में जागरूक करने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने पौष्टिक आहार का प्रदर्शन किया। साथ ही छह माह की अवधि पूरी कर चुके बच्चों का अन्नप्राशन भी कराया। शहर के आवास विकास क्षेत्र की आंगनबाड़ी सुपरवाइजर मीना ने बताया कि आज केंद्रों पर उपस्थित माताओं को केंद्र पर वितरित होने वाले पोषाहार के बारे में बताया गया। कहा कि पोषाहार का सेवन करने से गर्भवती में खून की कमी नहीं होती। इसमे आयरन, प्रोटीन, सोयाबीन आदि का मिश्रण होता है। गर्भवती और किशोरियों को इसलिए दिया जाता है, ताकि महिला कुपोषण का शिकार न हो पाए।
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ये हैं जनपद के आंकड़े
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 (2015-16) के अनुसार जनपद में 6-23 माह के लगभग 11.1 प्रतिशत बच्चों को ही स्तनपान के साथ ठोस या अर्ध-ठोस आहार प्राप्त होता है। वहीं, 52.4 प्रतिशत बच्चे ही 6 माह तक सिर्फ स्तनपान करते हैं।
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