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फर्जीवाड़ा साबित होने के बाद अब आयोग के पाले में गेंद
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झांसी। फर्जी जन्मतिथि के मामले में पूर्व ब्लॉक प्रमुख चरण सिंह यादव के बीडीसी पुत्र के फंसने के बाद बबीना ब्लॉक की राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। जिला प्रशासन ने जांच रिपोर्ट चुनाव आयोग के पास भेज दी है। ऐसे में अब पिता-पुत्र का राजनीतिक भविष्य आयोग के रवैये पर ही निर्भर करेगा।
मोंठ ब्लॉक के मूल निवासी चरण सिंह यादव लंबे समय तक मोंठ ब्लॉक से ब्लॉक प्रमुख रह चुके हैं। अपनी पत्नी को मध्य प्रदेश से बसपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ाकर भी वह बुंदेलखंड की सियासी दुनिया में हलचल मचा चुके हैं। हालिया पंचायत चुनाव में उनका परापंरागत मोंठ ब्लॉक अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गया। इसको देखते हुए रातों-रात चरण सिंह अपने पुत्र के साथ बबीना ब्लॉक के निवासी बन गए। बबीना ब्लॉक प्रमुख की सीट इस दफे पिछड़ा वर्ग को आरक्षित है। पिता-पुत्र दोनोें ही बीडीसी का चुनाव भी जीत गए। राजनीतिक हलकों में पिता-पुत्र में किसी एक को ब्लॉक प्रमुख भी माना जाने लगा था लेकिन, इसी बीच जन्मतिथि एवं मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने को लेकर की गई गड़बड़ी उजागर हो गई। जन्मतिथि एवं मतदाता सूची में फर्जीवाड़े की चुनाव आयोग से शिकायत की गई थी। जांच के बाद इस फर्जीवाड़े की पुष्टि हो गई। अब जिला प्रशासन ने जांच रिपोर्ट आयोग को भेज दी है हालांकि सदस्यता खारिज होने को लेकर अभी कई तकनीकी पहलू हैं। निर्वाचित पदाधिकारी की सदस्यता खत्म कराना एक जटिल प्रक्रिया है लेकिन, इसे विपक्षी मजबूत हथियार की तरह इस्तेमाल करेंगे, यह तय है। ऐसे में अब ब्लॉक प्रमुख का चुनाव भी दिलचस्प होगा।
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मोंठ ब्लॉक के मूल निवासी चरण सिंह यादव लंबे समय तक मोंठ ब्लॉक से ब्लॉक प्रमुख रह चुके हैं। अपनी पत्नी को मध्य प्रदेश से बसपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ाकर भी वह बुंदेलखंड की सियासी दुनिया में हलचल मचा चुके हैं। हालिया पंचायत चुनाव में उनका परापंरागत मोंठ ब्लॉक अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गया। इसको देखते हुए रातों-रात चरण सिंह अपने पुत्र के साथ बबीना ब्लॉक के निवासी बन गए। बबीना ब्लॉक प्रमुख की सीट इस दफे पिछड़ा वर्ग को आरक्षित है। पिता-पुत्र दोनोें ही बीडीसी का चुनाव भी जीत गए। राजनीतिक हलकों में पिता-पुत्र में किसी एक को ब्लॉक प्रमुख भी माना जाने लगा था लेकिन, इसी बीच जन्मतिथि एवं मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने को लेकर की गई गड़बड़ी उजागर हो गई। जन्मतिथि एवं मतदाता सूची में फर्जीवाड़े की चुनाव आयोग से शिकायत की गई थी। जांच के बाद इस फर्जीवाड़े की पुष्टि हो गई। अब जिला प्रशासन ने जांच रिपोर्ट आयोग को भेज दी है हालांकि सदस्यता खारिज होने को लेकर अभी कई तकनीकी पहलू हैं। निर्वाचित पदाधिकारी की सदस्यता खत्म कराना एक जटिल प्रक्रिया है लेकिन, इसे विपक्षी मजबूत हथियार की तरह इस्तेमाल करेंगे, यह तय है। ऐसे में अब ब्लॉक प्रमुख का चुनाव भी दिलचस्प होगा।
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