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गृहस्थ जीवन छोड़ ब्रह्मचारी चंद्रेश बने क्षुल्लक अजेय सागर
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करगुवांजी में दीक्षा समारोह के दौरान प्रवचन देते मुनि आदित्य सागर महाराज। साथ ही मंच पर बैठे नवद?
झांसी। करगुवांजी जैन तीर्थ पर बुधवार को मुनि आदित्य सागर महाराज ने ब्रह्मचारी चंद्रेश जैन को क्षुल्लक दीक्षा प्रदान की। 18 वर्ष के युवा के वैराग्य जीवन में प्रवेश पर श्रद्धालुओं की आंखें खुशी और मोह के कारण भर आईं। दीक्षार्थी के केशलोंच की क्रिया की श्रावकों ने अनुमोदना की।
इस मौके पर मुनि आदित्य सागर महाराज ने कहा कि जीवन में रत्नत्रय को धारण कर पाना दुर्लभ होता है। भौतिक युग में यह जैनेश्वरी दीक्षा विश्व के युवाओं को उनके कल्याण का मार्ग भी प्रशस्त कर सकती है। जीवन भर पैदल चलना, 24 घण्टे में एक वार भोजन, सर्दी-गर्मी में एसी, कूलर, वस्त्रों का त्याग और सामायिक स्वाध्याय, प्रतिक्त्रस्मण के द्वारा प्राणीमात्र के कल्याण की भावना करने से संयमी के अनन्त जन्मों के पापों का क्षय होता है। इस मौके पर मुनिश्री ने अशोक नगर निवासी 18 वर्षीय युवक चंद्रेश भैया को जब वैराग्य की क्षुल्लक दीक्षा प्रदान कर क्षुल्लक अजेय सागर नाम दिया।
दीक्षार्थी के अशोक नगर से आये दादाजी बाबूलाल जैन, पिता मुकेश जैन, माता सीमा जैन व बहनें साक्षी, नयना, परी, नाना शिखर चंद्र जैन, नानी कांता जैन, धर्म माता-पिता किरण जैन, अरविंद जैन ने दीक्षा की क्रियाएं संपन्न कराईं। वहीं पिच्छिका कमंडल अनुपम जैन (सिंगापुर), प्रमिला जैन नगरा, शास्त्र भेंट प्रेमवाई जैन, विनम्र जैन, प्रदीप जैन कोकी, आशीष जैन ने किया। इस मौके पर कार्याध्यक्ष सिंघई रिषभ जैन, महामंत्री प्रवीण कुमार जैन, इं. हुकुम चन्द्र जैन, प्यावल मंत्री रवीन्द्र जैन, संजय जैन हुकुम चन्द्र जैन, डॉ. जिनेन्द्र जैन, अमन जैन, नीरज जैन, कुलदीप जैन, रिषभ जैन, अमित प्रधान, राहुल शास्त्री, पारस भैया, सुभाष जैन सत्यराज मौजूद रहे।
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इस मौके पर मुनि आदित्य सागर महाराज ने कहा कि जीवन में रत्नत्रय को धारण कर पाना दुर्लभ होता है। भौतिक युग में यह जैनेश्वरी दीक्षा विश्व के युवाओं को उनके कल्याण का मार्ग भी प्रशस्त कर सकती है। जीवन भर पैदल चलना, 24 घण्टे में एक वार भोजन, सर्दी-गर्मी में एसी, कूलर, वस्त्रों का त्याग और सामायिक स्वाध्याय, प्रतिक्त्रस्मण के द्वारा प्राणीमात्र के कल्याण की भावना करने से संयमी के अनन्त जन्मों के पापों का क्षय होता है। इस मौके पर मुनिश्री ने अशोक नगर निवासी 18 वर्षीय युवक चंद्रेश भैया को जब वैराग्य की क्षुल्लक दीक्षा प्रदान कर क्षुल्लक अजेय सागर नाम दिया।
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दीक्षार्थी के अशोक नगर से आये दादाजी बाबूलाल जैन, पिता मुकेश जैन, माता सीमा जैन व बहनें साक्षी, नयना, परी, नाना शिखर चंद्र जैन, नानी कांता जैन, धर्म माता-पिता किरण जैन, अरविंद जैन ने दीक्षा की क्रियाएं संपन्न कराईं। वहीं पिच्छिका कमंडल अनुपम जैन (सिंगापुर), प्रमिला जैन नगरा, शास्त्र भेंट प्रेमवाई जैन, विनम्र जैन, प्रदीप जैन कोकी, आशीष जैन ने किया। इस मौके पर कार्याध्यक्ष सिंघई रिषभ जैन, महामंत्री प्रवीण कुमार जैन, इं. हुकुम चन्द्र जैन, प्यावल मंत्री रवीन्द्र जैन, संजय जैन हुकुम चन्द्र जैन, डॉ. जिनेन्द्र जैन, अमन जैन, नीरज जैन, कुलदीप जैन, रिषभ जैन, अमित प्रधान, राहुल शास्त्री, पारस भैया, सुभाष जैन सत्यराज मौजूद रहे।
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